Saturday, 26 November 2016

School Bags | एक ऐसा रिश्ता भी है




एक ऐसा रिश्ता भी है



जब मैं पैदा हुआ था शायद तब से ही वो मेरे साथ था । तब शायद मैं उसे जान नही पाया था । फिर भी बाद मे ये एहसास हुआ के ये तो तब भी वही था । जब मैं पांच साल का हुआ तब मैंने उसे देखा और ये कहू के देखा तो पहले भी  था पर समझा पहली बार ,उसके बाद तो फिर वो मेरे साथ मेरे साये की तरह रहा और आज भी वो मेरे साथ है


 
मेरे सुख-दुख , सफलता- असफलता की हर कहानी मे मैंने उसे पाया है । मेरी जिंदगी मे जो रंग मुझे भरने थे वो रंग उसमे ही समाये थे । कभी रंगो से वो भीगा भी और साल –दर साल उसे मे नये परिवेश मे देखता भी गया ,परंतु रुह उसकी हमेशा वही थी । बदला तो बस शरीर ही था । मौसम बारिश का हो या गरमी का उसने उस ज्ञान को जो उसने अपने भीतर रख रखा था । उस पर कभी आंच नही आने दी । ख्वाब हो या हकीकत हर वक्त और या ये कहू हर सांस मे वो था । जब-जब वो मुझे नही मिलता एक अज़ीब से बैचेनी मुझे हो जाती थी ।


लगता था दुनिया ही खत्म हो गई हो ,परंत साल के कुछ महीने ऐसे भी थे जब मैं उसे भी आराम दे देता था । मॉ के हाथ के बने पराठे , सेंड्विच , अचार, सब्जी, रोटी या मिठाई हर चीज़ हमने मिल-बाट कर खायी थी । कई बार गुस्से मे और जाने-अनजाने मे मैंने इसपर जाने क्या-क्या फेका,कभी इसे ही धक्का दे दिया पर इसने कभी मेरी बात का बुरा नही माना । जब-जब मुझे जरुरत हुई इसने मेरा साथ दिया ।


School Bags

 
जैसे – जैसे साल बीतते गये मैं बडा होता गया और वो दुबला हो गया । जब मैं कालेज़ मे आया तो सोचा के आखिर ऐसा क्यो हुआ ? कुछ साल तो मुझे बिल्कुल ही समझ नही आया फिर जब कालेज़ का आखरी साल आया तो लगा के अब मैं इसे मॉ के हाथ से बना खाना नही खिलाता हू और शायद यही कारण रहा इसके दुबले होने का या फिर शायद ये जिम जाने लगा हो पर ये तो हमेशा साथ ही रहा ।


मेरे बिस्तर पर आराम करता  तो कभी टेबल या कुर्सी पर और कभी मैं इसकी गोद मे सर रखकर सो जाता था । कालेज़ के दिनो मे शायद इसने भी मेरे संग इश्क किया होगा । अपने महबूब को देखकर कभी इसको शरमाते हुये तो नही देखा पर हा अगडाई जरुर लेता था । बस और ट्रेन मे हर जगह मेरे लिये जगह रखता था । 


नौकरी लगी तो भी साथ था पर फिर ये और छोटा हो गया था । पर एक अच्छी बात हुई के अब फिर से मैंने इसे मॉ के हाथ का बना खाना खिलाना शुरु कर दिया था । कुछ साल बाद जब शादी हुई तो पत्नी के हाथ का खाना ये भी खाने लगा मेरे साथ । जब अकेला रहता हु तो इसके संग बाते भी हो जाती है । बातो मे लफ्ज़ नही होते है ,बस एहसासो से ही बात होती है । एक दिन इसी एहसास मे इसने कहा –शुक्रिया । मैंने पूछा किसलिये , तो कहता है – “ तुम्हारे बिना मेरा कोई अस्तित्व नही है ।


