बूंद



खुशी हो या हो गम के दिन,
साथ हमेशा रहती है.... बूंद
,

 
ढलती शाम कहु इसे या सुबह की लाली
,
साथ हमेशा रहती है ... बूंद 




हर पल को देखकर ,
अपने अस्तित्व को बताने ...बाहर आ जाती है ...बूंद 

poem on water drop





खालीपन,उदासी, मुस्कुराहट या फिर खुशी ,
हर बार साथ निभाती है ....बूंद . 




सोचो अगर ये बूंद ना होती तो क्या होता,
आँखों मे अहसास ना होता
,
बातो मे विश्वास ना होता
,
जैसे नदी की पहचान उसकी लहरे है
,
वैसे हमारी आत्मा है ...बूंद 


C.J 

Comments

  1. वाह भाई.., वाह.. क्‍या बात है। बहुत ही सुंदर रचना। मुझे बेहद पसंद आई। अच्‍छा लिखते हैं आप।

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  2. shukriya ji..
    late reply ke liye maafi mangana chahunga

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