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Article on Life | अंत ही आरंभ है

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मॉ की गोद मे जब मे सिसकिया लेकर रो रहा था , आंखो मे आंसू कम आवाज़ मे ज़ोर ज्यादा था । तभी अचानक एक खिलौने ने मेरी आवाज़ को एक मुस्कुराहट मे बदल दिया और अगले पल मे वो खिलौना मेरे हाथो मे आ गया । मैं बडे आराम से खिलौने से खेल रहा था । तभी किसी ने मेरे हाथ से उस खिलौने को छिन लिया । मुझे लगा था के ये अंत है पर अंत ही आरंभ है । दिल मे मैंने ठान लिया के जिस दिन घुटनो के बल चल लूंगा उस खिलौने को अपने हाथो मे फिर ले लूंगा । आखिर एक दिन मैं घुटनो के बल चलने लगा और जाकर उस खिलौने को मैंने थाम लिया । तभी वो खिलौना मेरे हाथो से फिर किसी ने छिन लिया और दौड कर वो ओझल हो गया मेरी आंखो के आगे से । मुझे लगा था के ये अंत है पर अंत ही आरंभ है । कुछ वक्त बाद मैं चलने और दौडने लगा । दौड कर मैंने फिर उस खिलौने को पा लिया और इस बार मैं बहुत देर तक उस खिलौने के साथ खेलते रहा । परंतु ये देर भी ज्यादा देर तक ना रुकी और फिर मेरे हाथो से खिलौने को छिन कर एक हाथ मे किताब और एक हाथ मे पेंसिल पकडा दी । मुझे लगा था के ये अंत है पर अंत ही आरंभ है ।  मैं कभी पेंसिल को तो कभी पेन को घिस-घिस कर आगे बढता गया और जब कुछ