अब जब तुम कामयाब हो गये हो तो शायद मेरी जरुरत नही हो तुम्हे फिर भी तुम मुझे अपने से अलग नही करते हो ।“ मैंने इससे कहा के कभी धडकन दिल से अलग हुई है जो तुम्हे अलग कर दू ।जब-जब मैं गिरा ये भी गिरा और फिर हम साथ उठे और आगे बढे ।  मुझे ऐसा लगता है इसका और मेरा एक गहरा रिश्ता है । ये रिश्ता इसकी और मेरी रुह का है । जो कभी अलग नही होने वाली । जब मैं काम करना बंद कर दुंगा तो ये मेरी कलम ,डायरी और टोपी को सभांलेगा और मेरे मरने के बाद कुछ देर तो रोयेगा । परंतु मेरा दुसरा जन्म होते ही हम फिर साथ-साथ होंगे ।


ये कहानी थी मेरी और मेरे बस्ते की या बैग जो नाम आप इसे देना चाहे ,जब से पैदा हुआ और जब इस दुनिया को छोड के जाउंगा ।  हमेशा साथ रहेगा ये मेरे हर किस्से मे हर कहानी मे , अभी भी देख रहा है और कह रहा है – “ क्या लिख रहे हो “ जब  इसे अपने कंधे जब रखता हू ऐसा लगता है कोई है  जो साथ है,साथ था और साथ रहेगा ।



 

 

Contest Post-WoW Mind your Language

 

Youtube-Chirag Ki Kalam




School  Bags | School Bags For Boys | School Bags For Girls | School Bags For Kids | School Bags Price | School Bags Essay | School Bags Photo | School Bags Images | School Bags Brands | School Bags Flipkart



Tuesday, 15 November 2016

India vs England | रायता फैल ही गया था




 
भारतीय क्रिकेट टीम ने हाल ही मे टेस्ट क्रिकेट मे नबंर -1 के पद को हासिल किया है । न्यूजीलैण्ड के सीरिज़ जीत से भी टीम का हौसला काफी ऊचा था । “ था “ इसलिये उपयोग किया गया क्योंकी जब भारतीय टीम इंग्लैड के खिलाफ पहला टेस्ट खेलने उतरी तो इस खेल के रचियता इंग्लैड ने उन्हे ये बताया के नबंर एक पर आना और वहा पर टीके रहना दोनो अलग बात है ।

 
काफी वक्त बाद कप्तान विराट कोहली सिक्के के उछाल मे मात खा गये और इंग्लैड ने राजकोट की पिच पर पहले बल्लेबाज़ी करने का निर्णय लिया । इंग्लैड के कप्तान कूक ये जानते थे के अगर भारत मे पहले बल्लेबाज़ी नही की तो मैच हारने का प्रतिशत काफी तेजी से बढ्ता है ।

 

 

 
कूक और युवा हमीद (जो अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे थे )  ने एक अच्छी शुरुवात दी और जब लगा के कूक अपना पुराना प्रदर्शन ( भारत के खिलाफ कूक का प्रदर्शन भारत और भारत के बाहर शानदार रहा है )  दोहरायेंगे,रविंद्र जाडेजा ने उन्हे एल.बी.ड्ब्ल्यू किया । इस सीरिज़ मे पहली बार भारत मे डी.आर.एस का उपयोग हो रहा था । इस डिसीज़न को लेकर कूक ने हमीद से बात की पर युवा हमीद का कम अनुभव यहा आडे आ गया , बाद मे देखने पर पता लगा गेंद लेग स्टम्प पर जा रहि थी । खैर इसके बाद उम्मीद थी के इंग्लैड जल्द ही दम तोड देगी और शाम तक विजय और गौतम गम्भीर बल्लेबाज़ी करते दिखेंगे । परंतु इंग्लैड के बल्लेबाज़ राजकोट की इस सपाट पिच पर रन बनाते चले गये . आर. अश्विन जो अधिकतर भारत को ऐसी स्थिती से उबार लेते है कुछ ना कर पाये क्योंकि पिच पर टर्न नही था । अश्विन के ज्यादातर विकेट भी तब आये है जब गेंद घुमे , जैसा मुरलीधरन के साथ होता था । मुरलीधरन और अश्विन जैसे गेंदबाजो को पिच से मदद मिलना जरुरी होता है ।

 

 

