कौन रहता है इस शहर में .....



कौन रहता हैं इस शहर में ,

अनजाने लोग जहा मिलते है अब 


कौन रहता है इस शहर में,

रातो के साए जहा आते नहीं अब 


बंद दरवाजे है , खिड़की पर ताले है ,

चोखट पर धुल नहीं है अब 


कौन रहता है इस शहर में .....

 

ख्वाब तलाशने निकलना है ,
खुली आँखों से नींद आती नहीं अब 

 


आसमान का रंग बदल चूका है ,
पानी में भी तस्वीर नहीं दिखती अब 

 

मुस्कराहट की याददाश्त खो चुकी है ,
आंसुओ के सैलाब हर कदम पर है अब 

 

 

कौन रहता है इस शहर में .....



विचारों की परछाई दिख रही है ,
राज़ बेघर हो गए है यहाँ अब 


सिक्को की आवाज़ अब सुनाई देती नहीं ,
हवाओ में उड़ती है रोशनी उनकी अब 


जिंदगी से बेवफाई सबने की है ,
और मौत से डरते है सब 


बचपन में जवानी ,जवानी में बुढापा है ,
मौत के बाद भी चैन नहीं है अब

कौन रहता है इस शहर में .....

(चिराग )

Comments

  1. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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  2. बहुत बढिया । आपको दीपावली की शुभकामनायें

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  3. deepawal ki bahut bahut shubhkaamnaye
    dhanaywaad...

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  4. deepawali ki bahut bahut shubhkaamnaye
    dhanaywaad...

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  5. deepawal ki bahut bahut shubhkaamnaye
    dhanaywaad...

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  6. बहुत खूबसूरत प्रस्तुति,

    पोस्ट पर आने के लिए आभार,,,,
    recent post...: अपने साये में जीने दो.

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  7. bahut badhiya chirag...one of the deepest thoughts from your side...cheers

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  8. Beautifully written........ reminds me of Uttaranchal in some lines.

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