Tuesday, 31 October 2017

Age is just a Number for Nehraji | हमारे अपने बिंदास नेहराजी


क्रिकेट के खेल मे कई उतार चढाव होते है और इसिलिये इसे अनिश्चित्ताओ का खेल कहा जाता है । भारतीय क्रिकेट मे कई एक से बढकर महान खिलाडी आये और उन खिलाडीयो के शुरुवाती दौर से लेकर उनके खेल के करियर के आखिर तक हम सोचते है के ये खिलाडी अभी ओर आगे खेले और देश का नाम रोशन करे । इन सबके बीच कुछ खिलाडी ऐसे भी है जो महान खिलाडीयो की श्रेणी मे नही आ पाये पर जब-जब वो खेले उनका खेल हमेशा उच्च स्तर का ही रहा है ।

 


आशीष नेहरा उन्ही खिलाडीयो मे से एक है । नेहराजी के नाम से मशहूर इस खिलाडी का जन्म 29 अप्रैल 1979 को दिल्ली मे हुआ । नेहराजी एक टिपीकल दिल्ली के लडके से बिलकुल अलग है ।एकदम सिम्पल और अपने मन की करने वाले नेहराजी ने 1997-98 मे दिल्ली के लिये घरेलू क्रिकेट मे  डेब्यू किया था । दुबले-पतले नेहराजी गेंद को दोनो ओर स्विंग कराने मे माहीर है । 24 फरवरी 1999 को पडोसी देश श्रीलंका के खिलाफ़ उन्होने अपने टेस्ट करियर का आगाज़ किया था  और 21 जून 2001 को जिम्बाब्वे के खिलाफ एकदिवसीय करियर का आगाज़ किया । नेहराजी ने जिम्बाब्वे के इस दौरे पर जो कहर ढाया था उसे आज भी सब याद करते है । उन्होने उस दौरे पर अपनी स्विंग गेंदबाजी से हर बल्लेबाज़ को नचाया और भारत को विदेशी जमीन पर 15 साल बाद टेस्ट जीतने मे मदद की ।
Ashish Nehra

 


 

नेहराजी का असली जादू साऊथ अफ्रीका मे विश्व कप 2003 मे देखने को मिला जहा उन्होने दुनिया के हर बल्लेबाज़ को अपनी स्विंग गेंदबाजी से परेशान किया । खासकर इंग्लैड के खिलाफ डरबन मे उन्होने जो गेंदबाजी की वो आजतक हम सबके ज़ेहन मे है । उस दिन ऐसा लग रहा था के गेंद सिर्फ और सिर्फ उनकी ही बात सुन रही थी । उस मैच मे भारत ने 9 विकेट पर 250 रन बनाये थे । जवाब मे इंग्लैड के 2 विकेट सिर्फ 18 रन पर गवा दिये थे । उसके बाद नासिर हुसैन और माइकल वान क्रिज़ पर टीक गये और लगा के ये दोनो आसनी से मैच निकाल देंगे पर तब तक नेहराजी का जादू बचा था । सबसे पहले नेहराजी ने एक शानदार आऊट स्विंगर डाल कर आऊट किया और फिर जो फालो थ्रू मे उन्होने किया वो गेंद की स्विंग को बता रहा था । अगली गेंद पर उन्होने अपनी स्टाक बाल डाली जो दाये हाथ के बल्लेबाज के लिये पड्कर अंदर की ओर आती है और एलेक स्टूवर्ट के कुछ भी समझ नही आया और इंगलैड ने दो गेंदो पर दो विकेट गवा दिये । नेहरा जी ने इस विकेट के बाद दादा को इशारे मे बताया भिया ये भी डाल सकते है अपन । नेहराजी ने दो ओवर बाद फिर से बाहर जाती हुई गेंद डाली और माइकल वान को चलता किया और फिर से फालो थ्रू मे गेंद की स्विंग को बताया । अगर आपने वो मैच देखा हो तो नेहराजी ने जो चौथा विकेट लिया ।  वो गेंद एक बेहतरीन गेंद थी । पिच पर पड्कर गेंद ने तेजी से कांटा बदला और कोलिंगवूड के बल्ले का किनारा लेकर गेंद नेहराजी ने बचपन के दोस्त सहवाग के हाथो मे फर्स्ट स्लिप मे चली गई और सहवाग ने बचपन मे नेहराजी का नाश्ता खाने का हिसाब चुका दिया । इस बार उन्होने फालो थ्रू मे कुछ नही किया शायद उन्हे भी आश्चर्य हुआ इस गेंद के इतने स्विंग होने पर । इसके बाद बाकी विकेट नेहराजी के आसान हो गये क्योंकी इंग्लैड के बल्लेबाजो उनकी गेंदे समझ नही आ रही थी । वाईट और इरानी को बेहतरीन आऊट स्विंग से आऊट करके उन्होने विश्वकप मे भारतीय गेंदबाजो का तब तक का सबसे बढिया प्रदर्शन किया ।

 
 उन्होने उस मैच मे 6 विकेट लिये मात्र 23 रन देकर । इसके अलावा उन्होने उस विश्व कप मे 149.7 कि.मी /घंटे की रफ्तार से गेंद फेकी थी जो उस वक्त किसी भी भारतीय तेज़ गेंदबाज़ के द्वारा फेकी गई सबसे तेज़ गेंद थी ।

 
इस विश्वकप के बाद दुबले-पतले नेहराजी को इंजुरी ने पकड लिया परंतु 2004 मे उन्होने वापसी जब ज़हीर खान आस्ट्रेलिया के दौरे से बाहर हो गये थे । परंतु उस समय वो फिर से वही शानदार प्रदर्शन दोहरा नही पाये । नेहराजी इंजुरी के कारण कई बार टीम से बाहर रहे और इसी इंजुरीस के कारण उनके प्रदर्शन मे निरंतरता नही रही । लेकिन उन्होने कभी हार नही मानी जब वो पूरी तरह से फिट होकर वापस लौटे तो उन्होने आई.पी.एल मे धूम मचाई और शुरुवाती ओवर्स मे बल्लेबाजो परेशान करने वाले नेहराजी डेश ओवर के भी स्पेश्लिस्ट बन गये । इसी के बदौलत वो फिर से टीम मे वापस आये और शानदार गेंदबाजी के साथ उन्होने नये गेंदबाजो के संग अपना अनुभव भी बाटते रहे । 2011 विश्वकप मे भी वो शानदार फार्म मे थे परंतु सेमिफाइनल मे उन्हे फिर से चोट लगा गई और वो फाइनल नही खेल पाये । 1999 से खेल रहे नेहराजी कल 1 नवबंर 2017 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह देंगे । न्यूजीलैण्ड के खिलाफ कल होने वाला टी-20 उनका आखरी अंतरराष्ट्रीय मैच होगा साथ ही अब इसके बाद वो आई.पी.एल भी नही खेलेंगे ।

 
नेहराजी ने अपने  18 साल के करियर मे 17 टेस्ट मैच खेले और 42.40 की औसत से 44 विकेट लिये है । उन्होने 120 एकदिवसीय मैचो मे 157 विकेट लिये है और 25 टी-20 मैचो मे 34 विकेट लिये है ।

 
नेहराजी 2003 और 2011 के विश्वकप मे भारत की टीम का हिस्सा थे, साथ ही दो एशिया कप और तीन चैम्पियन ट्राफी मे भी भारत की टीम के साथ थे ।

 
नेहराजी के बारे मे कई बाते है जो बडी ही इंटरेस्टींग है जैसे कोहली को स्कूल क्रिकेट मे प्राईज़ देना, सोशल मिडिया से दुरी और ऐड्वाईस देना । उनके बारे मे मशहूर है के अगर उन्होने किसी गेंदबाज़ को कोई एड्वाईस दी तो वो फेल नही होती ।

 
नेहराजी भले ही महान क्रिकेटर नही बने परंतु अपनी चालकी और स्विंग से हमेशा बल्लेबाज़ो को परेशान करते रहे उनका अनुभव आने वाले समय मे नये तेज़ भारतीय गेंदबाजो के काफी काम आ सकता है ।




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Sunday, 24 September 2017

India Vs Australia Odi | तिरभिन्नाट पोहा






“यार उमेश बोत दिन हुये ये पप्पू भिया नी दिख रे है “ –रितिक ने कहा । “ हा यार मैं भी काम के चक्कर मे उधर जा नी पा रिया हू ने फिर शाम को पानी आ जाता है नी तो फिर अपन कहा पप्पू भिया को ढूढो “ –उमेश ने कहा । रितिक –“ क्यो रे गेलिये पानी का पप्पू भिया से क्या लेना देना “ । उमेश-“ अरे यार पिछले साल बारिश गिरे ने के पप्पू भिया का फोन आये , ने फिर मेरे से के चल चले अड्डे पे “। रितिक –“ अबे तो दारू हीच तो पीने का के रिये थे कौन सा तेरे को तीर्थ करवा रिये थे “। उमेश-“  अबे नी यार , तू समझियो कौणी , पप्पू भिया शुरु के 2-4 पैक तो ऐसे पीये जैसे कोई मैजिक सिगनल खुलते ही दौडे ,ने फिर उने चढ जाये ने फेर अपणा नी पीन दे, बार –बार दे लप्पड- दे लप्पड ने के दारू पीना बूरी बात है “।





रितिक ने दूर से पप्पू भिया को आते देखा और कहा –“अरे नी यार अपने पप्पू भिया ऐसे नी है वो तो सज्जन आदमी है , पीयो और पीने दो मे विसवास रखते है रे “। पप्पू भिया उमेश के पीछे आकर खडे हुये और रितिक को चुप रेने का इशारा किया । उमेश –“अबे गेलिये तेरे को सज्जन दिखते है , तू और पप्पू भिया दोनो ही सर्किट हो “। ये कहते हुये उमेश पलटा और पप्पू भिया को देख के जो उसकी आवाज़ अब तक न्यूज़ रिपोर्टर की तरह फर्राटे से चल री थी वो एक नर्वस इंटरविव देने वाले सरीकी हो गई । उमेश-“  अरे भिया मैं तो के रिया था के पप्पू भिया हमारी बिमारी , हमारा दर्द अपने पास रख लेते है , जैसे भगवान भोलेनाथ ने विष पिया था वैसे ही ये हमे बचाने के लिये दारू पी लेते है “। पप्पू भिया ने ये सुनते ही दो लप्पड उमेश को लगाये और कहा –“ गेलिये भोलेनाथ का मज़ाक उडाता है “।

 

रितिक –“अरे भिया इसे छोडो ने ये बताओ कहा थे इत्ते दिन , ने वो मैच है यार कल ने कोई टिकीट की जुगाड नी हुई भिया “। पप्पू भिया-“ अरे रितिक , इसीज़ काम से तो गिया था मैं “। उमेश –“भिया इतना टेम तो शादी के कारड प्रिंट करवाने मे नी लगता उससे ज्यादा तुम्हे मैच के टिकीट प्रिंट करवाने मे लग गिया, क्या हाथ से पैंट कर रिये थे क्या “।