 
खैर इंग्लैड टीम की तरफ से तीन शतक लगे और उन्होने अपनी पहली पारी मे 537 रन बनाये । भारत को एक और झटका ये भी लगा के जब गेंद रिवर्स स्विंग हो रही थी तो मोहम्म्द शामी चोटिल हो गये । उन्होने गेंदबाजी तो की परंतु पुरी ताकत से वो गेंद नही कर पाये । गौतम गम्भीर जो वापसी करने की कोशिश कर रहे थे । एक नये स्टांस के साथ उतरे । इस स्टांस से वो दुसरे दिन तो अच्छा खेले लेकिन वो अगले दिन ब्राड की गेंद पर फिर से वैसे ही आऊट हुये क्या करे आदत बदलना  इतना आसान नही है । गौतम को अपना आऊट होना उस वक्त और बुरा लगा  होगा जब पुजारा और विजय ने शतक बना दिये । सपाट पिच पर गेंद मे थोडा सा उछाल था जिसका फायदा इंग्लैड के गेंद्बाजो ने उठाया । गेंद बहुत धीमे  घुम रही थी , भारत के पास मौका था के एक अच्छी बढ्त लेकर इंग्लैड पर दबाव डाले । ऐसा हुआ नही  भारत ने अपनी पहली पारी मे 488 रन बनाये । इंग्लैड ने  दुसरी पारी 260/3 पर घोषित की ,कप्तान कूक ने शानदार शतक जमाया और अपने रंग मे लौट आये ।

 

 

 

 

India vs England

 

 
आखरी दिन भारत के पास थे 49 ओवर और 310 रन बनाने की चुनौती .कप्तान कोहली ऐसी चुनौती पहले भी स्वीकार कर चुके थे । उस वक्त भारत हार गया था । इस बार शायद ऐसा उनके मन मे नही था । गौतम के पास ये शायद आखरी मौका था और वो इस मौके को भूना नही पाये और शून्य के स्कोर पर आऊट हो गये । जब 47 के स्कोर पर दुसरा विकेट गिरा लगा मैच ड्रा ही होगा । परंतु ऐसे मौके पर रायता फैलाना तो जरुरी था । तो वो फैलना शुरु हुआ 71 पे 4 और फिर 132 पे 6 आऊट हो गये लगा भाई घर मे हारने का सीज़न चल रहा है । अभी पर्थ मे साऊथ अफ्रीका ने आस्ट्रेलिया को हराया और अब हमारी बारी है । कप्तान कोहली टीक गये और साथ मे लिया सर जडेजा को जिनके  आऊट  होने की प्रोबेबिलिटी एक के आसपास थी । 
पर दोनो लौंडे टीक गये और करा लाये मैच ड्रा । सबने  कोहली की तारीफ की परंतु सवाल तो कई बाकी रह गये । सपाट पिच पर तीन स्पिनर खिलाना । जब शमी पूरी तरह फिट नही थे फिर भी उन्हे खिलाया गया और एक सवाल साहा से जिन्होने इस मैच मे कई कैच गिराये ।

 

 

 
उम्मीद है टीम अगले मैच मे अच्छा प्रदर्शन करेंगी बशर्ते है पिच पर इस बार गेंद ज्यादा ना घुमे वर्ना हम ही अपने जाल मे फस सकते थे ।





India Vs England FootballIndia Vs England 2018India Vs England Football ScoreIndia Vs England SoccerIndia Vs England Intercontinental CupIndia Vs England Football MatchIndia Vs England Football FinalIndia Vs England Football Live Score


Saturday, 12 November 2016

Demonetisation Article



भरोसा रखिये परिवर्तन होगा


 

प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने जब 9 नवंबर को ये घोषणा की के आधी रात के बाद से 500 और 1000 के नोट चलने बंद हो जायेंगे तो उनकी सरकार की बहुत तारीफ हुई और रातभर तारीफो के मैसेज फेसबूक और वाट्सएप पर चलते रहे ।



अगले दिन बैंक बंद थे, लोगो को तकलीफ तो हुई पर सबने सोचा देशहित मे एक दिन की तकलीफ झेल लेंगे । फिर जब अगले दिन बैंक खुली पर जो सबको उम्मीद थी उस हिसाब से हुआ नही और होना भी नही था । इतना बडा देश है सबके नोटो को बदलने मे वक्त तो लगेगा । फिर अगले दिन ए.टी.एम खुले परंतु फिर भी हालातो मे कोई सुधार नही हुआ । सवाल करने वाले बस इसी के इंतेजार मे थे और वो दो दिन बाद इसलिये बोले के दो दिन वो भी अपने नोट बदलने मे लगे थे ।

