Friday, 2 March 2012

Hindi Short Poetry



जरा सा रुक कर देखना कभी


जरा सा रुक कर देखना कभी कब्रिस्तान मे भी,
शायद कोई अभी भी जिंदगी की जंग लडता हुआ मिल जाये
जरा सा रुक कर देखना कभी उस टुटे मकान मे भी,
शायद अभी भी कोई सपनो के महल की दिवारे चुनते मिल जाये



 

जरा सा रुक कर देखना कभी  सुलझे मैदान मे भी
,
शायद अभी भी कोई पेड अपनी टहनियो को सहलाता हुआ मिल जाये
,
 



जरा सा रुक कर देखना कभी उस रात के अंधेरे मे भी,
शायद अभी भी उज़ाला अपने अस्तित्व की लडाई करते हुये मिल जाये,




Hindi Short Poetry

जरा सा रुक कर देखना कभी आकाश मे भी,
शायद धरती से मिलने की आस लगाये बादलो मे कोई बूंद मिल जाये.

जरा सा रुक कर देखना कभी उस भिखारी के कटोरे मे भी,
शायद दुआओ की कोई अधुरी कहानी मिल जाये

जरा सा रुक कर देखना कभी अपने पैरो के तलवो मे भी,
शायद अब तक के सफर की निशानी मिल जाये. 

जरा सा रुक कर देखना कभी.....

(चिराग)






Hindi Short Poetry On Life | Hindi Short Poetry On Love |  Hindi  Short Poetry On Friendship | Hindi Poetry On Rain | Poetry On Mother 




 


 

20 comments:

  1. all we need is to stay 4 a moment n look around..
    lovely message !!

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  2. जरा सा रुक कर देखना कभी अपने पैरो के तलवो मे भी,
    शायद अब तक के सफर की निशानी मिल जाये. बहुत ही खुबसूरत
    और कोमल भावो की अभिवयक्ति....

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  3. nice :)
    jara sa ruk kar dekhna hamare blog mein bhi,
    dil ko chune vali koi kavita ya kahani mil jaye :)

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  4. 'शायद अभी भी उजाला अपने अस्तित्व की लड़ाई करते हुए मिल जाए'-
    संघर्ष अपनी आधी-अधूरी निशानियाँ छोड़ता चलता है. बहुत ही सुंदर कविता.

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  5. Shayad ab tak ke safar ki nishani mil jaye zea ruk kar dekhna kabhi
    .........wah Chirag bhai jwab nahi aapka Excellent post

    ............
    Gud wishes to u holi festival
    from Sanjay bhaskar

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  6. thanks a lot
    ya its a urdu word so a bindi in ujala

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  7. absolutely beautiful.............

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ब्लाग पर आने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद