Thursday, 17 February 2011

दोस्ती एक प्यारा रिश्ता .....

एक दिन मेरे खुदा ने मुझसे पूछा ,

क्या हैं ये दोस्ती ,
क्यो बनाता हैं तू दोस्त ,
ऐसा क्या हैं इस रिश्ते मैं ,
जो नही हैं लहू के रिश्ते में ।

मैंने खुदा से कहा ,
एक भरोसा हैं दोस्ती ,
एक विश्वास हैं दोस्ती ,
जो मुश्किलों में दे साथ ,
वो परछाई हैं दोस्ती ।

इन चीजों से क्या होता हैं ,
ये सब तो लहू के नातो में भी मिल सकता हैं ,
फ़िर क्यो करता हैं तू दोस्ती ,
क्यो करता हैं अपनो से ज्यादा विश्वास दोस्त पर ।



मेरे खुदा ,
आज भाई -भाई से लड़ रहा हैं ,
बेटा पिता को मार रहा हैं ,
लहू के रिश्तो में लहू हैं ,
इसीलिए हर कोई अपनो का लहू बहा रहा हैं ।

मेरी दोस्ती तो प्रेम का रिश्ता हैं ,
तभी उसमे प्रेम रस बहता हैं ।

दोस्ती की क्या मिसाल दूँ मैं ,
दो जिस्म एक जान हैं दोस्ती ,
आज के इस कलयुग में ,
तुम्हारे होने का अहसास हैं दोस्ती ।

सच कहा बन्दे तुने ,
दोस्ती की असली पहचान हैं तुझे
तू और तेरी दोस्ती सलामत रहे हमेशा ,
यही हैं मेरी दुआ हैं तुझे 

(चिराग )