 
जैसे घर मे कोई भी प्रोग्राम होता है तो रिश्तेदारो मे से कोई एक जरुर होता है जो चाहे काम कितना भी अच्छा हो कमिया निकालता ही है । कुछ लोग उस रिश्तेदार को फूफा कहते है( कोई भी फूफाजी,खासकर मेरे तो बिल्कुल भी बुरा ना माने और मान जाये तो दो रोटी ज्यादा खा लेना ,कई बार खाना हर चीज़ भूला देता है ) तो कोई कुछ ओर तकिया कलाम उपयोग करते है । हा तो ये फूफा टाईप लोग शुरु हो गये साहब फेसबूक से लेकर हर जगह के गरीबो के साथ अत्याचार हो रहा है और  अब गरीब क्या करेगा ।


अब ये वो लोग होते है जो धरातल पर नही जाते है , बस इंटरनेट पर भौकाल बनाते रहते है के ये गरीबो के सबसे बडे मसीहा है और हा इनमे से एक ने भी बाज़ार जाकर किसी गरीब को दो रोटी नही खिलाई होगी ।


खैर कुछ ने अंबानी पर भी आरोप लगाये के भाई इसका पैसा कहा है वगैरह-वगैरह , ये वही है जो जियो सिम की लाईन मे सबसे आगे खडे थे । बात यहा खत्म नही होती कुछ हाई-सोसायटी वालो ने तो 2000 के नये नोट मे ही गलती निकाल दी । कहते है के इसमे हिंदी मे  “ दोन हज़ार रुपया “ लिखा है । ये वही लोग है जो आई-फोन के लांच मे रातभर खडे रहते है और एम टीवी रोडीज़ के आडिशन मे भूखे प्यासे खडे रहते है , जबकी वहा अंदर जाकर इन्हे गालिया मिलती है ।  साथ ये गलती निकालने वालो ने हमेशा क्रेडीट कार्ड उपयोग किया है । जिसका बिल अंग्रेजी मे आता है ,अब इन्हे कैसे समझाये के ये “दोन हज़ार रुपया “ “कोंकणी “ भाषा मे लिखा हुआ है ।

 

Demonetisation Article


 
मैं किसी पार्टी के संग नही हू परंतू अगर हमने जिन्हे वोट देकर इस देश की सत्ता दी है,उनपर भरोसा तो करना चाहीये । अगर हम ही भरोसा नही करेंगे तो और कौन करेगा । जियो सिम की लाईन हो, किसी सेलिब्रेटी को देखना हो या क्रिकेट मैच का टिकिट खरीदना हो तब भी हम खडे रहते है खुशी-खुशी और आज जब देश को जरुरुत है के हम उसका साथ दे ।  हमारे सैनिक भी सीमा-रेखा पर खडे  है देश के लिये उन्होने तो कभी शिकायत नही की. 

 
जिसके पास भी कालाधन होगा वो अभी परेशान घुम रहा होगा और वो हमारा ही पैसा दबा के बैठा होगा। इस मुहिम को अपना सहयोग दिजीये और भरोसा रखिये परिवर्तन होगा ।

 
मैं देश के सभी बैंक कर्मियो को धन्यवाद देना चाहूगा उनके सहयोग के लिये जो की अमूल्य है ।

 
जय हिंद ।







Demonetisation Article | Demonetisation Article The Hindu | Demonetisation Article In Hindi | Demonetisation Article Pdf | Demonetisation Article 14 | Demonetisation Article For Students | Demonetisation Article In Telugu | Demonetisation Article In Marathi

Wednesday, 19 October 2016

Karwa Chauth Poem



मैं रहूंगा




जब तू सुबह उठ कर अपनी जुल्फो को सवार रही होगी ,
तब सुबह की उस ताज़गी मे
,
मैं रहूंगा  ...

 
मुस्कुरा कर जब तू आइने मे देख रही होगी खुद को ,
तब उस आइने मे संग तेरे
,
मैं रहूंगा ...

 
दिन मे जब तू बिना कुछ खाये –पीये काम करेंगी ,
तो तेरी हर थकान को दूर करने .. ठ्न्डी हवाओ मे
,
मैं रहूंगा .... 

 

Karwa Chauth Poem

 
जब सांझ ढलने को होगी और तू मेरा इंतेजार करेगी ,
तब उस इंतेजार के हर एक पल मे
,
मैं रहूंगा .... 

 
सज-सवंर के जब तू बिंदिया लगायेंगी तो ,
उस बिंदीया की सरलता मे
,
मैं रहूंगा ... 

 
मैं रहूंगा  ...उन कंगनो की मधुर आवाज़ मे ,
सिंदूर मे
, काज़ल मे और तेरी पायल की छम-छम मे .

 
रात को जब चांद की पूजा करके तू ,
मुझे देखना चाहेगी
,
तो बस अपनी आंखे बंद कर लेना
,
मैं रहूंगा .... तेरी आंखो मे वही .. 

 


मेरा शरीर संग तेरे नही होगा आज ,
पर मेरी रुह वही होगी कही आसपास
,
मैं हमेशा रहूंगा...तेरे दिल मे
, विश्वास मे और तेरी हर सांस मे .


मैं रहूंगा .... मैं रहूंगा .... मैं रहूंगा ..... 


 
ये कविता मैंने अपनी पत्नी के लिये लिखी है .

 
( चिराग जोशी )    






Karwa Chauth Poem | Karwa Chauth Poem For Wife In Hindi | Poem For Husband In Hindi |  Poem For Wife | Karwa Chauth Poem For Husband | Karwa Chauth Poem Time | Karwa Chauth Thali Buy Online

Thursday, 1 September 2016

Writing A Poem




 
मैंने आज फिर कलम उठाई है

 
कोरे कागज़ पर अल्फाजो की बहार आई है,
अहसासो ने फिर दिल मे एक धुन बजाई है
,
बहुत दिन हुये ....
मैंने आज फिर कलम उठाई है

 
नये दौर मे एक नयी आवाज़ आई है,
बीते वक्त की तस्वीर फिर आखो मे समाई है
,
बहुत दिन हुये ....
मैंने आज फिर कलम उठाई है

 

me and my pen

 
कुछ दुरी पर छोड दिया था जिसे,
वो मुस्कान मेरी लौट आई है
,

 
खुला आसमान है पाने को,
कोशिशो मे नये रंग भरने को
,
विश्वास की वो डोर फिर खुदा ने पकडायी है
,
बहुत दिन हुये ....
मैंने आज फिर कलम उठाई है

 
रुक फिर जाऊ शायद मंजिल से पहले,
पर अब रुक कर बढने की हिम्मत आई है....
बहुत दिन हुये ....
मैंने आज फिर कलम उठाई है...





Writing A Poem | Writing A Poem About Someone | Writing A Poem In Hindi | Writing A Poem Tips |  Poem About Your Child | Poem Template |  A Poem About Yourself | Poem Worksheet

Sunday, 7 August 2016

School Friends | भाई मैं हू चिंता मत कर



भाई मैं हू चिंता मत कर


जिंदगी मे हम अकेले आते है और दुनिया की नज़र मे तो अकेले ही जाते है. परंतु जब हम इस दुनिया को अलविदा कहते है तो कई रिश्ते साथ होते है. जिनके बारे मे हमे याद नही रहता पर उन लोगो को जरुर हम याद रहते है जो हमारे साथ कई रिश्तो मे सहभागी बने. इन्ही रिश्तो मे से एक है दोस्ती का रिश्ता.

 
दोस्त, यार , यारा, मित्र , सखा ,सहेली और भिडू ऐसे कई नामो से जाना जाता है इस रिश्ते का साथी. बचपन मे जब चाकलेट को तोडकर दोस्त को आधी देते थे लगता था जिंदगी का सबसे बडा सुकून मिला है.


