Posts

Showing posts from March, 2012

Hindi Short Poetry

Image
जरा सा रुक कर देखना कभी जरा सा रुक कर देखना कभी कब्रिस्तान मे भी , शायद कोई अभी भी जिंदगी की जंग लडता हुआ मिल जाये जरा सा रुक कर देखना कभी उस टुटे मकान मे भी , शायद अभी भी कोई सपनो के महल की दिवारे चुनते मिल जाये   जरा सा रुक कर देखना कभी  सुलझे मैदान मे भी , शायद अभी भी कोई पेड अपनी टहनियो को सहलाता हुआ मिल जाये ,   जरा सा रुक कर देखना कभी उस रात के अंधेरे मे भी , शायद अभी भी उज़ाला अपने अस्तित्व की लडाई करते हुये मिल जाये , जरा सा रुक कर देखना कभी आकाश मे भी , शायद धरती से मिलने की आस लगाये बादलो मे कोई बूंद मिल जाये. जरा सा रुक कर देखना कभी उस भिखारी के कटोरे मे भी , शायद दुआओ की कोई अधुरी कहानी मिल जाये जरा सा रुक कर देखना कभी अपने पैरो के तलवो मे भी , शायद अब तक के सफर की निशानी मिल जाये.  जरा सा रुक कर देखना कभी..... (चिराग) Hindi Short Poetry On Life | Hindi Short Poetry On Love |  Hindi  Short Poetry On Friendship | Hindi Poetry On Rain | Poetry On Mother