Sunday, 12 June 2011

90's Childhood | काश वापस आ जाये



 
काश वो दिन फिर आ जाये

 
पेंसिल की नौक फिर टूट जाये 

 
नौक करने के बाद के छिलके को पानी में डुबाये 

 
काश वो दिन फिर आ जाये 

 
 

 
काश वो रबर फिर घूम जाये 

 
टिफिन काश वो फिर घर से 

 
लंच टाइम में पापा देने आये 

 
गेम्स पीरियड का वो इन्तेजार 

 
वापस आ जाये 

 


90's Childhood
 

 

 

 


 
एनुअल फंक्शन का वो डांस 

 
वो नाटक की तयारी 

 
वो साइकिल की यारी 

 
काश वापस आ जाये 

 
 

 
वो साइकिल का पंचर होना 

 
वो कम्पास में से पेन चोरी होना 

 
वो ड्राइंग का  पीरियड

 
वो मोरल साइंस के पीरियड की नींद

 
वो बुक से क्रिकेट खेलना 

 
काश वापस आ जाये 

 
 

 
 

 
wwf  का वो खुमार 

 
कोई बनता rock,कोई  undertaker तो कोई rikishi 

 
वो होली का हुडदंग 

 
वो संक्रांति की पतंग 

 
हट ...काटा ......हैं  की

 
वो आवाज़ 

 
 

 
काश वापस आ जाये

 
 

 
वो दिन वो बीते हुए लम्हे 

 
आज भी जेहन में हैं मेरे 

 
बस एक वो आवाज़ वापस आ जाये 

 
और यादो को ताज़ा कर जाये 


90's Childhood | 90's Childhood Memories | 90's Childhood Games | Childhood Cartoons | Childhood Movies | Childhood Shows | Childhood Toys | Childhood Tv Shows | Childhood Books      




Virat Kohli Anil Kumble | तिरभिन्नाट पोहा


YouTube 90's Songs

17 comments:

  1. School days were undoubtedly the best days of everyone's life.
    I instantly felt nostalgic after reading it.

    Well written !!!

    ReplyDelete
  2. किसी के भी जीवन के सबसे स्मरणीय और निश्चिन्त दिन यही होते हैं ,काश वो दिन आ कर वापस जाना भूल जाये .... शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  3. पुरानी यादें ताज़ा कर दीं आपने। एक साथ बहुत से चित्र आँखों के सामने तैर गए....
    अच्छा लगा पुरानी यादों में लौटना ।

    ReplyDelete
  4. Sach mein, wo din bahut achhe aur yaadgaar the.
    Par abhi bhi zindagi achhi hi hai.

    Cheers,
    Blasphemous Aesthete

    ReplyDelete
  5. Sooo True..!!!!!!!!!!!!!! :)

    Those innocent childhood days are the most memorable days in everyone's life!!!!!!!!!!!!!!!!!!
    ^_^

    ReplyDelete
  6. हर एक पंक्तियाँ दिल को छू गयी! बहुत सुन्दर और लाजवाब रचना लिखा है आपने! पुरानी यादों को खूबसूरती से शब्दों में पिरोया है! बधाई!

    ReplyDelete
  7. wow..nice poem..ah! truly those were the days...ur poem took me back to my childhood days! :)

    ReplyDelete
  8. बचपन की यादें ताज़ा कर गयी आपकी कविता !
    आभार !

    ReplyDelete
  9. बहुत भाव पूर्ण कविता है |बधाई आप मेरे ब्लॉग पर आए बहुत अच्छा लगा |आप उज्जैन में रहते हैं
    जानकार बहुत प्रसन्नता हुई |हम लोग भी ऋषी नगर में {उज्जैन में ) रहते हैं |यदि आपने ऋषी नगर देखा है तो अवश्य मिलिएगा |
    आशा |मेरा पता :-
    हरेश कुमार सक्सेना
    c47 Rishi nagar ujjain

    ReplyDelete
  10. Kash wo din fir aa jaye.........kash

    ReplyDelete
  11. thanks to everyone
    this poem dedicated to all the people who were with me in those days

    ReplyDelete
  12. बचपन की यादें ताज़ा कर गयी आपकी कविता !
    सुन्दर शेली सुन्दर भावनाए क्या कहे शब्द नही है तारीफ के लिए....

    ReplyDelete
  13. मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

    ReplyDelete

ब्लाग पर आने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद