Wednesday, 25 May 2011

वो अंजाना चेहरा-1


"कविता ....कविता.... चल उठ जा कॉलेज नहीं जाना हैं क्या " माँ की इस आवाज़ को सुनकर भोली भली सी कविता ने कहा "जी माँ ".

 

कविता आज एम.बी .ए करने के लिए कॉलेज जा रही थी ,एस.डी.एम  शहर का सबसे अच्छा कॉलेज हैं ,कविता काफी उत्साहित थी के चलो आज फिर से नए दोस्त बनेंगे कॉलेज में ,वैसे अपने पुराने दोस्तों को वो भूली नहीं थी ,आज भी उसे अपने इंजीनियरिंग के मित्र याद आते हैं खासकर  राहुल ,श्रेया ,खुशबु ,रोनित और नंदिनी . 

 

कविता फटाफट तैयार होकर कॉलेज के लिए निकल पड़ी 

जैसे ही क्लास में उसने कदम रखा ,लगभग ३० छात्र वहा पर बैठे थे ,और सभी ४-५ के झुण्ड में बातें कर रहे थे 

 

परन्तु  जैसे ही कविता ने क्लास में प्रवेश करा सबकी बातचीत बंद हो गई ,खासकर लडको की ,क्योंकि कविता बहुत खूबसूरत थी .उसके चेहरे पर गिरती उसकी लटे उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रही थी .

 

कविता एक झुण्ड की तरफ बढ़ी  और कहा " हेलो मैं कविता निगम " एक लड़की निधि ने उससे हाथ मिलाया  परन्तु बाकि लडकियो ने सिर्फ हेलो करा और लडको का तो क्या कहना वो तो उससे दोस्ती करने को बेक़रार थे , पर कविता किसी से इतनी जल्दी दोस्ती नहीं करती थी इस कारण कई लोगो को लगा वो नकचड़ी हैं ,खेर फिर भी उसने दोस्त तो बना लिए  जैसे निधि ,साक्षी,सनी ,सोहेल .

facebook chat

 

इसी तरह उसके कॉलेज के दिन बिताते गए और उसे अब नए कॉलेज में अच्छा लगाने लगा पर उसे एक बात बार बार कचोट रही थी के कई बार वो अकेली रह जाती थी क्योंकि निधि अधिकतर सनी (उसका boyfriend )के साथ रहती थी ,सोहेल कॉलेज कम आता था  और साक्षी  भी इधर उधर रहती थी .

 

उसकी क्लास में एक लड़का था संजय जो काफी चुप चाप रहता था ,एक दिन वो संजय के पास गई और कहा "हेलो  मैं कविता "संजय ने भी उसकी तरफ हाथ बढाया ,दोनों की दोस्ती हो गई पर संजय बहुत कम बोलने वालो में से था इसीलिए कविता को अकेलापन  लगता था ,संजय ने कविता को फेसबुक के बारे में बताया  और कविता ने उस पर अकाउंट बना लिया .

 

क्या ये फेसबुक कविता की जिंदगी में कुछ नयापन लायेगा,क्या कविता का अकेलापन दूर होगा.जानने के लिए पढ़िए अगला भाग जल्द ही .

(इस कहानी के सभी पात्र और घटनाये काल्पनिक हैं इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं हैं और अगर ऐसा हुआ भी तो इसे मात्र एक संयोग कहा जायेगा )