कुछ बातें


शब्दों के खेल में 

बातो के मेल में 

उलझते हैं दिल के सवाल कई 

 

शर्माती इठलाती हुई बातो में 

वो अनकही मुलाकातों में 

आँखों के इशारो में 

मिल जाते हैं मौसम कई 

 

छम-छम पायल की तेरी 

जुल्फों की छाव तेरी 

लबो से निकली वो बातें तेरी 

दे जाती हैं जवाब कई 


 

yaadein-memories


शाम तो रोज आती हैं 

लेकर चंदा को साथ अपने 

हवा भी चली आती हैं 

लेकर ख्याल कई 

 

जाम तो रोज रात में 

हाथ में होता हैं 

नशा चाहे हो न हो 


आईने में जब देखता हूँ 

तस्वीर अपनी  

तेरी चूडियो की खनक 

दिखाई देती हैं 

 (चिराग )


Comments

  1. वाह! क्या बात है! बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ शानदार रचना लिखा है आपने ! उम्दा प्रस्तुती!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/

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  2. अच्छी रचना |किशोर वय की आदतों का अच्छा वर्णन किया है |
    बधाई
    आशा

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  3. सुंदर प्रेमपगे भाव.....

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  4. Khud ko bhool kar khud mein bhi tera aks dekhta hoon.

    Bahut achhe.


    Blasphemous Aesthete

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  5. मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  6. bahut sunder rachna.man ko chu gaye aapke alfaj.........

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  7. bahut pyaari poem hai...

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  8. The poet in you is a gr8 artist...

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  9. Loved the first four lines....shabdo ke khel main, baaton ke mel main, ulajhte hain dil ke sawal kain :)

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  10. बहुत सच कहा है...बहुत सुन्दर

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