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Showing posts from March, 2018

Indori Poha Recipe | तिरभिन्नाट पोहा-सख्त लौंडा

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Indori Poha Receipe in My Style   रितिक – “ भिया राम , और का थे इत्ते दिन से दिख नी रिये थे “ । पप्पू भिया- “ अरे रितिक यार क्या बताउ अपन यार दिल्ली चले गे थे “। रितिक- “ भिया वा क्या करने गे थे “। इतने मे उमेश का आना हुआ –“ भियाओ...जय श्री महाकाल , और कई अतरा दिन थे का था तम दिखिया कोणी ? मने तमारे भोत ढूंढ्यो दादा ? तम मानोगा नी महाकाल मंदिर के बाहर मने रोज़ चक्कर काट्या ने अणी चक्करा मे जूता भी पडी गिया “। पप्पू भिया-  “ अबे गेलिये तू म्हारे महाकाल मंदिर के बाहर काय वास्ते ढूंढी रियो थो “। रितिक- “अरे भिया वो तुम कांड कर गये थे नी इंदौर मे , राजबाडा परवो एक ने जब जीरावन कम डाला पोहे मे तो तुमने उसको भोत मारा था । फिर वो टी.आई तुमको कब से ढूंढ रे थे नी ।“ उमेश- “ हा भिया अणी वास्ते म्हारे लागियो के तम जो है नी कबार वी भिखारी बैठे नी महाकाल के बाहर वा बैठिया होयगा ने तमारे देखवा के चक्कर मे मणे कई एक भिखारी को कटोरो छिन लियो ने फिर जो म्हारी धुलाई की नी भिया कई बताओ तम्हारे । म्हारे तो लाग्यो के ई सब पुलिस वाला ओन के कोई मिल्यो कोणी मारवा वास्ते तब हीच म्हारे उडाई दियो “। ये सब सुनने

Hindi Poetry | खामखा ही निकल जाता हूं

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खामखा ही निकल जाता हूं, खामखा ही निकल गया था, भीड़ में अपनी पहचान बनाने , चंद कागज़ के टुकड़े जेबो में भरने। लड़ाई मेरी खुद से ही थी, दुसरो को कुछ दिखाने, अपनो से दूर आ गया हूं खामखा ही निकल जाता हूं, खामखा ही निकल गया था, मुश्किलें मेरी अपनी थी, सवाल भी मेरे थे, आज कुछ दूर आकर घर से, वही रोटी फिर खा रहा हूं जीतने की चाहत भी थी, हारने से घबरा रहा था, चार कदम निकल कर शहर से, जीत कर फिर आज हार गया हूं खामखा ही निकल जाता हूं, खामखा ही निकल गया था, आभासी इस दुनिया के, चोचलों को सच मान रहा हूं, गाव की उस मिटटी को आज फिर कोस रहा हूं उड़ने की आजादी तो अब मिली है, जंजीर से बंधे मेरे पैरो को देखकर ही इतरा रहा हूं, खामखा ही निकल जाता हूं, खामखा ही निकल गया था, वीकेंड और सैलेरी क्रेडिट के मैसेज के इंतेजार में ही, हफ्ते दर हफ्ते ,महीने दर महीने , साल गुज़ार रहा हूं। जिस टिफिन को स्कूल में खाते वक्त बड़े सपने देखता था, आज उसी टिफिन को महीने में कभी कभी खा रहा हूं । खामखा ही निकल जाता हूं, खामखा ही निकल गया था, मुस्कराहट जो एक वक्त पर, बीना कारण आ जाय करती थी, आज उसे ढूंढने के लिए, यू ट्यूब पर aib और clc क