मेरे महबूब


वो लटे तेरे बालो की 

कुछ कहती वो निगाहे तेरी


होठ तेरे सुर्ख लाल 

करते हैं कमाल 

 

वो चुलबुला अंदाज़ 

वो मीठी सी आवाज़


जब जब देखता हूँ तेरी हसीं 

उस दिन का सबसे खुशनसीब पल होता हैं 

वो मेरे लिए


चाहता हूँ कोई ऐसी जगह हो

जहाँ बस तू और मैं रहे 



praise-love



हाथ मैं हाथ पकड़ कर चले

समंदर के पार 

चल ले एक नया अवतार 


हवाओ का करता हूँ मैं शुक्रिया 

क्योंकि जब -जब उड़ाती हैं ये तेरी जुल्फे 

तेरी खूबसूरती में चार चाँद लग जाते हैं


हसीनाये तो कई देखी मैंने

तुझसे हसीन ना देखी कही 


तारीफ़ और क्या करू तेरी अब 

बस इतना कहूँगा के 

अगर कोई पूछे मुझसे के

इश्क कैसे होता हैं 

तो बस इतना कहूँगा के

एक बार मेरे महबूब को देख लो 

समझ आ जायेगा कैसे होता हैं .  

 

 

(चिराग )


(P.S:-This poem is for a special friend)

Comments

  1. Badi khubsurti se kisi ki tarif kari hai apne chirag babu...

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  2. ohoooo.... who is this special friend?€??

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  3. @maithili
    hain ek jise ek din dekha aur bas lines apane aap banti gai...use suna di hain poem maine bt bataya nahi hain k usake liye hain

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  4. ye kiski sangat hai jo rang lai hai
    ye kaisi aada aaj shayari me aayi hai
    ye kiska asar alfazo me jhalak rha hai
    koi to baat hai jo tumne nhi batayi hai

    .........bol na kaun hai
    waise poem mast hai

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  5. @ritu bahut khoob reply
    tu use acche se janti hain....

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  6. Gud one Chirag...Special poem for special freind is really special.

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  7. बहुत अच्छे भाव...प्यार होने के एहसास के साथ

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  8. @veenaji
    bahut bahut dhanaywad

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  9. भावपूर्ण रचना...

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