Friday, 24 June 2011

कुछ बातें


शब्दों के खेल में 

बातो के मेल में 

उलझते हैं दिल के सवाल कई 

 

शर्माती इठलाती हुई बातो में 

वो अनकही मुलाकातों में 

आँखों के इशारो में 

मिल जाते हैं मौसम कई 

 

छम-छम पायल की तेरी 

जुल्फों की छाव तेरी 

लबो से निकली वो बातें तेरी 

दे जाती हैं जवाब कई 


 

yaadein-memories


शाम तो रोज आती हैं 

लेकर चंदा को साथ अपने 

हवा भी चली आती हैं 

लेकर ख्याल कई 

 

जाम तो रोज रात में 

हाथ में होता हैं 

नशा चाहे हो न हो 


आईने में जब देखता हूँ 

तस्वीर अपनी  

तेरी चूडियो की खनक 

दिखाई देती हैं 

 (चिराग )