Saturday, 30 April 2011

Poetry For Lover | मेरे महबूब



 
वो लटे तेरे बालो की 

 
कुछ कहती वो निगाहे तेरी

 

 
होठ तेरे सुर्ख लाल 

 
करते हैं कमाल 

 
 

 
वो चुलबुला अंदाज़ 

 
वो मीठी सी आवाज़

 

 
जब जब देखता हूँ तेरी हसीं 

 
उस दिन का सबसे खुशनसीब पल होता हैं 

 
वो मेरे लिए

 

 
चाहता हूँ कोई ऐसी जगह हो

 
जहाँ बस तू और मैं रहे 

 


 

 
Poetry For Lover

 


 

 
हाथ मैं हाथ पकड़ कर चले

 
समंदर के पार 

 
चल ले एक नया अवतार 

 

 
हवाओ का करता हूँ मैं शुक्रिया 

 
क्योंकि जब -जब उड़ाती हैं ये तेरी जुल्फे 

 
तेरी खूबसूरती में चार चाँद लग जाते हैं

 

 
हसीनाये तो कई देखी मैंने

 
तुझसे हसीन ना देखी कही 

 

 
तारीफ़ और क्या करू तेरी अब 

 
बस इतना कहूँगा के 

 
अगर कोई पूछे मुझसे के

 
इश्क कैसे होता हैं 

 
तो बस इतना कहूँगा के

 
एक बार मेरे महबूब को देख लो 

 
समझ आ जायेगा कैसे होता हैं .  

 

 

 
(चिराग )

 

(P.S:-This poem is for a special friend)



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