पेंसिल की नोक टूट जाने पर इधर-उधर नज़र घुमाते ही हमारे कंधे पर एक हाथ आ जाता था और जिस शार्पनर को हम खोज़ रहे होते थे, वो उस हाथ मे होता था. दोस्त संग रहते थे तो मुर्गा बनने मे भी मज़ा आता था. जब दोस्त का जन्मदिन होता था  |


हम ऐसे खुश होते थे जैसे आज हमारा जन्मदिन हो उसके संग हर क्लास मे जाकर टाफी बाटते थे. जब कभी स्कूल मे खेलने का पिरियड होता था और दोस्त दुसरी टीम मे हुआ तब हमे धर्मसंकट शब्द का मतलब समझ आया था. दोस्त जहा कोचिंग जाता हम भी वही चले जाते या फिर वो हमारे पीछे आ जाता था |

 
कालेज़ मे जब आये तो फर्स्ट इयर के डर का साथी बना. दोस्त ना होता तो शायद कई असाइंटमेंट अधूरे रह जाते,अटेंडेंस शार्ट हो जाती आखिर प्रोक्सी भी वही लगाता था. इश्क की किताब का पहला पन्ना भी दोस्तो के नाम ही रहा. जब वो कहते थे- “ भाई मै सुबह से देख रहा हू ,तुझे  ही देख रही है “. साथ ही इश्क का आखरी पन्ना भी दोस्तो के नाम ही है –“ अरे तू चिंता मत कर वो तेरे लायक नही थी. “ दोस्त एक ऐसे सहारे की तरह होते है जो आपको टांग अडा के गिरा भी देगा और आपका हाथ भी नही छोडेगा. 


दोस्ती का रिश्ता हम खुद बनाते है और शायद इसलिये भरोसा भी ज्यादा करते है. एक्जाम की तैय्यारी हो या फिर वाई-वा हर डर के आगे ढाल बन जाते थे दोस्त. अगर ये कहू के हमारे हौसले की चाबी थे तो गलत नही होगा –“ अबे ये आसान है रुक मैं समझाता हू “. गलती किसी की भी हो पर इल्जाम सब अपने सर लेते थे. 


 

friends are my life

 
आज जब चाकलेट खाता हू तो दोस्त बहुत याद आते है. दोस्त तब भी याद आते है जब टिफिन मे रोटी चार होती है और खाना अकेले होता है. भूख तो मिट जाती है पर दिल मे एक कसक रह जाती है. चाट के ठेले पर जब आज भी दोस्तो की टोली की लाइन सुनता हू – “ ये ले मेरे 2 रुपये , अबे तु भी दे , अरे मैं कल दे दूंगा , तूने आजतक दिये है “ तो दोस्त बहुत याद आते है . जब उदास हो जाते है तो आफिस मे कोई कहता है “ कोई ना सब ठीक हो जायेंगा “ तो दोस्त की वो झप्पी याद आती है जो कुछ कहे बगैर ही सब ठीक कर देती थी. 

 
जब कभी गुमटी पर चाय की चुस्की लगाता हू तो दोस्त बहुत याद आते है. जब पेन मे रिफिल खत्म हो जाती है तो दोस्त बहुत याद आते है. एक लाइन – “ भाई मैं हू चिंता मत कर “ दोस्त की कही ये एक लाइन हमे हर तरह की मुश्किल पार करने का साहस देती थी .  

 
याद जब बीते वक्त को करता हू तो लगता है यादो मे दोस्त है या सिर्फ दोस्ती की यादे है. मेरे जिंदगी मे आये मेरे सभी दोस्तो को दोस्ती दिवस की बहुत बहुत बधाई..




Also Read NehraJi



School Friends | School Friends Status | School Friends Quotes | School Friends Shayari | School Friends Photos | School Friends Group Name | School Friends Group Icon | School Friends Wallpaper

Thursday, 21 July 2016

Hindi Short Story | आखरी गलती



आखरी गलती




राजीव ने अपने पेन को ऊठाकर अंगूठे और उसके पास वाली उंगली से घुमाने लगा . इस तरह पेन को घुमाने की कला हर कॉलेज़ जाने वाला स्टूडेंट को कक्षा 12वी से ही आ जाती है. इस कला मे जैसे ही कोई छात्र माहिर हो जाता है उसे लगने लगता है उसने जिंदगी की एक बहुत बडी पहेली हल कर ली है.




अचानक से शोर हुआ और राजीव के हाथ से पेन छूट गया और उसका ध्यान खिडकी पर गया. गली मे एक नारा हर कोई दोहरा रहा था . जीतेगा भाई जीतेगा गोलू भैय्या जीतेगा. इस शोर मे गली के नुक्क्ड के चाय वाले की आवाज़ सबसे तेज़ आ रही थी जिसकी गुमटी पर बैठकर गोलू शर्मा रोज़ छात्र-संघ के चुनाव जीतने की प्लानिंग करता था.