पप्पू भिया को फिर गुस्सा आ गिया और दे लप्पड –दे लप्पड उमेश को । पप्पू भिया – “ अबे नी बे बारिश एक तो अपने इधर होई नी तो पेले मे रिशीकेश के जंगल मे गया ने वहा अभी सिहस्थ मे दो चार बाबाओ से अपनी जो भेट हुई उनसे मिला ने बारिश का उपाय पूछा । फिर जो उपाय बताया तो किया अपन ने उपाय दो दिन बाद मैंने पेपर मे पढा के इंदौर मे जोरदार बारिश हुई । पर अपन क्या थोडा ज्यादा मे विसवास रखते है तो अपन ने उपाय मे सामग्री ज्यादा डाल दी जैसे अपन जीरावन ने सेव डालते है नी वैसे , इसिलिये तो बारिश अब तक हो री थी । "

India Vs Australia Odi

 

 

रितिक- “ वा भिया तुम तो बहुत पोचे हुये निकले पर फिर  बारिश तो रुक गी थी और फिर भी तुम काफी दिन मे आये , वही रुक गे थे क्या भिया “। पप्पू भिया –“ नी बे , वो वापसी मे आ रिया था वो  रवी का फोन आया ने किया के यार मैच है तुम्हारे यहा ने पानी गिर रिया है और बोले के अपन सोच रे है पेले तीन जीत के सिरीज़ जीत ले तो फिर नये छोरो को चानस देंगे । अब अपना दिमाग फिरा अपन ने फिर उस बाबा को जैसे तैसे ढूंढा ने बारिश को भारत मे दुसरी जगह करवाने का उपाय किया और फिर रुका पानी “।



उमेश- “भिया मान गये , तुम्हारे पैर कहा है , छूना है “। पप्पू भिया- “रेनदे , सैंडविच पर घी मत लगा “। रितिक- “ भिया वो सब ठीक है पर ये रवि कौन है और कौनसे मैच की के रिया था , कही वो अपना मरीमाता वाला तो नी “। पप्पू भिया – “नी रे ऐबले , मैं रवि शास्त्री की के रिया हू , भारत की क्रिकेट टीम का कोच “। उमेश – “तो भिया तुम फिर तो रेडिसन गये होंगे कल “। पप्पू भिया – “ हओ रे , ऐयरपोर्ट से रेडिसन के बोत चक्कर लगे ने उसके पेले अपन राजबाडे मे बरसाती वाले के यहा गिये ने उसको आर्डर दिया ने बास वाले से बास और चार छोरे लेके ,स्टेडियम के उपर बांध दी बरसाती ने उसकी रस्सी अपांयर को दे देंगे, जैसे आजादी वाले दिन झंडा फेराते है नी बस वैसे ही पानी आते ही अपांयर रस्सी खेंच देंगे ने बरसाती से पूरा स्टेडियम ढंक जायेंगा ।“ 



रितिक –“ गजब भिया, तुम या क्या कर रे हो तुमे तो मतलब साईटिस होना था “। पप्पू भिया- “अबे अब समाज सेवा कौन करेगा अगर मै साईटिस बन जाऊ तो “। उमेश –“ भिया पिलेयर से मुलाकात हुई के नी किसी से “।



पप्पू भिया-  “अबे क्या के अब, सबके अपने स्टाईल का खाना  धोनी भिया के लिये सुबह चार बजे उठ के ने वो पाटीदार से 6 लीटर दूध लाया,कोहली भिया को ना जाने कौनसी मछ्ली चिये थी ने पिछली बार उनने इस चक्कर मे पोहे नी खाये तो फिर मछली बज़ार जाके ने मछली लाये ने वो मछली भी उज्जैन के एक तालाब मे मिली बताओ अब । ने फिर कुछ पिलेयर तो अपने सज्जन है जैसे रहाणे उसको खजराना जाना था उसको अपन ने वहा पोचा दिया ने बढिया पूजा करवा दी ।




अब एक वो पांड्या , अजब स्टाईल कर रखी है उसने मैंने रवि भिया से की थी के यार इसको सही करवा दो कही पुलिस परदेशीपुरा का समझ के धर नी ले पर नी माना,निकल गिया अकेले बजार मे ,अब अपने यहा की पुलिस बोत स्ट्रिक्ट है ।तो धर लिया फिर वा जाके उसे छुडाया । “ उमेश –“ भिया  भिया भिया” । पप्पू भिया-“ हा यार उमेश अब क्या करे करना पडता है अच्छा कल मैच के बाद रात को दो बजे सराफा आ जाना उधर अपन ने  एक पार्टी रखी है दोनो टीम के पिलेयर आयेंगे ने जम के करेंगे नाश्ता , वो आस्ट्रेलिया वाले तो मान गे फिर विराट भिया को भी समझाया के फिटनेस ठीक है पर कभी- कभी चलता है ने फिर अपने इंदौर का स्वाद भी गजब है और आखिर मे अपन ने रामबाण फेका और अनुष्का भाभी से केलवा दिया फिर तो मानना ही था , क्यो है ना रितिक और उमेश “।

 
रितिक और उमेश पप्पू भिया को दंडवत प्रणाम कर रे थे ।

बाकी की तिरभिन्नाट पोस्ट पढने के लिये नीचे दी हुई लिंक पर क्लिक करो भिया


 

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Sunday, 10 September 2017

Holiday At Grandparents House


इस दुनिया मे जब हम आते है । कई सारे रिश्तो से जुड जाते है । इन्ही सब रिश्तो मे एक रिश्ता होता है । दादा-दादी और नाना-नानी का और अगर सच कहू तो ये एक ऐसा रिश्ता है जहा शायद हमे सबसे ज्यादा प्यार मिलता है । चाहे आप इस दुनिया के छुट्टीया मनाने कही भी चले जाये परंतु गर्मियो की छुट्टीयो मे दादा-दादी और नाना-नानी के घर जाना सबसे बेहतर समर होलिडे होगा । हर कोई अपने दादा-दादी और नाना-नानी के साथ समय बिताना चाहता है ।


 
जब हम छोटे थे तब शायद इतना हम ये नही सोचते के हम अपने माता-पिता के माता-पिता के साथ समय कैसे बिताना चाहते है । फिर जब नौकरी लगती है और ज्यादा वक्त जीवन की आप-धापी मे जाता रहा  । तब इस बात के बारे मे सोचते है के अगर मौका मिले या ये कहे के काश छुट्टीया मिले तो कुछ वक्त उनके साथ गुज़ारे ।

 

एक दिन दादाजी-दादीजी के साथ


 
दादाजी-दादीजी के संग वक्त गुजारने का अपना ही मज़ा है । उस वक्त हमे जो किस्से कहानिया सुनने को मिलते है । वो शायद ही कही और सुनने को मिले । मैं अपने दादाजी के साथ अपने गाव “कैथूली” जाना चाहता हू । वहा जाकर उनके संग उन गलियो मे घुमना चाहता हू । जहा उन्होने अपने जीवन के कई साल बिताये है । दादाजी के खेत पर जाकर उनसे वहा  उगने वाली फसलो के बारे मे जानना चाहता हू । खेत मे पानी कैसे देते है और साथ ही कैसे आखिर पुराने वक्त मे यहा खेती हुआ करती है सब जानना चाहता हू ।



फिर उसके बाद हम कैथूली के ही पुराने मंदिर मे बैठेंगे और उस वक्त मुझे दादाजी गाव के कई लोगो से मिलवायेंगे । आप माने या ना माने जितने खुशी से गाव के लोग किसी से मिलते है जो आदर सत्कार वो लोग करते है । वो हम शहर वालो के लिये काफी मुश्किल है । दादाजी के संग दिन का वक्त बिताने के बाद फिर जब हम घर जाये तो दादीजी के हाथ के बने घी के पराठे और बेसन का स्वाद दुनिया के किसी भी होटल से बेहतर होगा । खाने के बाद फिर घर मे जो पेड लगा है उसकी छाव मे एक प्यारी सी नींद लेने का मज़ा भी बहुत आयेगा । गाव मे अक्सर जब भी कोई मेहमान आता है तो उसे आस-पडोस वाले अपने घर पर जरूर बुलाते है । दिन की इस नींद के बाद इसी का सिलसिला शुरु होगा । शाम के वक्त गाव की एक सैर और साथ ही चौपाल पर बैठकर दादाजी और बाकी बुजूर्गो की बाते और अनुभव इस दिन का अंत शानदार बना देंगा । रात मे ना तो पंखा ना ऐसी और ना बिस्तर की जरुरत लगेगी क्योंकी गोबर से लेप किये हुये फर्श की ठंडक इन सबसे बेहतर होगी । दादाजी तो अब इस दुनिया मे नही है परंतु मैं और दादीजी जब भी गाव जायेंगे दादाजी हमारे साथ हमारे दिल मे वही होंगे ।

Holiday At Grandparents House



एक दिन नानाजी-नानीजी के साथ


 
मेरे नानाजी और नानीजी दोनो ही शिक्षक थे । अब जब मैं शामगढ उनके घर जाता हू तो जो सुकून और चैन मिलता है  वो कही और ढूंढना मुश्किल है । नानाजी और नानीजी के दिन की शुरुवात सुबह 5 बजे से होती है । सुबह 6 और 8 बजे के समाचार नानाजी के रेडियो पर सुनना कई न्यूज़ चैनलो की न्यूज़ से बेहतर होता है । नानाजी के घर के सामने ही पोहे की दुकान है । 8.30 बजे जैसे ही वहा पोहे और समोसे तैय्यार होंगे । नानीजी किसी को भेजकर पोहे और समोसे मंगवा लेंगे । नानाजी एक लेखक भी है । पोहे और समोसे खाते खाते उनके साथ लेखन की बारिकी को सिखना और उनसे कहानिया सुनने मे बडा मज़ा आयेगा । नानीजी के हाथ का बना अचार दुनिया मे बने किसी भी सास और अचार से बेहतर होता है । खासकर नींबू का अचार । दिन के खाने मे वो अचार खाने का स्वाद 100 गुना बढा देता है । शाम के वक्त नानाजी रेलवे स्टेशन पर घुमने जाते है और साथ होता है उनका वही रेडियो जिस पर सिर्फ आधे घंटे मे आप सारी खबरे जान सकते हो । जिसे जानने के लिये आपको टीवी पर शायद घंटो लग जाये । नानाजी –नानीजी के साथ शाम का समय उनके अनुभव और पुराने किस्से सुनने मे बितेगा और रात को खाने के बाद छत पर बैठकर नानाजी कहानी सुनायेंगे । नानाजी काफी अच्छे कहानी वक्ता है ।

 
ये जो दो दिन मैं बिताऊंगा उन दो दिन मैं अपने संग मोबाईल नही रखुंगा और फिर भी मुझे लगेगा के दिन जल्दी बित गये ।

 
ये पोस्ट मैं अपने दादाजी-दादीजी और नानाजी-नानीजी को समर्पित करना चाहता हू ।

#LoveJatao
I look forward to hear from you how would you celebrate Grandparents Day.

