Monday, 21 February 2011

मुन्नी-1

"मुन्नी ओ मुन्नी ...कहाँ गयी तू "...शांतिबाई  की रुखी सी आवाज़  आई.शांतिबाई मुन्नी की दादी हैं ".आई दादी "..."कहाँ चली गयी थी तू ,तुझे कितनी बार कहाँ हैं रात के अँधेरे में मत जाया कर मुझे डर लगता हैं ,कही तुझे कुछ हो न जाये ".
" आप चिंता ना करो दादी ..में बस सागर किनारे ही गयी थी" .
उसकी माँ के छोड़ जाने के बाद उसे उसकी दादी ने ही पाला था ,पिता तो कई साल पहले गए थे पैसे कमाने विदेश  पर आज तक लौट कर नहीं आये हैं .

बात आज से दस साल पहले की हैं ..तब मुन्नी के  बापू अमरलाल जो एक मछुआरा था उसने सारिका से विवाह करा था .
मुन्नी उन दोनों की लड़की हैं .अमरलाल शुरू से ही गरीब परिवार में पला था ...उसका बाप मदन भी मछुआरा था और ये उनका पुराना धंधा था, परन्तु सारिका एशो आराम चाहती थी और इसीलिए बार-बार अमरलाल को कोसती थी...
आखिर एक दिन परेशान हो कर अमरलाल कुछ और धंधा करने विदेश चला गया .तब मुन्नी बस साल भर की थी .
जब अमरलाल एक साल तक नहीं आया ,तो सारिका ने एक बड़े सेठ जो अक्सर सागर तट पर आता था उससे शादी करली, सारिका की खूबसूरत जवानी पर उसकी नज़र कब से थी .सारिका को भी एशो आराम चाहिए थे .सेठ की पहले ही दो शादी हो चुकी थी  और दोनों पत्निया स्वर्ग सिधार गयी थी .
सारिका की उम्र २५ वर्ष और सेठ की उम्र ५० वर्ष थी ...पर इससे सारिका को कोई फर्क नहीं पड़ता .
सारिका अपनी लड़की को शान्ति बाई के पास छोड़कर चली गयी ...उसने उसे बहुत रोका पर वो नहीं रुकी .
मुन्नी को तो आजतक नहीं मालूम इस सब बारे में ...उसे तो इतना पता हैं के उसके माँ-बाप इस दुनिया में नहीं हैं.
आगे क्या होगा मुन्नी का ...क्या बीतेगी उस पर जब उसे सच्चाई पता पड़ेगी....
जानने के लिए पढिये अगला भाग जल्द ही.....
   (चिराग )