Chirag Ki Kalam ( चिराग की कलम )

जिंदगी का नशा ही काफी है ……

Month: March 2018

Indori Poha Recipe | तिरभिन्नाट पोहा-सख्त लौंडा

Indori Poha Receipe in My Style   रितिक – “ भिया राम , और का थे इत्ते दिन से दिख नी रिये थे “ । पप्पू भिया- “ अरे रितिक यार क्या बताउ अपन यार दिल्ली चले गे थे “। Read more…

Hindi Poetry | खामखा ही निकल जाता हूं

खामखा ही निकल जाता हूं, खामखा ही निकल गया था, भीड़ में अपनी पहचान बनाने , चंद कागज़ के टुकड़े जेबो में भरने। लड़ाई मेरी खुद से ही थी, दुसरो को कुछ दिखाने, अपनो से दूर आ गया हूं खामखा Read more…

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