I look forward to hear from you how would you celebrate Grandparents Day. Do share a selfie with your grandparents on Sept. 10, 2017 on Twitter or Facebook with #LoveJatao & tag @blogadda to win a goodie from Parachute Advansed


 

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Sunday, 27 August 2017

Love Story Book | कुछ किताबे तुम जैसी है





कुछ किताबे तुम जैसी है । पुरी होने पर भी अधुरी सी है । उनके हर पन्ने पर एक निशान बनाया है मैंने और ये निशान तुम्हारे साथ बिताये लम्हो की यादे है । किताब मे कुल मिलाकर बस 365 पन्ने है । हर पन्ने को हर दिन एक –एक करके पढता हू और जिस साल मे 366 दिन होते है, उस दिन उस साल एक खास पन्ने को दो दिन तक पढ्ता हू ।




ये वही पन्ना है जिसमे किताब के हीरो ने हीरोईन को पहली बार मेले मे देखा था । तुम्हे याद है वो मेला जब तुम वो रिंग वाले स्टाल पर उस ताजमहल की मूरत को पाने की कोशिश कर रही थी और जब-जब तुम कामयाब नही हो रही थी तो गुस्से मे सर को जोर से हिला रही थी । जिसके कारण तुम्हारी जुल्फो से एक लट बाहर आ जाती थी । ये लट तुम पर बहुत खूबसूरत लग रही थी ठीक वैसे ही जैसे किताब मे किस पन्ने तक पढा है वो याद रखने के लिये एक रेशम सा चमकदार धागा होता है । 



वो धागा जैसे किताब की खूबसूरती मे चार चांद लगा देता है । ठीक वैसे ही वो लट तुम्हारी खुबसूरती को बढा रहा थी । या तो उस दुकान वाले की उम्र ज्यादा होगी या फिर वो अपनी बीवी या गर्लफ्रेंड से डरता होगा । वर्ना मै उसकी जगह होता तो अपने हाथो से वो ताज़महल तुम्हारे हाथो मे रख देता ।


मैं चाहता तो वो ताजमहल भी जीतकर तुम्हे उस वक्त दे देता । परंतु तुम उस ताज़महल से ज्यादा खूबसूरत हो और फिर असली ताजमहल भी तुम्हारी ही तरह खूबसूरत मुमताज़ की याद मे बनाया गया था ।


Love Story Book

तभी अचानक मेरी किताब के पन्नो को तेज़ हवा ने पलट दिया और वो उस पन्ने पर ले आयी जो उस किताब का सबसे अनमोल पन्ना था । वैसे उस पन्ने पर शीर्षक कुछ और था , परंतु मैंने तो उसे “ इज़हार” ये नाम दिया था । अब तुम समझ ही गयी हो मैं किस दिन की बात कर रहा हू । ये वही दिन है जब मैंने ये ठान लिया था के आज तुमसे दिल की बात कह के ही रहूंगा । वैसे मैंने इस दिन की तैय्यारी काफी की थी । इस दिन से ठीक एक महीने पहले अपने दोस्तो मे से किसी एक को तुम समझता और इज़हारे इश्क की प्रेक्टिस किया करता था । वैसे दोस्तो को तुम समझना काफी मुश्किल था पर और करता भी क्या ? अच्छा वैसे मेरे कालेज़ की ही एक लड्की जो मेरी अच्छी दोस्त थी ,  उसने कहा तो था के मैं प्रेक्टिस उसके साथ कर लू पर झूठ मे ही सही मैं तुम्हारे साथ बेवफाई नही कर सकता ।



आखिरकार वो दिन आ ही गया था । डर तो था मन मे के अगर तुमने मना कर दिया तो आगे की जिंदगी कैसे बिताऊंगा क्योंकि मैं भारतीय सिनेमा का वो विलेन नही था जैसा रोल शाहरुख खान ने डर मे किया था । मैं कैंटिन मे ठीक वक्त पर पहुच गया था और वही बैठा था जो तुम्हारी सबसे फेवरेट जगह थी । मेरे दोस्त तुम्हारे घर से लेकर कैंटीन तक आने की सारी खबर अपडेट दे रहे थे । उस दिन ना जाने क्यो तुम घर से देर से निकली और तुम्हारे इंतेजार मे पहले 2-4 चाय पी फिर 2 कोल्ड्रिंक । फिर लगा के कही कोल्ड्रिंक के कारण ज्यादा डकारे ना आ जाये तो फिर चाय पी ली । ये तुम्हारे इश्क का ही नशा था के ओर कुछ उस दिन असर ही नही कर रहा था ।

 
आखिरकार तुम आ गई और तुम उस पिंक सलवार-कुर्ते मे बहुत अच्छी लग रही थी । तुम जैसे ही टेबल के पास आयी मैं उठा और वहा से चल दिया । तुमने शायद इतना ध्यान नही दिया । मैं कुछ दुर जाकर काउंटर से फूल ले आया और बस वही फिल्मी अंदाज़ मे घुटनो पर बैठकर कर दिया अपने इश्क का इजहार । वैसे तुमने कुछ देर तो आश्चर्य से देखा , मेरे हाथ से फूल लिया और अपनी बुक मे उसे रखकर चल दी । तुम्हारे चेहरे पर मुस्कुराहट नही थी । मैं बडा उदास था , समझ नही आया के अब क्या करू ।



अचानक इसी सोच मे वो किताब मेरे हाथो से गिर गई और जब उसे उठाया तो किताब का वो पन्ना हाथ मे आया जब उस लडके से लडकी कुछ दिन बाद मिलकर अपना फैसला बताती है । तुम उस फूल को लेकर मेरे पास आई थी जो मैंने उस दिन तुम्हे दिया था । मुझे लगा के अगर तुमने इतने दिन तक अगर फूल सम्भाले रखा है तो जरुर कोई खास बात होगी ।  तुमने जो कहा वो अद्भुत था क्योंकी वो हर लडके ने सुना जरुर था । परंतु अपनी जिंदगी मे अपने इश्क से कभी सुनना पसंद नही करता । तुमने मेरे फूल को वापस देकर बस यही कहा के तुम मुझसे इश्क नही कर सकती । फूल जैसे ही मैंने हाथ मे लिया वो टूट्कर बिखर गया था । वैसे इस ना के कारण तो कई थे परंतु मैंने उसे जानना नही चाहता था ।

 
इसके आगे मैंने उस किताब को कभी पढा नही , दोस्त ने पढी है वो किताब कह रहा था के उस किताब के अंत मे हीरो –हीरोईन मिल गये थे । दोस्त जब –जब उस किताब के उस पन्ने का जिक्र करता था जिसमे वो लडका और लडकी कालेज़ खत्म होने पर मिलते है । तब –तब मुझे वो दिन याद आ जाता था जब कालेज़ के 3 साल बाद मैंने तुम्हे कैफे मे देखा था । दिल तो किया के तुमसे कारण पूछ लू मगर लगा के तुमने जो किया गुनाह तो नही था । इसके अलावा मैंने उस किताब के किसी ओर पन्ने के बारे मे किसी से जिक्र नही किया क्योंकि मेरे लिये तो किताब वही खत्म हो गई थी ।  

 
कुछ किताबे तुम जैसी है । पुरी होने पर भी अधुरी सी है ........

 
ये कहानी आपको कैसी लगी बताईयेंगा , ये कहानी एक लेटर की तरह है जो एक लडके ने एक लड्की को लिखा है । .




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Sunday, 6 August 2017

Friendship Poem In Hindi | वो था दोस्त



 
Friendship Poem In Hindi


Friendship Poem In Hindi


बचपन मे जब पार्क मे जाता था,
तो मेरे लिये जो झुला-झुलने का नबंर लगाता ,
मेरी पेंसिल की नोंक टूट जाने पर ,
अपनी पेंसिल को तोड्कर जो देता ,
वो था दोस्त,

 
टिफिन मे जो मेरी पसंद का खाना लेकर आता,
किसी से भी मेरी खातिर जो भिड जाता,
टीचर अगर मुझे क्लास से बाहर कर देता ,
तो जानबूझकर गलती करता और क्लास से बाहर हो जाता,
वो था दोस्त,

 
उसे चाहे जीरो मिले हो,
पर मेरे नबंर ज्यादा आने पर,
दुसरो को चिढाता ,
जिसके स्कूल ना आने पर,
हर चीज़ अधुरी लगती थी,
वो था दोस्त,

 
साईकल पर जो बैठा कर ,
पूरा शहर घुमाता,
संग उसके मेले मे चाट खाने का मज़ा बहुत आता,
क्रिकेट की पिच पर अगर वो साथ होता
तो हर टारगेट पूरा कर लिया जाता
वो था दोस्त,

 
अपने जन्मदिन पर सबको छोड कर,
सबसे पहले जो मुझे केक खिलाता,
मेरे गिफ्ट सबसे शानदार बताता,
और रिट्न गिफ्ट दो चार ज्यादा ही दे देता
वो था दोस्त,

 
कंधे पर जब हाथ उसका होता,
दुनिया की हर चीज़ पर हक अपना होता,
गलती होने पर जो डाटता भी
और फिर वही गलती करता
वो था दोस्त,

 
इश्क मे जब आंख भर आती,
दिल टूट जाता ,
“अरे वो तेरे लायक नही है भाई “ कहता
और फिर अगली किसी लड्की को भाभी कहता ,
और प्रेम पत्रो को उस तक पहुचाता,
वो था दोस्त,

 
पेपर के आखरी दिन तक जिसके संग पढाई करता,
जिसकी मदद से असाइन्मेट करता ,
जो कभी मेरी बातो का बुरा नही मानता ,
और जो साथ हो तो कभी डर नही लगता ,
वो था दोस्त,  



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Monday, 17 July 2017

Shayari Hindi | वो दूर है हमसे



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Hindi Shayari



तस्वीर दिल मे है उनकी तो क्या बडी बात है
 जुबां पर नाम है उनका तो क्या बडी बात है
 और लकिरो मे अगर वो नही
 तो क्या बडी बात है

 
नींद का आलम कल रात कुछ ऐसा था ,
 आंख खोलू तो वो ,
और आंख बंद करू तो वो

 

Poetry In Hindi

 
तकदीर मेरी भी बडी चालाक थी ,
आईने मे जब खुद को देखता था,
 मुई चेहरा बदल देती थी

 
यकीन आयेगा तुम्हे शायद जीतने के बाद
 के हार गये होते तो शायद बेगुनाह होते

 
वो दूर है हमसे,
 ये गम नही है ,
कातिल दूर से ही शिकार कर रहा है ,
 ये भी कोई कम नही है

 
थकान अब नही आती मुझे ,
उसे भी चैन की नींद मॉ की गोद मे ही आती थी







 

Thursday, 6 July 2017

Sachin Tendulkar first century | सचिन बस नाम ही काफी हैं -1


सचिन रमेश तेंडुलकर जी हा ये हैं क्रिकेट के भगवान का नाम.बल्लेबाजी के हर रिकार्ड उनके नाम हैं.चाहे एकदिवसीय क्रिकेट मे 200 रन बनाना हो, या सबसे ज्यादा शतक लगाना हो.

उनका हर शतक लाजवाब रहा हैं. उनके हर टेस्ट शतक को हम अपनी इस सीरिज-“ सचिन बस नाम ही काफी हैं” मे कवर करेंगे.
आज बात करते हैं उनके पहले शतक की .

सचिन ने अपना पहला टेस्ट शतक इंग्लैड के खिलाफ 1990 मे ओल्ड ट्रेफर्ड मे लगाया था. उन्होने अपने 9वे टेस्ट मे ही  अपना पहला शतक जड दिया था. उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 17 साल 112 दिन थी

भारत की टीम इंग्लैड के दौरे पर थी. ये टेस्ट उस सीरिज का दुसरा टेस्ट मैच था. सचिन का ये पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बाद तीसरा विदेशी दौरा था. इस दौरे के पहले मैच मे सचिन लार्ड्स के मैदान पर दोनो पारियो मे महज 10 और 27 रन ही बना पाये थे.