उसने वादा किया था चाय वाले कैलाश से – “जैसे ही हम चुनाव जीतेंगे हम सबसे कहेंगे के आपके यहा की चाय की चुस्की लगा-लगा कर ही हम इस चुनाव को जीतने की प्लानिंग किये है और कैलाश इस आश्वासन के भरोसे गोलू के सभी साथियो कोमुफ्त मे चाय पिलाया करता था . 




राजीव शोर सुनकर अपने अतीत को याद करने लगा. उसने भी एक बार इसी चुनाव के लिये इसी गुमटी पर बैठकर प्लानिंग की थी. परंतु राजीव ने या उसके साथियो ने कभी भी कैलाश के यहा मुफ्त मे चाय नही पी थी . अचानक से उसके कमरे का दरवाज़ा खुला. “बेटा राजीव ले दुध पी ले “- उसकी मॉ ने यह कहते हुये दुध टेबल पर रखा और चली गई . राजीव ने कुर्सी सरकाई तो एक आवाज़ आयी ,कुर्सी के एक टांग के नीचे पेन दब गई थी .

उसने पेन को उठाया और कुछ सोचने लगा. पेन को बडे आराम से संभाल कर घुमा रहा थाऔर जैसे ही उसने ध्यान हटाया पेन नीचे गिर गई . ये पेन राजीव को कविता ने दिया था. 



कविता जी हा जैसा हर कहानी मे होता है ,कविता राजीव की गर्लफ्रेड थी .दोनो एक दुसरे से बहुत प्यार करते थे . राजीव अपने कॉलेज़ का हीरो था और पूरे कॉलेज़ मे हर जगह ही उसके चर्चे थे . राजीव छात्रसंघ का चुनाव जीत के कॉलेज़ का प्रेसिडेंट बनना चाहता था . कविता और राजीव की मुलाकत कॉलेज़ के पहले साल मे हुई थी . कविता से राजीव ने पहली ही मुलाकात मे अपने प्यार का इज़हार कर दिया था .


राजीव को कॉलेज़ के पहले ही हफ्ते मे एक सीनियर ने कहा – “ ओ चिरकुट कहा जा रहा है “. राजीव ने कहा –“ सर क्लास मे जा रहा था “. सीनियर ने कहा-“ फर्स्ट ईयर मे हो “. राजीव ने हा मे सर हिलाया . तभी उधर से कविता का आना हुआ . सीनियर ने कहा –“ जा जाकर उस लडकी को ये फूल देकर आई.लब.यू कह के आ “ सभी सीनियर जोर से हसने लगे. राजीव को डर तो लगा था परंतु वो कविता को कॉलेज़ के पहले दिन से ही चाहने लगा था . 

 

 
Hindi Short Story

 


जब राजीव ने कविता को फूल देकर अपने दिल की बात कही .कविता कुछ देर तो घबरा गई फिर उसने देखा दूर बैठे सीनियर हस रहे है तो वो ये समझ गई के ये रेगिंग का एक हिस्सा है. इसीलिये उसे इस बात का गुस्सा नही आया . लेकिन कहते है ना इश्क रंग धीरे –धीरे चढता है . कॉलेज़ के पहले साल के खत्म होते –होतेजब फ्रेशर पार्टी मे उसे कविता के लिये गाना गाने को कहा और उसने उस गाने के ज़रीये अपनी मोहब्बत का इज़हार कर दिया , कविता कुछ देर तक इसे फिर रेगिंग समझती रही .

 

प्यार तो वो भी करती थी राजीव से परंतु चाह रही थी के इज़हार राजीव करे परंतु राजीव ने ये रेंगिंग के कारण किया था. राजीव ने आखिरकारउसी पार्टी मे कविता को सच कह दिया और कविता ने भी उसके प्यार को स्वीकार किया . पहले साल के बाद राजीव हर किसी का चहेता था और सब चाहते थे वो कॉलेज़ का प्रेसिडेंट बने .




