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Showing posts from August, 2016

Writing A Poem

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  मैंने आज फिर कलम उठाई है   कोरे कागज़ पर अल्फाजो की बहार आई है , अहसासो ने फिर दिल मे एक धुन बजाई है , बहुत दिन हुये .... मैंने आज फिर कलम उठाई है   नये दौर मे एक नयी आवाज़ आई है , बीते वक्त की तस्वीर फिर आखो मे समाई है , बहुत दिन हुये .... मैंने आज फिर कलम उठाई है     कुछ दुरी पर छोड दिया था जिसे , वो मुस्कान मेरी लौट आई है ,   खुला आसमान है पाने को , कोशिशो मे नये रंग भरने को , विश्वास की वो डोर फिर खुदा ने पकडायी है , बहुत दिन हुये .... मैंने आज फिर कलम उठाई है   रुक फिर जाऊ शायद मंजिल से पहले , पर अब रुक कर बढने की हिम्मत आई है.... बहुत दिन हुये .... मैंने आज फिर कलम उठाई है... Also Read Ant hi Aarambh Hain Writing A Poem | Writing A Poem About Someone | Writing A Poem In Hindi | Writing A Poem Tips |  Poem About Your Child | Poem Template |  A Poem About Yourself | Poem Worksheet

School Friends | भाई मैं हू चिंता मत कर

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भाई मैं हू चिंता मत कर जिंदगी मे हम अकेले आते है और दुनिया की नज़र मे तो अकेले ही जाते है. परंतु जब हम इस दुनिया को अलविदा कहते है तो कई रिश्ते साथ होते है. जिनके बारे मे हमे याद नही रहता पर उन लोगो को जरुर हम याद रहते है जो हमारे साथ कई रिश्तो मे सहभागी बने. इन्ही रिश्तो मे से एक है दोस्ती का रिश्ता.   दोस्त , यार , यारा , मित्र , सखा , सहेली और भिडू ऐसे कई नामो से जाना जाता है इस रिश्ते का साथी. बचपन मे जब चाकलेट को तोडकर दोस्त को आधी देते थे लगता था जिंदगी का सबसे बडा सुकून मिला है. पेंसिल की नोक टूट जाने पर इधर-उधर नज़र घुमाते ही हमारे कंधे पर एक हाथ आ जाता था और जिस शार्पनर को हम खोज़ रहे होते थे , वो उस हाथ मे होता था. दोस्त संग रहते थे तो मुर्गा बनने मे भी मज़ा आता था. जब दोस्त का जन्मदिन होता था  | हम ऐसे खुश होते थे जैसे आज हमारा जन्मदिन हो उसके संग हर क्लास मे जाकर टाफी बाटते थे. जब कभी स्कूल मे खेलने का पिरियड होता था और दोस्त दुसरी टीम मे हुआ तब हमे धर्मसंकट शब्द का मतलब समझ आया था. दोस्त जहा कोचिंग जाता हम भी वही चले जाते या फिर वो हमारे पीछे आ जाता था |   कालेज़ मे जब आये