Sachin Tendulkar First Test Century

दुसरे टेस्ट मे इंग्लैड ने टास जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया और अपनी पहली पारी मे 519 रन बनाये. जिसमे कप्तान ग्रेम गूच, अथर्टन और स्मिथ के शतक शामिल थे.

जवाब मे भारत ने पहली पारी मे कप्तान अजहर के 179, मांजरेकर के 93 और सचिन के 68 रन की बदौलत 432 रन बनाये.

इंग्लैड ने दुसरी पारी मे 4 विकेट खोकर 320 रन बनाये और पारी घोषित कर दी. जिसमे एलन लैम्ब के शानदार 109 रन शामिल थे.

भारत के सामने आखरी दिन 408 रन बनाने का लक्ष्य था. जब सचिन क्रीज पर आये तो भारत के 4 विकेट महज 109 रन पर गिर गये थे. 127 रन पर जब अजहर आऊट हुये तो लगा के ये मैच बचाना आसान नही होगा. सचिन और कपिल ने सभंलकर खेलना शुरु किया और दोनो के बीच 56 रन की साझेदारी हुई, परंतु इस साझेदारी मे 57वा रन बन पाता उसके पहले ही हेमिंग्स ने कपिल के डंडे बिखेर दिये. भारत का स्कोर 183/6 पर हो गया था. उस वक्त खेल खत्म होने मे ढाई घंटे बाकी थे.

लग रहा था अब भारत ये मैच हार जायेगा. पर एक युवा खिलाडी ने कुछ और ही ठान रखा था. जब वो 10 रन पर थे तब हेमिंग्स ने अपनी ही गेंदबाजी पर उनका कैच छोड दिया था. सचिन ने शानदार शतक लगाया और उस कैच की कीमत इंग्लैड को बता दी थी. सचिन ने प्रभाकर के साथ 160 रन की अविजीत साझेदारी करके मैच बचाया. भारत ने अपनी दुसरी पारी मे 343/6 बनाये. उन्होने नाट आऊट 119 रन बनाये और सबसे कम उम्र मे टेस्ट मे शतक लगाने वाले बल्लेबाजो की सूची मे उनका नाम दुसरे स्थान पर जुड गया था.उनसे कम उम्र मे शतक मुश्ताक मोह्म्मद ने बनाया था. उस टेस्ट मे सचिन ने भारत के महान बल्लेबाज गवास्कर के पैड्स पहनकर बल्लेबाजी करी थी.

इस टेस्ट मे वैसे तो 6 शतक लगे पर सारे शतको मे इस युवा खिलाडी का शतक लाजवाब था. उन्होने 224 मिनिट बल्लेबाजी करी और 17 बार गेंद को सीमारेखा से पार पहुचाया. उनकी इस पारी के लिये उन्हे मैन आफ द मैच के अवार्ड से नवाजा गया.

ये तो सिर्फ शुरुवात थी.बल्लेबाजी के सुरमा की, अगली कडी मे पढिये कैसे सचिन ने आस्ट्रेलिया के गेंदबाजी अटेक को उनके ही घर मे चकनाचूर कर दिया.



Sachin Tendulkar Centuries



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Monday, 26 June 2017

Virat Kohli Anil Kumble | तिरभिन्नाट पोहा


तिरभिन्नाट पोहा-पप्पू भिया का रिजाईन




“ क्या भिया ? बोत दिन से दिख नी रिये हो । पेले रविवार भी तुम्हारा इंतेजार किया हमने नी-नी करके 2 घंटे तक राजू को पोहे नी बनान दिये के यार रुक जा अभी आ रिये होयेंगे पप्पू भिया पर तुम आये नी यार, ऐसा थोडा नी चलता है ” – रितिक ने दूर से आते हुये पप्पू भिया से कहा  । “ अरे यार बारीक क्या बताऊ यार वो एक तो पेले शनिवार को वो मैच के चक्कर मे रे गे और सुबह नींद नी खुली , वो मैच के बाद जो नाचे नी यार के क्या बताऊ , अपन सरवटे पर चिल्ला रिये थे ने आवाज़ एम.वाय तक आ री थी  । “


 
“ वो रविवार तो उसमे निकल गिया ने फिर यार ये अपने किसान भाईयो ने आंदोलन कर दिया “। रितिक-“ हा यार भिया ये तो गजब ही हुआ ने अब मान भी नी रिये है ये लोग “। पप्पू – “ नी यार रितिक अपने किसान भाई की सब बाते तो मान ली है अपने मामा ने “। रितिक- “तुम्हारे मामा, बताया नी भिया तुम्हारे मामा राजनीति मे है और तो ओर भिया अभी सरकार मे भी है “। पप्पू- “ अबे गेलिये मे अपने मुख्यमंत्री की बात कर रिया हू “।रितिक-  “अच्छा ,शिवराज मामा की के रिये हो “ । पप्पू- “ हा यार पर मेरे को लगता है के अपन सब भी तो किसान है , आज किसान भियाओ ने आंदोलन किया ने फिर उनका कर्ज़ माफ हुआ और फिर सब ठीक हो ही जायेगा “।


रितिक-  “  भिया बात तो सही है , पर एक बात बताऊ ये तुम किसान कब से बन गिये , कही वो फेसबूक पर फार्मविले को तुम असली खेती तो नी समझ रिये हो “। पप्पू – “ अबे नी रे , मैं के रिया हू के इस देश मे बाकी लोग भी काम कर रहे है और सबके पास इतना पैसा भी नही है फिर वो तो कभी ऐसा आंदोलन नी करते , मैं किसान भियाओ की तकलीफ समझ रिया हू ,पर अगर ऐसे ही सब करने लगे तो देश कैसे चलेगा “।



“ फिर क्या है के इस आंदोलन मे किसान भियाओ ने कम लफंदरो ने ज्यादा उत्पात मचाया है , दुध सडक पर फेक देना , सब्जिया फेकना ये कैसा आंदोलन है “। रितिक- “ भिया बात तो तुमने गेरी के दी  है  और बात सही भी है भारत मे जब जिसको विरोध करना होता है बस लग जाते है दुकान बंद कराने, इस चक्कर मे साल मैं  30 दिन तो ऐसे ही पोहे नी खाने को मिलते है “। “चलो भिया अपन चलते है पोहे खाते है , बाकी अपने मामा देख लेंगे “। पप्पू-“हा यार चल चले नी तो दुकान मे पोहे खत्म हो जायेंगे “।


 
पप्पू और रितिक जाते है पोहे खाने, वहा टीम इंडिया की फाइनल मे हार और विराट , अनिल कुबंले के बीच विवाद की बाते हो रही थी ।

Virat Kohli and Anil Kumble

दोनो को आते देख कालू ने कहा – “ भिया आओ और बताओ क्या लोगे “। पप्पू- “  अबे पोहे और जलेबी ही मिल रिये है तो वो हीच लेंगे “। कालू- “ यार भिया बहुत टेंशन है यार, वो इंडिया फाइनल हार गी ने उपर से जम्बो ने कोच की पोजिशन से रिजाईन कर दिया “। रितिक –“  अबे किया नही करवाया है रिजाईन “। कालू- “क्या बात कर रिया है , किसने की उसे रिजाईन करने की “। रितिक- “अबे वो हीच दिल्ली का लोंडा है नी कोहली उसने की “। कालू- “ क्या बात कर रिया है यार , मतलब इतना बडा हो गिया वो , पप्पू भिया ने हमे कितना कुछ सिखाया अपन सब को रोज़ के 2-4 रेपट भी लगा देते है पर अपन कहा बुरा मानते है “।



पप्पू- “ देखो यार अब अपना तो काम है तुम सबको आगे बढाना अब इसमे डाटना तो पडता है नी , अब कोहली को क्या है उसकी कोई गलती नी है मेरे को लगे ये सब उस छोरी के चक्कर मे हो रिया है “। कालू- “  पप्पू भिया ये गलत है , उस छोरी की क्या गलती “ पप्पू-“ अबे जम्बो भिया खूब मेहनत कराते थे और फिर कोहली के कने उस छोरी के लिये टाईम नी रेता होगा , बस इसी चक्कर मे हुआ है ये सब “। कालू- “नी भिया उस छोरी को तो क्रिकेट का कुछ पता नी है उसने नी किया होगा ऐसा “।



रितिक –“ तेरे पास  सबूत है “। कालू-  “अरे मेरी घरवाली के री थी  वो देखती है सब न्यूज़ चैनल “। रितिक- “ देखा पप्पू भिया, लुगाई के चक्कर मे आज आपको गलत के रिया है , बस इसी कारन कोहली ने जम्बो के बीच लडाई हुई थी “। कालू-“कुछ भी मत बोले रितिक , मेरी घरवाली गलत नी केती, पप्पू भिया कहा न्यूज़ देखते है इन्हे पता नी होगा “। रितिक-“ भिया आपको गलत के रिया है, मतलब आपको  गलत के रिया है यार, पप्पू भिया जिनने हमे पोहे मे सही साट जीरावन डालना सिखाया और फिर भुल गिया जब वो तू उस लड्की को लाईन मार रिया था , ने फिर तुझे उसके भाई धो रिये थे तो पप्पू भिया ने ही बचाया था तुझे “।

 
कालू- “ अरे ऐसा नी है और जीरावन तो कोई भी डाल ले सही से “।

 
पप्पू ने गुस्से मे कालू को देखा ने दे रेपट, दे रेपट ,दे रेपट और कहा – “ जाओ मैं भी अब कोच पोजिशन से रिजाईन देता हू “।  

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तिरभिन्नाट पोहा-इसके बिना जिंदगी खत्म भिया


 

तिरभिन्नाट पोहा-पप्पू भिया का लैपटाप



Anil Kumble’s short innings as India head coach




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Thursday, 25 May 2017

Tapkeshwar Mandir



देहरादून डायरी- टपकेश्वर मंदिर


10 जून 2016 को जब मुझे ये पता लगा के मेरा सिलेक्शन डी.आई.टी यूनिवर्सिटी मे हुआ । तब मैंने सबसे पहले इस शहर के बारे मे ही सोचा और मेरी सोच मे ये शहर पहाडो पर बसा हुआ था । तेढे-मेढे रास्ते, पहाडो पर चढना और उतरना ,कुछ इसी तरह की कल्पना की थी मैंने और फिर जब गुगल देवता से पूछा तो शहर की एक भिन्न छवि मुझे दिखाई दी । खैर मैं शहर की इस वास्तविक छवि को देखकर उदास नही हुआ ।

 
26 जून 2016 को दोपहर तकरीबन 1 बजे मे देहरादून पहुच गया । जब आप किसी अंजान शहर मे पहली बार आते हो तो सोचते हो काश कोई पहचान का मिल जाये । मेरे साथ ठीक ऐसा ही हुआ मेरे दोस्त( शायद ये कहना ठीक नही होगा , क्योंकी उम्र मे वो मुझसे बडे है ) और मेरे पुराने कालेज़ के कलीग सुनिल आनंद सर मिल गये । वो यहा मुझसे पहले से किसी दुसरी युनिवर्सिटी मे पढा रहे है । सर वैसे ये जानते थे के मैं आने वाला हू और सन्योगवश वो भी यहा आ गये थे ।  उनसे बातचीत करने के बाद मे फिर यूनिवर्सिटी की बस मे बैठ कर चला गया ।  

 

Tapkeshwar Mandir

 

 
खैर अब सीधा उस बात पर आते है जिसके लिये ये पोस्ट लिख रहा हू । देहरादून डायरी मे , आप सब से मैं इस शहर और आसपास की जगहो और यहा की संस्कृति के बारे मे बात करुंगा । वैसे तो शुरुवात मे मैंने जो जगह यहा पर घुमी उसकी बजाये शुरुवात मैं एक ऐसी जगह से करुंगा जो इस शहर के पौराणिक महत्व को बतलाती है । फिर मैं बाबा महाकाल की नगरी से हू तो यहा भी शुरुवात उन्ही से की जाये ।

 

देहरादून मे एक बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है “ टपकेश्वर महादेव “। ये मंदिर अनादिकाल से है । यहा गुफा मे भगवान भोलेनाथ विराज़मान है । यहा पर देवतागण भगवान शिव की आराधना करते और ध्यान लगाते थे ।



बाद मे ऋषि मुनियो ने भी भगवान भोलेनाश का ध्यान यही पर लगाया था । महाभारत काल के महान ऋषि गुरु द्रोणाचार्य ने भी यहा भगवान तपस्या की थी और यही वो मंदिर है जहा गुरु द्रोणाचार्य को तपस्या के धनुर्विद्दा का ज्ञान भगवान शिव से प्राप्त हुआ था । उसी के बाद इस नगर को द्रोण नगरी भी कहते है । गुरू द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वथामा ने इस गुफा मे एक पांव के बल पर खडे होकर तपस्या की थी । छ:  मास बाद जब उनकी तपस्या पूर्णमासी की रात पूरी हुई और शिवलिंग पर दुध की धारा बहने लगे । कहते है कलयुग मे दुध का गलत इस्तेमाल होने लगा इसिलिये वो दुध अब जल मे परिवर्तित हो गया है । आज भी जल की धारा शिवलिंग पर गिरती है ।

 
जो लोग भगवान टपकेश्वर का दर्शन करते है उनके फल के बारे मे इस श्लोक मे लिखा है :-

 
“ तस्य दर्शन मात्रेण मृत्यू ते सर्वपालके “

 
Tapkeshwar Mandir

 

 
टपकेश्वर मंदिर आई.एस.बी.टी ( ISBT Dehradun) से 9-10 किलोमीटर दूर है और जाली ग्रांट एयरपोर्ट से 30 किलोमीटर दूर है । आप आटो या ओला करके यहा आ सकते है । ट्पकेश्वर मंदिर देहारादून के सबसे शांत और प्राकृतिक जगह है । मंदिर आने के लिये आप गढी कैंट भी आ सकते है । ये जगह टपकेश्वर मंदिर के काफी नज़दीक है ।






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Tapkeshwar Mandir Dehradun

Sunday, 21 May 2017

Ransomware Attack


तिरभिन्नाट पोहा-पप्पू भिया का लैपटाप


“ हैलो....... कौन “ अबे बारीक मैं बोल रिया हू । “ अरे वाह यार भिया गजब कर रीये हो , इधर से भी तो मैं ही बोल रिया हू ” । “ अबे ओ पंचर , मैं पप्पू बोल रिया हू रितिक “। “ अरे यार वो क्या है नी कल वो एक फिलम देखी तो उसी का डायलाग चिपका दिया, क्या आपकी आवाज़ नी पेचानेंगे क्या यार “। “  चल अब बत्ती मत दे, एक दम फटाफट से मेरे कने आजा “। “  क्यू यार भिया क्या हो गिया “। “ अरे तू आये नी यार और मैंने वो छोटू, उमेश ने टीनू को भी बोल दिया है वो भी आ रीये है “। “  हओ भिया बस अभी आया,  नी-नी करके पांच मिनिट मे पोच जाउंगा “।

 
टीनू,उमेश,छोटू और रितिक चारो पप्पू भिया के यहा पहुच गये । उन्होने देखा के पप्पू भिया अपने लैपटाप को घूरे जा रे थे । रितिक –“ पप्पू भिया क्या देख रे हो इस लैपटाप मे क्या कोई नयी फोटू आयी क्या ऐश की “। उमेश –“ ऐसा क्या भिया , दिखाना जरा “। उमेश ने लैपटाप देखा  और बाकी सब से कहा –“ पप्पू भिया हम पर शक कर रिये यार “। टीनू – “ कई वीयो तू असो काय वास्ते कई रीयो है “। उमेश – “ पप्पू भिया ने लैपटाप पर ताला लगा रखा है, ताकी हम ऐश भाभी को देख नी सके “। रितिक- “ पर यार तुम मानो नी मानो , भिया का लव जोरदार है , ऐश भाभी एक बच्चे की मॉ बन गी , पर भिया आज भी उसे अभिषेक से ज्यादा चाते है “।

Ransomware Attack

 

 
 पप्पू- “ अबे ओ गेलियो चुप करो , कोई फोटू नी आया है और ये ताला मैने नी लगाया है “। उमेश-“ फिर भिया ये क्या हो गया “। पप्पू – “ पता नी यार , सुबह जैसे ही अपन ने लैपटाप खोला तो ये ताला मिला ,मैंने पूरे घर मे ढूढ लिया पर साला चाबी नी मिली यार , मेरे को लग के अपन दिनभर इसको रांदते है इसिलिये अम्मा ने लगा दिया होगा ताला “ । टीनू- “ भिया अम्मा से पूच लो “। पप्पू – “ अरे पुछा था “। रितिक- “ तो क्या हुआ फिर “।



पप्पू भिया ने एक रख के दिया रितिक को और कहा –“ ये हुआ “। रितिक- “देखो भिया ये जो लिखा है – Ransomeware, इसमे भिया Ran का मिनिंग तो दौडना होता है , some का मिनिंग तो कुछ होता है , अब ये अगला समझ नी आ रिया है “ । उमेश- “भिया एक मिनिट रुको मैं जरा गुगुल चलाता हू, ये को मिनिंग देखता हू “।



टीनू- “ अबे वणे गुगल केते  है रे गेलिया “। उमेश ने सर्च लिया- “ भिया देखो ये जो ware लिखा है , इसका मिनिंग है – सामान “ । टीनू- “ तो इसका मतलब ये हुआ भिया के दौडतेकुछसामान “। उमेश- “ भिया मेरे को लगे वो दुसरे धरती के जीव है नी वो फिलम मे थे जो – जादू, वो तुमसे कुछ केना चा रिये है “।

 
 पप्पू भिया ने उमेश से मोबाइल लिया ने खुद सर्च किया वो भी पूरा लेटर एक साथ – “  अरे वो तुम लोग बस दिन मे दो बार पोहे खाओगे तो ये ही होगा, गेलियो ये तो कीडा लग गया वो अंग्रेजी मे जिसको वाईरस केते है नी वो और ये फिरोती वाईरस है “ रितिक- “ भिया इसको नी अपने राकेश भिया की दुकान पर ले चलो वो करते ये सब काम “।

 
राकेश भिया की दुकान पर ,पप्पू – “ भिया यार देखना ये कोई वाईरस ने ताला मार दिया है यार लैपटाप पर ने फिर चाबी भी नी दे रिया है “। उमेश- “ हा भिया दिमाग खराब हो रिया है यार “। राकेश ने देखते ही कहा –“ भिया एक मिनिट “, फिर उसने तबांकू थूका और कहा –“  भिया ये वायरस आया है नी इसने तुम्हारी सारी फाईल लाक कर दी है और अब तुम्हे अगर चाहीये तो 300 बिट्काईन मांग रिया है “ रितिक जोर से हसा और कहा –“ क्या गेलिया वाईरस है , इतनी मगज़मारी तीनसो सिक्के के लिये “ उमेश- “  भिया ऐसा लगे इसके घर मे शादी है और खुल्ले पैसे देने मे बैंक वाले ऐबलेपनती कर रिये होंगे तो इसने तुमसे मांग लिये “। राकेश- “  अरे वो लफ्नदरो , पगला गये हो क्या ,पप्पू भिया तुम भी कहा इनके साथ घुमते हो “। पप्पू ने घूर के सबको देखा ।

 
राकेश- “ भिया यार ये जो है नी बहुत बडा वाइरस है और 1 बिटकाईन मतलब अपने यहा के – 133621 रुपेये है और अब अगर तम्हे अपना डेटा चिये तो 300 बिटकाईन देने पडेंगे “  पप्पू भिया को पसीने आने लगे । रितिक – “ भिया, अभी हा के दो फिर ये पैसे लेने आयेंगा तो इसे घेर लेंगे और चाबी ले लेंगे “। राकेश- “ अबे ऐ फर्जी ये पैसा आनलाईन देना पडेंगा और पप्पू भिया तुम बताओ कल रात को क्या चला रिये थे इसमे “। पप्पू – “ अरे राकेश भिया वो तुम्हारी ऐश भाभी का मेल आया था ने उसमे लिखा था “ आई लव यू “ और साथ मे एक लेटर  भी था, अब अपन ने वो डाउनलोड किया ने फिर अचानक से अम्मा आ गई तो बस फटाफ़ट से लैपटाप बंद कर दिया ने सुबह देखा तो ये लफडा हुआ “।



राकेश जोर से हसा और कहा भिया तुम्हारा डेटा मैं ला दूंगा इसे बाहर भेजना होयेगा और 5 हजार खर्चा आयेगा “। पप्पू – “ कम मे नी होगा, देख लो “। राकेश –“  200 रुपये मे भी कर दुंगा फिर डाटा नी मिलेगा “। पप्पू ने भरे मन से कहा – “  चलो कर दो यार भिया , अब ऐश की फोटू मेरे दिल मे भी है उसीसे काम चला लूंगा “। रितिक –“  अरे उदास मत हो  भिया चलो मैं ला दुंगा ना तुमको भाभी की फोटू “ । पप्पू- “ अबे तेरे पास क्यो है ऐश की फोटू , भाभी पे लाईन मारता है “ रितिक- “अरे यार भिया क्या बात करा दी ,वो सारी फोटू तुम्हारे साथ है जो हमने बनवाई थी, चलो अब पोहे जलेबी खिलाओ” । सब लोग चले गये फिर पोहे खाने राजबाडे पर ।

 
तो भिया ये थे हमारे पप्पू भिया, कमेंट करना और बताना कैसा लगा इस बार का “तिरभिन्नाट पोहा” और हा फेसबूक ने और जगह लाईक और कमेंट देते रेना , चलो मिलते है फिर भिया ।

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तिरभिन्नाट पोहा-इसके बिना जिंदगी खत्म भिया


 

तिरभिन्नाट पोहा-पप्पू भिया का रिजाईन


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Friday, 12 May 2017

Poha Recipe | तिरभिन्नाट पोहा


तिरभिन्नाट पोहा-इसके बिना जिंदगी खत्म भिया


भियाओ…. कैसे हो सब लोग । क्या चल रिया है । तो मतलब ऐसे करोगे मतलब ... मैं देहरादून क्या आ गिया । तुम सब अपने को भूल ही गिये ।


बहुत दिन से सोच रिया था मैं के तुम सबसे बात करू वो क्या है नी के इधर एक तो लैंगवेज़ की दिक्कत है । अरे यार पार्टी तुम भी नी यार , लैंग्वेज़ नी समझे । अरे लैंगवेज़ याने भाषा अब ऐसा नी है के इधर हिंदी, अंग्रेजी नी बोलते पर अपना क्या है नी के अपन तो तरर्तराट है  हिंदी ने अंग्रेजी मे पर क्या है नी साला इधर कोई “ इंदौरी “ या “ मालवी “  नी बोलता यार ।