राजीव ने चुनाव लडा और जैसीसबको उम्मीदथी वो जीत गया . शाम को उसकी जीत मे उसने एक पार्टी रखी . उसकी पार्टी मे उसके सारे दोस्तो के संग कविता भी आयी थी . पार्टी मे खाने के साथ शराब भी थी . राजीव वैसे तो नही पीता परंतु उस दिन सबके कहने पर थोडी पी ली, पर शराब कभी थोडी नही होती , जब तक पीकर होश ना खो बैठे तब तक उतरती भी नही है . रात मे जब शराब ज्यादा हो गई तो कविता ने सोचा वो राजीव को छोड आये .

जब वो राजीव के घर पहुचे , राजीव ने कविता को अपनी बाहो मे भर लिया . कविता को लगा प्यार से वो ऐसा कर रहा था .परंतु वो होश मे नही था और वो कुछ आगे बढ गया . कविता ने उसे रोकने की कोशिश भी की परंतु राजीव अपनेहोश मे नही था . कविता ने जोर से राजीव को धक्काभी दिया पर कुछ ना हो सका.जब सुबह राजीव को होश आया तब उसे समझ आया उसने जो कविता के संग गलत किया . 


कविता ने राजीव से कहा – “ जो हुआ वो गलत हुआ. मैं तुम्हे कभी माफ नही करूगी” .राजीव ने उसे बहुत समझाया के वो होश मे नही था . परंतु ये कविता के उसूलो के खिलाफ था . कविता ने कहा –“ राजीव मैं तुमसे बहुत प्यार करती हू. परंतु तुम सोचो के जो कल हुआ उसके बाद मैं तुम्हारे साथ जिंदगी कैसे बीता पाऊंगी “.कविता उससे प्यार करती थी इसीलिये उसने किसी को इस बारे मे नही बताया .

 

राजीव उसकी इस बात का कोई ज़वाब नही दे पाया.





राजीव को इस बात का बहुत धक्का लगा और उसने अगले ही दिन कॉलेज़ के प्रेसिडेंट के पद से इस्तीफा दे दिया ये कहकर के उसे आई.ए.एस की तैय्यारी करनी है . सबने बहुत समझाया पर राजीव नही माना. राजीव उसके बाद कभी कविता से मुलाकात भी नही की . एक और शोर ने राजीव को वापस वर्तमान मे धकेल दिया. राजीव के हाथ मे वो पेन था जो उसे कविता ने दिया था जब उसने चुनाव जीता था . उस पेन को देखकर राजीव की आखो मे आसू आ गये. पेन की हालत देख के उसे लगा के उस दिन कविता की हालत भी ऐसी हुई होगी.


राजीव ने अखबार उठाया और मुस्कुरा दिया .उसमे लिखा था आर.के कॉलेज़ की कविता को युवा मोर्चा की तरफ से प्रेसिडेंट के पद का टिकीट दिया गया है .उसे अपनी इस पहली और आखरी गलती पर अब अफसोस नही हो रहा था .

-
चिराग जोशी 


Also Read A Simple Love Story




Hindi Short Story | Hindi Short Story With Moral | Hindi Short Story With Pictures | Hindi Short Story Books | Hindi Short Story Writers | College Story | College Story Movie | College Story Song | Hindi Short Story Writing Competition Topics | Hindi Short Story For Ukg | Hindi Short Story For Class 8 | Hindi Short Story With English Translation | Hindi Short Story Images



Monday, 18 April 2016

Poems On Rain | बूंद




 
खुशी हो या हो गम के दिन,
साथ हमेशा रहती है.... बूंद
,


ढलती शाम कहु इसे या सुबह की लाली
,
साथ हमेशा रहती है ... बूंद 

 
हर पल को देखकर ,
अपने अस्तित्व को बताने ...बाहर आ जाती है ...बूंद 

 

Poems On Rain

 


खालीपन,उदासी, मुस्कुराहट या फिर खुशी ,
हर बार साथ निभाती है ....बूंद . 


 
सोचो अगर ये बूंद ना होती तो क्या होता,
आँखों मे अहसास ना होता
,
बातो मे विश्वास ना होता
,
जैसे नदी की पहचान उसकी लहरे है
,
वैसे हमारी आत्मा है ...बूंद 





 

Poems On Rain | Rain In Hindi |  Poems On Rain In English |  Rain And Love | Rain In Telugu |  Rain By Famous Poets