बदलता समय


पहले और अब के ज़माने मे ,
आ गया हैं अन्तर बहुत ,

पहले थे दिन बड़े ,
अब बड़ी होती हैं राते।

पहले मिलते थे तो कहते थे कैसे हैं आप ,
आजकल पूछते हैं कहाँ हो जनाब।

सुबह ६ बजे होती थी पहले सबसे राम राम ,
अब तो ६ बजे शुरू होता हैं आराम।

सच्चे मन से सुख दुःख में साथ देने वाले इंसान थे पहले ,
अब तो बन गए हैं सब proffesionalism के चेले ।

पहले नही थे जागरूक लोग इतने प्यारे ,
अब तो youngistan के जवान है कई सारे

पहले थी अन्धविश्वास की बीमारी ,
अब विशवास को मानती हैं जनता सारी ।

नही थी लड़कियों को इतनी आज़ादी पहले ,
अब तो लड़कियों ने सँभाल ली हैं देश को चलाने की जिम्मेदारी ।

पहले और अब में कई परिवर्तन आए हैं
कई अच्छे तो कई बुरे आए हैं ।

पहले के अनुभव और आज के जोश के साथ बढ़ना होगा हमें आगे ,
तभी हम बनेंगे इस दुनिया के सरताज प्यारे ।
(चिराग )

Comments

  1. किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

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  2. गहरी बात कह दी आपने। नज़र आती हुये पर भी यकीं नहीं आता।

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  3. पहले मिलते थे तो कहते थे कैसे हैं आप ,
    आजकल पूछते हैं कहाँ हो जनाब।

    बहुत खूब .....
    क्योंकि जनाब रात भर गायब रहते हैं......
    तो पूछना तो पड़ेगा ही न ....

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  4. @sanjay ji
    thanks sir
    for coming to my blog
    iam really happy to see u here

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  5. @hirji
    thanks ji
    ab aajkal log milate nahi hain to kahna hi padta hain kaha ho janab

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  6. आपके लेखन ने इसे जानदार और शानदार बना दिया है....

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  7. समय को बहुत सलीके से बयां किया है आपने। बधाई।

    ---------
    ब्‍लॉगवाणी: एक नई शुरूआत।

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  8. पहले मिलते थे तो कहते थे कैसे हैं आप ,
    आजकल पूछते हैं कहाँ हो जनाब।

    बहुत खूब...बहुत प्यारी रचना...हकीकत बयां करती..आज के समय के अनुरूप
    आपका ब्लॉग फॉले कर रही हूं...ताकि भावमयी रचना पढ़ने को मिले...

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  9. @veena ji
    thanks..and more thanks for folowing my blog

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