Sunday, 29 May 2011

वो अंजाना चेहरा -3


कविता और अमित के बीच बातचीत जारी  रही पर ना तो कभी कविता ने ना अमित ने प्यार का इज़हार करा ,

कविता एक दिन कॉलेज गई और अचानक उसकी मुलाकात संजय से हुई 

 

संजय ने  उसे हेलो कहा ,कविता ने कहा "संजय मुझे अपनी ट्रिप के फोटो चाहिए मुझे ,मैं फेसबुक पर डालूंगी ".

संजय ने कहा "मैं तुम्हे कल ला दूंगा ,तुमने बहुत ही अच्छा गाना गया था ,मैंने सुना हैं की तुम्हारा गला ख़राब हो गया था प्रतियोगिता से एक रात पहले"


"हा संजय ,पर एक दोस्त ने मुझे बचा लिया "

संजय "कोन दोस्त"

कविता " हैं कोई "

संजय"मतलब तम्हारी जिंदगी में किसी खास ने प्रवेश करा हैं "

कविता ने फिर संजय को  बताया के वो अमित को कब से जानती हैं ,और वो उसे चाहने लगी हैं 

 

जब दोनों बात कर रहे थे तो अचानक एक बात पर संजय ने एक शेर कह डाला 

 

"खुश रहना तो खुदा की इबादत हैं 

मुस्कुरा के जीना उसकी चाहत हैं 

नादान हैं वो लोग जो करते हैं 

इन्तेजार  खुशियों का 

वो तो रब की तरह हमेशा हमारे पास हैं "


कविता शेर सुनकर एकदम स्तब्ध रह गई क्योंकि ये शेर उसे अमित ने सुनाया था ,

              उसने सोचा कही संजय ही तो अमित नहीं क्योंकि संजय ने ही उसे फेसबुक के बारे में बतलाया था 

girl and boy talking

कविता ने सोचा थोड़ी जांच पड़ताल करी जाये 

उसने निधि से पुछा संजय के बारे में ,तो निधि ने कहा "क्या बात हैं ,संजय के बारे में क्यों पुच रही हैं "

कविता ने कहा "अरे एसा कुछ नहीं हैं तू इतना बता के वो शायरी लिखता हैं क्या "

 

तभी निधि के मोबाइल पर एक एस .एम .एस  आया ,उसे देखकर निधि ने कहा "ये ले आ गया तेरे संजय का एस .एम .एस"

"मेरी हंसी पर ना जाओ दोस्तों 

ये तो पल भर की हस्ती हैं 

ये तो उस गम को छुपाने  के लिए हैं 

जो आजकल मेरी बस्ती हैं "


जैसे ही कविता ने मेसेज पढ़ा वो चौक गई क्योंकि ये शायरी भी उसे अमित ने सुनाई थी .

कविता ने निधि से कहा "मैं और एस .एम .एस पढ़ लू उसके "

निधि ने कहा "ठीक हैं "

जैसे जैसे कविता एस .एम .एस पढ़ रही थी उसके चेहरे की मुस्कान  बढ़ रही थी 

क्योंकि सारी  शायरिया अमित ने उसे सुनाई थी 

अब उसे पक्का यकीं था के संजय ही अमित हैं 

कविता ने निधि से कहा "ये संजय खुद लिखता हैं शायरी "

निधि ने कहा "हा हो सकता हैं क्योंकि मैंने और किसी से नहीं सुनी ऐसी शायरिया "

कविता "लेकिन मेरे पास क्यों नहीं हैं ...... "निधि ने बात को बीच में ही काटते हुए कहा "तुझे एस .एम .एस का शोक कहा हैं इसीलिए नहीं भेजी होगी उसने तुझे "

 

कविता ने सोचा के अब संजय को सब बता दूँ ,पर फिर एक पर रुकी और  सोचा उसे surprise  दूंगी .

 

रात को जब अमित  उसे ऑनलाइन मिला ,उसने कविता को बताया के वो उसके शहर आ रहा हैं उससे मिलाने १० तारीख को (कविता समझ गई के अब अमित उर्फ़ संजय भी उससे मिलना चाहता हैं )

वो बहुत खुश थी .

आख़िरकार कविता को अपना अमित मिल ही गया 

कैसे दोनों का मिलन हुआ जानने के लिए पढ़िए इस कहानी का चौथा और अंतिम भाग .