अब अपन तो क्या भिया उज्जैन के रेने वाले है । अब अपने को तो क्या है के कोई इंदौरी मे बात करे तो लगता है इज्ज्त दे रिया है  या फिर “ ओर कई मारसाब ,कई चाल रियो है “ । ऐसा के दे तो लगे के सम्मान दे रिया है । तो आज फिर सोचा अपन ने सोचा के तुम सब इंदौरी , उज्जैनी और अपने मालवा वालो से बात की जाये ने फेर कई अपणो मन भी तभीज़ लागे जब कोई अपणी लैंगवेज़ मे बात करे । अच्छा अब थोडा बता दू तुम सब छोकरा ओन के , के इसका नाम “तिरभिन्नाट पोहा” क्यो रखा । तो सुनो रे सब , अरे वो गुड्डू को बुला ले रे , दिनभर टेशन की सवारी ढूढ्ता रेता है । तो भिया ऐसा हुआ के अपन हर दिन की तरह दिन उगेज , पोहे की पलेट लईने बैठी गिया ने बडे आराम से अपन खा रिये थे । अचानक अपने को लगा के यार भिया जीरावन कम है तो जैसे ही अपन ने जीरावन डाला और पोहे खाये ये आईडिया भिन्नाते हुये अपने दिमाग मे आ गिया तो फिर अपन ने ज्यादा सोचा नी और रख दिया नाम “तिरभिन्नाट पोहा” ।

 

Poha Recipe

 
तो भिया इस “तिरभिन्नाट पोहा” मे अपन कोशिश करेंगे के हर हफ्ते बात करते रहे ने फिर कभी किसी हफ्ते अपन नी आ पाये तो तुम भेज देना एक “तिरभिन्नाट पोहा” अपन उसे चिपका देंगे अपने ब्लाग पे ।

 
तो भिया अपन जो है 27 जून 2016 को देहरादून आये ने फिर क्या है 26 जून 2016 को अपन उज्जैन से चले तो अपन ने साम के नी-नी करते सात बजे नागदा मे पोहे खाये थे । अब जब 27 जून को 1 बजे अपन यहा आये तो अपने को दो चीज़ की तलब लगी एक तो चाय ने दुसरा पोहा । अपन ने सोचा के चलो अभी तो  यूनिवर्सिटी चलते है फिर देखेंगे वहा जा के ने करेंगे कोई जुगाड । तो भिया अगले दिन यूनिवर्सिटी मे जाईन हो गये ने फिर एक हफ्ते मे अपन ने घर ले लिया किराये पे । अब क्या है के सात दिन हो गये ने पोहे नी खाये तो रविवार के दिन तो ऐसी तलब लगी पोहे की के क्या बताऊ मतलब आप मानोगे नी , सिर घुमने लगा ने चक्कर आये ,बिस्तर से उठा नी जाये ।


फिर भी अपन चले बज़ार अब अपने को डाऊट तो था के यहा कहा पोहा मिलेगा पर अपन जो है नी है तो बाबा महाकाल के भक्त । एक लोटा भांग पीने के बाद अपना कानफ़िडेंस तो टपकता लगने लगता है और फिर भांग नी पियो ने जैसे ही “ जय श्री महांकाल “ बोले अपने कानफिडेंस की तो नदीया बहती है तो अपन जो है “ जय श्री महांकाल बोलके ” ने निकल लिये बज़ार मे । अपन सबसे पेले तो एक ठैले वाले के पास गिये उससे की मैंने “भिया एक कट देना “ तो पता है उसने क्या किया ? वो बोले “ भाईजी चाय पीनी है “ । मेरा मन तो हुआ के उसे सुनाऊ फिर सोचा चाय पीले फिर चमकायेंगे ।


अब चाय आयी ने अपने ने उससे कहा के “ भिया एक प्लेट पोहा भी दे देना “ उसने मुझे ऐसे देखा, जैसे अपन ने जने क्या मांग लिया हो । उसने कहा –“ यहा पोहा नही मिलता , हम पोहा नही बनाते “ मैंने कहा  “ ठीक है यार , तुम नही बनाते , पर ये हम मतलब और कौन है जो नही बनाता अभी बता दो फालतू चक्कर नी काटने पडेंगे  “ उसने कहा – “ भाईजी हम तो नही बनाते , बाकी का पता नही , आप वो आगे वाले ठेले पर चले जाईये और “मोमो” का नाश्ता कर लिजीये “। मैंने सोचा ये कौंन-सी नयी डिश आ गई है ।


 
खैर मैं वो जगह छोड कर आगे गया और आप मालिक विस्वास नी करोगे नी-नी करके पूरा देहरादून घूम लिया पर कही भी पोहा नी मिला ।  थक गया,  फिर देखा के एक दुकान पर समोसे बन रहे थे । मैंने सोचा कोई नही पोहा ना सही समोसा ही सही । उसने समोसा दिया , अब वो दिखने मे तो ठीक दिख रिया था । अरे पर जैसे ही मैंने पहला कोर खाया लगा के समोसा है या बडी मठरी । समोसे मे पूरे मे अजवाईन का स्वाद आ रिया था और जैसे ही मैंने मसाला खाया ,मेरे को लग गिया के भिया यहा खाने को नी मिले ।



ऊ हू ,कच,कच ऐहे ऐहे बिल्कूल नी मिले । अब कई थकी हारी के मणे वणती की के लाला थोडी चटनी दई दे  । मतलब मानोगे नी आप भिया चटनी थी के परफ्यूम की बोतल ,अलग ही खूशबू आ रही थी । ने बस खूशबू ही आ रही थी । आखिर मे मेरी नज़र जलेबी पे टीकी मैंन सोचा की ये तो पूरे भारत मे मिलती है ये तो बढिया होगी । भिया जैसे ही पेला  टुकडा मुह मे रखा , बस मेरे तो आखो मे आसू आ गये , बस फिर मे चुपचाप दुकान से कच्चे पोहे ले के ने रुम पे गया ।  जाके ने बनाये फिर पोहे ने सेव डाल डाल के खाये ने हर स्वाद मे इंदौर उज्जैन के पोहे जलेबी वाले बहुत याद आये ।

 
तो भिया था एक किस्सा “तिरभिन्नाट पोहा” का आगे और भी बकर करेंगे ने मिलते रहेंगे । अच्छा अब अपने कमेंट्स जरुर देना क्योंकी भिया यहा देहरादून मे तुम ही और कौन है अपना ।  चलो भिया फिर मिलेंगे किसी नये विषय पर बात करेंगे ।

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तिरभिन्नाट पोहा-पप्पू भिया का लैपटाप


 

तिरभिन्नाट पोहा-पप्पू भिया का रिजाईन



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Monday, 8 May 2017

Whatsapp Status | आपका Whats App स्टेट्स क्या है ?


आपका Whats App स्टेट्स क्या है ?



जिंदगी मे आपके नाम से आपकी पहचान हो जरुरी नही है । परंतु सोशल मिडिया पर आपके पहचान आपके स्टेट्स हो ये अक्सर होता है । फेसबूक हो या व्हाट्सएप वहा आपने क्या पोस्ट की है या क्या स्टेट्स लिखा है , हर कोई इनसे ही आपके बारे मे विचार बनाता है क्योंकी ये एक काल्पनिक दुनिया है । यहा पर आप सिर्फ अपनी प्रोफाइल से लोगो मे जाने जाते है और प्रोफाइल मे स्टेट्स बहुत अहम जगह रखता है ।


 
सबसे ज्यादा दिक्क्त आती है व्हाट्सएप पर जहा आपका स्टेट्स आपके हर दिन की सोच बताता है । त्योहारो पर तो हम बधाई संदेश लिख देते है परंतु बाकी दिन क्या करे ? कई लोगो ने तो जब से व्हाट्सएप का उपयोग शुरु किया है तब से आज तक एक ही स्टेट्स है “ Hey , there I am using Whats APP”  यही स्टेट्स डाल रखा है । कल ही मैं अपने दोस्त से इस बारे मे बात कर रहा था के आखिर रोज़-रोज़ नये स्टेट्स कहा से लाये और फिर मेरे दोस्त ने इसका जवाब दिया और जब मैंने वो वेबसाईट देखी तो लगा अब कभी-भी कोई भी व्हाट्सएप स्टेट्स चाहिये तो यही से लिया जायेगा । चलिये आज मैं आपको उस वेबसाईट के बारे मे बताऊंगा । साथ ही कैसे और कौन – कौन से स्टेट्स आप उपयोग कर सकते है वो भी हम देखेंगे । 

 

 
वेबसाईट का नाम है “ whatsstatus.com” इस वेबसाईट पर 60 से ज्यादा कैटेगरी मे स्टेट्स मिलेंगे यानी अब आप जैसा चाहे वैसा स्टेट्स यहा से ले सकते है । इन 60 कैटेग़री मे 1600 से ज्यादा स्टेट्स आप को मिल जायेंगे । हर रोज नये-नये और एकदम अलग स्टेट्स ईस वेबसाईट पर डाले जाते है ।

 

कुछ स्टेट्स मैंने आपके लिये साईट से निकाले है देखिये : -


 
Whatsapp Status

Good Day Status
Whatsapp Status

Birthday Status
Whatsapp Status

Food Status

 
इन स्टेट्स के अलावा और भी कई कैटेगरी है जैसे: -

 

 

 

 

 
इस साईट पर आप सिर्फ स्टेट्स पढ कर ही उपयोग नही कर सकते है । आप इस साईट से पैसे भी कमा सकते है । इसके लिये आपको साईट पर अपना अकाऊंट बनाना होगा  ।

 
सबसे पहले “ whatsstatus.com” पर जाकर “ submit status”  पर क्लिक करीये

 
Whatsapp Status

Submit Status
इसके बाद अकाउंट बनाइये और लाग-इन करीये ।

 
Whatsapp Status

Create Account
Whatsapp Status

Log-In
लाग-इन करने के बाद अपना स्टेट्स डाल सकते है और इंतेजार करीये अपने स्टेट्स के अप्रूव होने का और जैसे ही आपका स्टेट्स अप्रूव हो गया आपको हर पहले 200 अप्रूव स्टेट्स तक हर स्टेट्स का 1 रुपया मिलेगा और उसके बाद हर अप्रूव स्टेट्स के लिये आपको 2 रुपये मिलेंगे .

