Sunday, 27 February 2011

चाँद की कहानी



सूरज के जाते ही 

सांझ ने डेरा डाल लिया

चुपके से अंगड़ाई लेते हुए  फिर 

चाँद आ गया 

 

देने तपती गर्मी से राहत 

बढाने  उन दोनों के बीच चाहत 

शरमाते इठलाते हुए लो फिर 

चाँद आ गया 

 

मुझसे नहीं उन तारो से पूछो

उस नदी उस किनारों से पूछो

पुछो उन बच्चो से और उनकी माँ से 

रोज़ क्यों करते हैं वो इंतज़ार चाँद का 


story-of-moon




तारो को गगन में  सजाने 

नदी को शीतल बनाने ,नाव को किनारे पहुचाने

बच्चो को उनके पिता और 

उस माँ को अपने पति से मिलाने

फिर चंचल सा भोला सा 

चाँद आ गया 

 

सबको मिलाता सबको अपनाता 

चैन की नींद दिलाता हैं 

अगले दिन फिर मज़िल को 

पाने निकलना हैं 

ये बतलाता हैं 


एक दिन एसा भी आता हैं 

जब चाँद नहीं आता हैं 

तब ना तारे ,ना नदी ,ना किनारे ,

ना बच्चे ,ना माँ घबराती हैं 

 

क्योंकि अँधेरे के बाद फिर उजाला 

आता हैं  और 

मुस्कुराते हुए फिर  से 

चाँद आता हैं ......


(चिराग)


Friday, 25 February 2011

मुन्नी-4

मुन्नी ने संध्या के वक़्त उस औरत से मिलने का फैसला करा . "तुम किस गाँव की हो "मुन्नी ने कहा ....शंकरपुर ....जो सागर किनारे हैं ..
फिर मुन्नी ने पुछा तुम ये धंधा कब से कर रही हो.
फिर मुन्नी को उस औरत ने बताया ...मेरी शादी गाँव के एक मछुवारे से हुई थी ...परन्तु वो पैसा कमाने विदेश चला गया जब कई दिनों तक नहीं आया तो में एक सेठ से शादी कर ली और अपनी लड़की को अपनी  सांस के पास छोड़ कर वहा से चली गयी.पर उस सेठ ने मुझसे बाद में धंधा करवाया और में फिर इस धंधे में आ गई .

मुन्नी ने उससे उसके पति और साँस का नाम पूछा ...जब मुन्नी ने नाम सुने तो ....मानो उसके पैरो के नीचे से ज़मीन खिसक गई ....उसे विश्वास नहीं हो रहा था के जो औरत उसके सामने कड़ी हैं वो उसकी माँ हैं ,मुन्नी से उसे खुद क बारे में नहीं बताया और वहा से चली गई .
 अगले दिन अख़बार में खबर आई...एक बहुत बड़े गंग वार में जैक नाम के डॉन को मार डाला गया हैं ,
कुछ दिनों  बाद जब जैक के हत्यारे  को पकड़ लिया गया,जब हत्यारे को कोर्ट में लाया गया तो मुन्नी बड़ी दुविधा में पद गई क्योंकि वो हत्यारा और कोई नहीं उसका बचपन का दोस्त रमेश था ,अब मुन्नी बड़ी ही धर्मसंकट में  पद गई ...लेकिन उसने कानून के अनुसार जो सजा देनी थी रमेश को वही दी ...मुन्नी ने एक बार रमेश से मिलने का सोचा ...रमेश ने मुन्नी को बताया के वो उसे बहुत चाहता था ...परन्तु जब वो सचिन को चाहने लगी ...तो उसके मन में द्वेष आ गया और उसने सचिन को मरवा दिया ...उसके बाद वो इस दलदल में फसता चला गया ...रमेश ने कहा मुन्नी में तुम्हारे प्यार और पिता दोनों को मार डाला ...

क्या पिताजी को...परन्तु वो तो विदेश चले गए थे....तुम कब मिले उनसे ...मुन्नी ने कहा .
रमेश ने  कहा के जिस जैक को उसने मारा हैं वो उसके पिताजी थे....मुन्नी की जिंदगी में जो ये तूफ़ान आया उससे मुन्नी काफी परेशान हुई ....