 
Whatsapp Status


 
इस साईट पर तकरीबन 1000 लोग है जो स्टेट्स लिख रहे है और अब तक 17000 रुपये उन लोगो को स्टेट्स लिखने के लिये दिये जा चुके है ।

 
इस साईट पर जाईये और नये-नये स्टेट्स को उपयोग किजीये और अगर आपके दिमाग मे कोई स्टेट्स आता है तो उसे वेबसाईट पर लिखिये और कमाईये ।

 

 
इस वेबसाईट को विजिट करने के लिये यहा क्लिक करीये : - “ Whatsapp” .                      Whatsapp Status | Whatsapp Status Video | Whatsapp Status In Hindi | Whatsapp Status Download | Whatsapp Status Attitude | Whatsapp Status Song | Whatsapp Status Sad


Sunday, 30 April 2017

Hindi Medium | WOW-Mind Your Language


WOW-Mind Your Language-क्योंकी हिंदी मॉ ने सिखायी है



भाषा इस दुनिया के निर्माण  का एक अहम हिस्सा है । जैसे हवा और पानी जीने के लिये जरुरी है । ठीक उसी तरह भाषा के बगैर इस दुनिया की कल्पना भी नही की जा सकती है । इस दुनिया मे कई तरह की भाषाये है और हर उस भाषा का उपयोग का जो लोग करते है ,उनके लिये वो भाषा उनकी मॉ,पिता और गुरु से कम दर्जा नही रखती है ।

 
जैसा अब तक के मेरे लेखन से लग गया होगा । मैं जिस भाषा की बात कर रहा हू । वो है “ हिंदी “। हिंदी मेरे लिये भाषा ही नही मेरी मॉ जैसी है । इसके अनेक कारण है और उन्ही कारणो का जिक्र आज मैं करुंगा ।

 
हिंदी मुझे मेरी मॉ ने सिखायी है । जब छोटा था तो मैंने “ मॉ “  कहना सिखा जो हिंदी का शब्द है । हिंदी मैं मैंने अपने जीवन की पहली डाट भी खायी और चाहे पेपर अंग्रेजी हो या गणित का हर पेपर के पहले मैंने भगवान का नाम भी हिंदी मे लिया था । हिंदी मे जब-जब मैंने कुछ किसी से सुना या किसी को सुनाया मुझे समझ भी आया और मेरी बात को समझा भी गया । हिंदी मे ही मैंने अपना पहला गाना सुना और हिंदी के गाने को ही मैंने अपने क्रश को देखकर गुनगुनाया । “ रिश्ते मैं तो हम तुम्हारे बाप लगते है “ , ये लाईन जब दोस्तो के सामने कही तो वो भी हिंदी मे ही थी ।

Hindi Medium

 

 
मेरे जीवन मे हिंदी का मह्त्व काफी रहा है , खुशी और गम दोनो मे ही हिंदी ही थी जिसने मेरा हमेशा साथ दिया है । हिंदी के अलावा मैं अपनी बात अंग्रेजी मे ही कहता हू और अंग्रेजी का अखबार पढता भी हू । परंतु चाय की चुस्की के साथ जब हिंदी के अखबार को पढ्ता हू तो लगता है जन्न्त ओर कही नही यही है । हमारी फिल्मे और हमारे देश का संगीत कई भाषाओ मे है । परंतु सबसे ज्यादा देखी जाने वाली फिल्मे और सबसे ज्यादा सुना जाने वाला संगीत हिंदी भाषा मे ही है ।

 
जब मैंने लिखना शुरु किया तो हिंदी मे किया फिर बीच-बीच मे अंग्रेजी मे लिखा परंतु जब-जब मुझे कोई बात दिल से कहने का मन हुआ । वो बात हमेशा हिंदी मे ही लिखी , फिर चाहे वो पहली कविता हो या पहली शायरी या फिर उसके लिये लिखी वो चार लाईने क्यो ना हो जब-जब मदद की जरुरत पडी । मैने हिंदी को अपने पिछे खडा पाया । मुझे आज भी याद है के हिंदी के विषय मे मुझे कभी ज्यादा मेहनत नही करनी पडी क्योंकी हिंदी मे लिखा हुआ याद करना नही पडता था । बस पढते जाओ और लाईन दर लाईन हर शब्द दिमाग मे उतरता जाता है । हिंदी की सबसे अच्छी बात मुझे ये लगी के हिंदी ने हर भाषा को जगह दी हो फिर वो चाहे उर्दू हो या अंग्रेजी ।
हिंदी मुझे बहुत प्यारी है और सच कहू तो मैं हिंदी मे बोलने और लिखने मे गर्व महसूस करता हू ।  

 
This post is a part of Write Over the Weekend, an initiative for Indian Bloggers by BlogAdda.

 

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Sunday, 23 April 2017

Indian Jugaad | हम भारतीय जुगाडू है


हम भारतीय जुगाडू है


भारत एक ऐसा देश है, जहा कई प्रकार के रिती-रिवाज़, नियम-कानून है और तरह तरह के लोग रहते है । हर शहर, हर गाव मे यहा एक ही काम करने के तरीके अलग- अलग है । अगर साफ और सीधे शब्दो मे कहे तो हम भारतीय जुगाडू है । हमारे पास हर काम को करने के एक से एक नायाब तरीके है । चलिये तो फिर आज उन्ही तरीको मे से कुछ पर नज़र डालते है ।

 

 
Indian Jugaad

 

  1. पायजामे मे नाडा डालना - हमारे भारत मे पायजामा और उसके नाडे का एक गहरा सबंध है ।नाडे के बिना पायजामे की और पायजामे के बिना नाडे की कल्पना ही नही की जा सकती है । जब भी पायजामे का नाडा निकल जाता है । उसे डालने के लिये शायद किसी ओर देश मे बडी दिक्क्त आये परंतु हमारे भारत मे ये काम आसान है । उसके लिये चाहिये बस एक टूथब्रश, उसके एक सिरे पर नाडे को बांध के पायजामे मे डाल देते है और पायजामे मे बडे ही आसानी से नाडा डाल दिया जाता है । इसमे आप दो तरह के जुगाड देख सकते है एक तो नाडे को पायजामे मे डालना, दूसरा टूथब्रश जब पुराना हो जाये तो उसका उपयोग भी हो जाता है । टूथब्रश का उपयोग यहा खत्म नही होता इसके अलावा कई लोग इससे अपने वाशबेसिन को तो कुछ अपने तोते के पिंजरे को भी साफ करते है ।


 

  1. लाईन मे लगे बिना टिकीट लेना – दुनिया शायद एक दिन खत्म हो लेकिन हमारे यहा बस और ट्रेन की टिकीट की लाईन कभी खत्म नही होगी । हम कई बार ट्रेन या बस मे सफर कर चुके है फिर भी कई बार जाने मे और कभी अनजाने मे हम लेट हो जाते है । फिर हम जब देखते है टिकीट खिडकी पर लम्बी लाईन देखते है , तो हमारे अंदर बीरबल से भी तेज़ दौडता है और हम उस इंसान को ढूंढते है जिसे हम अपना काम्चलाऊ ताऊ,चाचा,अंकल या भाई बना सके । उसके पास जाके हम धीरे से अपनी दुविधा बता देते है और उस तरह से आग्रह करते है जैसा हमने आज तक हमने किसी से नही किया ।


 



    1. बस मे सीट ढूंढ्ना – अब ट्रेन मे टिकीट मिलने के बाद भी कहा हमारा जुगाड खत्म होता है । इसके बाद चाहे ट्रेन मे खडे होने की जगह ना हो फिर भी हम आसपास के तीन डब्बे मे ऐसे चक्कर लगाते है जैसे अचानक से खाली सीट हमारे सामने प्रकट हो जायेगी । अब अगर सीट ना मिलती है तो हम फिर वही कामचलाऊ ताऊ को ढूंढते है और उनसे जगह की रिकवेस्ट कुछ ऐसे करते है – “ इस सीट पर पांच बैठते है “, “ भईया अगले स्टेशन पर उतर जाऊंगा “ , “ कहा तक जाओगे ताऊ “ , या फिर अपना कंधा उससे अडा देते है के भाई तेरे उठते ही मैं बैठूंगा । हमारे देश का रेल नेटवर्क काफी बडा है और इतनी जनसंख्या इसी जुगाड के चलते रेल मे सफर कर रही है ।




 



    1. स्वाद अपने तरह का – हमारे देश मे तरह-तरह के व्यंजन बनते है । हर जगह का अपना स्वाद और मसाले है । हमारे देश मे कई साल तक अंग्रेजो का राज़ रहा और कई देशो के लोग हमारे यहा आते रहे । वो सभी अपने देश का स्वाद और व्यंजन अपने साथ लाये । हमने व्यंजन को तो जैसे के तैसा अपनाया परंतु उसके स्वाद मे ऐसा जुगाड लगाया के अब वो व्यंजन हमारे देश के नाम से फेमस हो गये है । इन्ही व्यंजनो मे से एक है नूडल्स,मंचूरियन, मोमो,फ्राईड राईस, सेंड्विच और मेगी । आज ये सब व्यंजन हमारे देश के नाम से फेमस है ।




 

  1. पेन मे रिफील फिट करना – ये काम तो हर भारतीय करता है , चाहे रिफील पेन के हिसाब से मिले ना मिले । हम उसे काट के अपने पेन मे एड्जस्ट कर ही देते है । कभी – कभी अगर इसके बाद भी रिफील सेट ना हो तो हम एक ओर जुगाड करते है, हम छोटे से कागज़ को फाड कर उसे रोल करके रिफील के आखिर मे एड कर देते है इससे अगर रिफील ज्यादा छोटी हो या ज्यादा कट गई हो तो भी एड्जस्ट हो जाती है ।


 

  1. अलमारी,फ्रिज या टेबल का बैलेंस बैठाना – उपर करे जुगाड का बडा रूप है किसी अलमारी,टेबल का बैलेंस बैठाना । अबकी बार कागज़ बडा और गत्ते का टुकडा होता है और इसे रोल ना करते हुये हम मोड कर टेबल के पैर के नीचे फसा कर काम चला लेते है । ये हमारे देश का सबसे बडे जुगाड मे से एक है जो हर कोई करता है । इसके साथ ही अगर हमारे दरवाजे का स्टापर खराब हो जाये तो हम एक पत्थर लगा देते है जो स्टापर की तरह काम करता है ।


 
7 . साबून का पूरा उपयोग – इस बारे मे शायद ज्यादा बताना ना पडे । गरीब हो या अमीर हर भारतीय ये काम करता है । जब साबून खत्म होने वाला होता है तो उसे या तो वाश बेसिन मे हाथ धोने मे लगा देते है या फिर उसे आखिर तक उपयोग करते है । इसी तरह का काम हम टूथपेस्ट , क्रिम, घी या दूध का पैकेट के साथ करते है । इनको हम काट के कुछ दिन लगाते है और पहले नीचे से फिर ढक्कन के तरफ से काट देते है । इसी कडी मे हम शैम्पू की बोतल मे आखिर मे पानी डाल के उपयोग करते है ।





    1. फटे बनियान का पोछा बनाना – ये शायद हर घर मे ना हो पर अधिकतर घरो मे फटे बनियान, पुराने कपडे या पूराने मोजे का उपयोग सफाई के काम मे ले लेते है । ये जुगाड काफी वक्त से चला आ रहा है ।




 

  1. पेन से कैसेट सही करना – ये नब्बे के जमाने के लोगो ने खूब किया हुआ है । जब भी कैसेट उलझ जाती थी तब हम एक पेन से उस पूरी कैसेट को सही करा देते है । अगर ये कैसेट किसी दुसरे देश मे खराब होती तो शायद फेक दी जाती परंतु हम उसे पेन से सही कर देते है । इस जुगाड से हमने कैसेट ना सही कई बार हम लाईट के साकेट मे वायर भी सेट कर देते है ।


 

  1. पार्किंग मे जगह ढूंढना – इसे हम जुगाड की जगह अगर अविष्कार कहे तो गलत नही होगा । हम बाज़ार जाये और गाडी पार्क करने के लिये जगह ना मिले ऐसा नही होता है । हम जो गाडी साईड स्टैंड पर लगी होती है उसे मैन पर लगा कर जगह कर लेते है । इसके अलावा कभी बीच मे थोडी सी जगह मे भी फसा देते है । अगर इसके बाद भी जगह ना मिले तो गाडी ऐसे खडी कर देते है के जो गाडीया सही से लगी है वो भी ना निकल पाये । आखिर मे हम कुछ ना मिले तो गाडी को आधी सडक पर खडी करके निकल जाते है ।


 
जुगाड हमे सिखाया नही जाता , ये हमारे खून मे है । हम अपने तरीको का उपयोग करके हमेशा समस्या का हल निकाल ही लेते है । ये सब इसिलिये है क्योंकी हमारे संस्कार मे है के हमे हमेशा बुद्धि का उपयोग करना चाहिये ।

 
This post is written for a contest at IndiBlogger.

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Ajinkya Rahane

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Saturday, 22 April 2017

Half Girlfriend Movie | दोस्त से ज्यादा, पर गर्लफ्रेंड,बायफ्रेंड से कम


दोस्त से ज्यादा, पर गर्लफ्रेंड,बायफ्रेंड से कम



कहाँनीया कब और कहा बन जाये हम कह नही सकते, पर एक ऐसी जगह है जहा हर रोज़ , हर पल एक कहाँनी जन्म लेती है । ये जगह शायद इसिलिये ही बनी है और फिर जो भी यहा आता है , वो खुद कई कहाँनीयो के जाल अपने दिमाग मे बुनते रहता है । ये जगह है “कालेज़” , कालेज़ दुनिया की एकलौती ऐसी जहा कई कहाँनीया, अलग अलग किरदारो के द्वारा रची गई है । एक ऐसी ही कहाँनी आज आप सबको बताने जा रहा हू  । इस कहाँनी के सारे किरदारो के नाम बदले हुये है पर ये कहाँनी एक सच्ची है और मेरे दिल के करीब है ।


 
आयुष ने 12वी मे अपनी आई.आई.टी की जमकर की और वो आई.आई.टी मे जाने का सपना 11वी कक्षा से देख रहा था । आयुष की कोशिश और उसकी मंजिल के बीच मे वैसे तो फासले कम थे, परंतु जो हुआ वो उसने भी नही सोचा था । आयुष का सपना टूट गया और आई.आई.टी के दुसरे पडाव मे वो फेल हो गया , खैर आयुष ने अपने शहर के ही एक प्राइवेट इंजीनियरिंग कालेज़ मे दाखिला ले लिया । कालेज़ के पहले दिन से लेकर तो अगले कुछ हफ्तो तक वो हर पल आई.आई.टी मैंस के पेपर के बारे मे ही सोचता था । जब एक महीना बिता तो आयुष का दिल नये कालेज़ मे लगने लगा , नये दोस्त और नयी जगह कई बार पुरानी यादो को भुलाने मे मदद करती है ।

 
पहले साल मे आयुष का रिजल्ट भी ठीक नही रहा और साथ ही आयुष को ये अहसास भी हो गया था के उसने अपनी कैपिबिलिटी से कम मेहनत की है । आयुष को कंप्यूटर का काफी शौक था और इंटरनेट पर उसकी मुलाकात हुई एक लड्की से हुई ,बातो –बातो मे पता लगा के वो लडकी उसी के कालेज़ मे , उसी के कोर्स मे दुसरे सेक्शन मे पढती है । आयुष ने उससे वादा किया के अब जब भी कालेज़ शुरु होंगे वो उससे मिलेगा । ना जाने क्यो आयुष के हाव भाव बदलने लगे , वो आयुष जिसने अपना आत्मविश्वास खो दिया था । वो एक अलग ही रंग और रुप मे कालेज़ गया और जाते ही उसने उसे ढुढना शुरु किया । उसने अपने खास दोस्त विशाल को लिया और कहा के चल भाई – “ जरा आते है “। विशाल ने पूछा – “ कहा जाना है “। आयुष ने उसी सारी बात बताई ,विशाल – “ अच्छा तो तू शिवानी के बारे मे बात कर रहा है और उसे ढूंढ रहा है “ आयुष –“ हा भाई तू जानता है उसे “ विशाल – “ जानता तो नही बस एक बार गरिमा ने मिलवाया था “।

 
आयुष अपने दोस्त विशाल के साथ गया और जब पहली बार उसने शिवानी को देखा तो बस देखता रहा गया । सिम्पल और सोबर , एक दम वैसी लडकी जैसी आयुष सपनो मे देखा करता था । उसे कुछ देर लगा जैसे ख्वाब देख रहा हो । शिवानी ने आयुष को देखा तो नही था । पर वो उसने उसे पहले ही ढूंढ रखा था । शिवानी –“ हलो आयुष ,कैसे हो “ आयुष – “मैं बढिया हूँ तुम कैसी हो “ शिवानी – “ आई.एम फाईन”. उसके बाद शिवानी आयुष को अपने समर वेकेशन के बारे मे बताती रही और वो सुनता रहा । आखिर मे आयुष ने कहा – “ शिवानी मे तुमसे कैन्टीन मे मिलता हू “शिवानी – “ओके माय फ्रेंड” ।

 

आयुष और शिवानी कुछ ही दिनो मे अच्छे दोस्त हो गये , दोनो अपनी हर बात एक दुसरे को बताते थे । आयुष ने शिवानी से कभी कहा नही पर आयुष मन ही मन शिवानी से प्यार करने लगा था । उसके प्यार करने का कारण सिर्फ शिवानी का स्वभाव नही था । शिवानी के कारण ही आयुष को अपना खोया आत्मविश्वास पा लिया था । आयुष ने सोचा के वो शिवानी से अपने दिल की बात कह दे पर उसने सोचा अगर शिवानी रुठ गई तो ।


 

Half Girlfriend Movie

 
शिवानी ने भी आयुष से कभी कहा नही परंतु उसकी बातो से यही लगता रहा के वो भी शायद आयुष को चाहती थी । उस साल एक सबजेक्ट काफी कठिन था और पूरी क्लास मे सबको डर था के कही इस सबजेक्ट मे फेल ना हो जाये । ये डर शिवानी को भी था । शिवानी और आयुष साथ-साथ कभी पढाई नही करते थे क्योंकी आयुष अकेले पढना पसंद करता था । इसिलिये शिवानी ने इस सबजेक्ट से डर की बात आयुष को नही बताई । आयुष को जब बात पता लगी उसने शिवानी से कहा –“ तुम मुझे अपना दोस्त नही मानती “ शिवानी – “ नही आयुष ऐसी बात नही है “ आयुष- “तो तुमने मुझे नही बताया के तुम्हे इस सबजेक्ट मे दिक्क्त है , मैं तुम्हे पढा देता “ शिवानी – “आयुष तुम्हे ये सबजेक्ट आता है “ आयुष –“ हा आता है ,कल से मैं तुम्हे ये सबजेक्ट पढाऊंगा “

 
आयुष खुद उस सबजेक्ट मे कमफर्टेबल नही था परंतु उसे शिवानी को पढाना था तो बस लग गया वो पढने उसने एक रात मे 2 चैप्टर पढ डाले और फिर अगले दिन शिवानी को पढाया । धीरे-धीरे आयुष का पढाई मे इंटरेस्ट वापस आने लगा और जब उस साल का रिज्ल्ट आया तो आयुष ने क्लास मे तीसरी पोजिशन पाई । आयुष ने पूरी एक्जाम के दौरान शिवानी को पढाया और दोनो काफी वक्त साथ रहने लगे । सबको लगने लगा के ये दोनो एकदुसरे को चाहते है । अगले साल भी आयुष शिवानी को पढाता रहा और एक दिन उसने अपने दोस्त विशाल से कहा – “ आज मैं शिवानी को अपने दिल की बात बताने जा रहा हू “  विशाल –“  भाई मेरी बात माने तो रुक जा , मुझे लगता है ये थोडा जल्दी होगा “  आयुष और विशाल काफी अच्छे दोस्त थे, इसीलिये आयुष ने उसकी बात मान ली । एकदिन शाम को आयुष अपने दोस्त करण से मिलने गया । आयुष और करण स्कूल से साथ थे और करण आयुष के ही कालेज़ मे दुसरे कोर्स मे पढता था । करण को ये नही पता था के आयुष शिवानी को चाहता है ।


करण ने बातो – बातो मे कहा – “ यार वो शिवानी ,तो राज के साथ घुम रही है “ आयुष –“ कौन वो राज जो दुसरे शहर से हमारे कालेज़ मे पढने आता है “ करण –“ हा भाई वही वो मेरे कोर्स मे ही तो है “ आयुष –“ तो तू ये कहना चाहता है के वो दोनो एक दुसरे से .... “ करण – “ हा वो तो एक दुसरे को पहले साल से जानते है और तब से दोनो के बीच कुछ चल रहा था “  आयुष  के तो मानो पैरो के नीचे से ज़मीन खिसक गई उसे कुछ समझ नही आ रहा था । उसे दुख इस बात का नही था के शिवानी और राज़ एक दुसरे से प्यार करते है । उसे इस बात का गम था के जिसे वो अपनी अच्छी दोस्त मानता रहा उसने उससे ये बात छुपाई और सीधे –सीधे ना सही घुमा फिराकर शिवानी ने भी ये आयुष को दोस्त से बढकर माना था ।

 
आयुष कुछ दिनो तक कालेज़ नही गया । शिवानी ने भी उसे फोन किया पर उसने जवाब नही दिया , उसे लगने लगा था के शिवानी ने उसे धोखा दिया है । जब आयुष कुछ दिनो बाद कालेज़ पहुचा तो शिवानी और राज़ को साथ पाया । वो उन्हे दूर से देखकर निकल गया , उसी दिन कैंटिन मे शिवानी ने आयुष  से कहा – “ क्या बात है ,कहा थे इतने दिन “  आयुष – “ कही नही काम था “  शिवानी – “ हमे भी बताओ क्या काम था “ आयुष- “ नही बस काम था “  शिवानी-“ तो तुम हमें नही बताओगे, यही है तुम्हारी दोस्ती “ आयुष गुस्से मे था पर अपने को काबू कर के उसने शिवानी से वो बात पूछ ही ली । शिवानी कुछ देर तो हिचकिचाई और फिर कहा – “ऐसा नही है के मैं तुम्हे बताना नही चाहती थी पर सब अचानक ही हुआ “ आयुष ने शिवानी से कहा के – “तुम फिर हर दम मेरे साथ रहती थी , मुझसे ऐसे बात करती थी जैसे तुम मेरी गर्लफ्रेंड हो “

 
शिवानी ने जब ये सुना वो सब बात समझ गई और आयुष से कहा – “ तुम म्रेरे दोस्त से ज्यादा हो,पर बायफ्रेंड से कम हो “  ये कहने के बाद शिवानी वहा से चली गई । आयुष काफी देर तक ये सोचता रहा के आखिर ये कैसा रिश्ता है । उसने कभी इस रिश्ते के बारे मे नही सुना था ।

 
उसके बाद आयुष और शिवानी दोनो एक दुसरे के – दोस्त से ज्यादा, पर गर्लफ्रेंड और बायफ्रेंड से कम रहे “

 
“I am sharing a Half relationship story at BlogAdda in association with #HalfGirlfriend




 

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