अगले दिन मुन्नी की माँ यानी उस औरत के केस के फैसले का दिन था ...मुन्नी ने उस औरत को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और उस औरत को एक पत्र भेजा जिसमे उसने लिखा के वो उसके बेटी हैं और उसके पिताजी को उसके दोस्त ने मार डाला हैं.....

जब उसकी माँ ने वो पत्र पढ़ा तो शर्म से उसका सर झुक गया..उसने सोचा के केसी माँ हैं वो अपनी बेटी से धंधा   करवा रही थी ...जीने से अच्छा हैं वो मर जाये और उसने जेल में आत्महत्या कर ली .



मुन्नों की ज़िन्दगी जिस तरह से गुजारी अब तक ..शायद उससे उसे गहरा झटका लगा....उसके सारे रिशते एक ही पल में उसके  सामने ए और चले गए .
उसने जज की कुर्सी से इस्तीफा दे दिया और अपने गाव वापस जा कर एक स्कूल खोलकर बच्चो को पढ़ने लगी .


(मेरे द्वारा लिखी गई ये कहानी पूरी तरह से काल्पनिक हैं इसके पत्रों का किसी से भी सम्बन्ध नहीं हैं )

Thursday, 24 February 2011

मुन्नी -3

अब तक आपने पढ़ा के मुन्नी और सचिन एक दुसरे से प्यार करने लगे थे ,लेकिन रमेश भी मुन्नी को बहुत चाहता था परन्तु उसने अपने दिल की बात कभी मुन्नी को नहीं बताई...पर जब उसे सचिन और मुन्नी के बारे में पता चला...उसके मन में सचिन के प्रति द्वेष आ गया ...उसने सोचा के कैसे भी करके सचिन को रास्ते से हटाना हैं . रमेश जिस गेरेज पर काम करता था वहा पर अक्सर एक आदमी अपनी गाडी ठीक करवाने आता था ,उसकी गाडी हमेशा रात को आती थी गेरेज बंद होने के बाद और सुबह तक चली जाती थी ...गेरेज के मालिक ने कभी रमेश को उस गाडी को हाथ लगाने नहीं दिया .रमेश ने फिर पता करा तो उसे मालूम हुआ के ये आदमी बहुत बड़ा स्मगलर हैं ..और कई खून भी करवा चूका हैं ....रमेश ने सोचा अगर इस आदमी से मदद मांगी जाए तो सचिन को मारने में कोई दिक्कत नहीं होगी .

      आख़िरकार रमेश ने एक दिन उस आदमी की मदद से सचिन को मार डाला ,सचिन की मौत की खबर सुन कर मुन्नी को सदमा सा लग गया ......और उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ा ....








उधर रमेश एक दिन गेरेज पर काम कर रहा था तो अचानक वहा पुलिस आ गयी और रमेश  को गिरफ्तार करके ले गयी...रमेश के खिलाफ पुलिस के पास सबूत थे.जब ये बात मुन्नी को पता पड़ी तो उसने सोच लिया के आज के बाद कभी रमेश से बात नहीं करेगी.रमेश के खिलाफ अदालत में कुछ गवाह पलट गए और पाके सबूत नहीं होने के वजह से उसे सिर्फ ५ साल की कैद हुई   .










 पांच साल बाद जब रमेश जेल से बाहर आया तो सबसे पहले चाल गया मुन्नी के बारे में पता लगाने परन्तु......वो उसे वहा नहीं मिली.उसने उसे पूरी मुंबई में तलाशा ....परन्तु मुन्नी का कोई पता नहीं पड़ा .एक दिन जब रमेश एक दारू के ठेके पर गया तो वहा उसे एक आदमी मिला और उसे काम दिलवाने के बहाने ले गया .....अपने साथ .रमेश ने सोचा भी नहीं था और वो उसेउसी आदमी के पास ले गया जिसकी मदद से उसने सचिन को मरवाया था . 

      उस आदमी ने रमेश से कहा के वो उसका धंधा संभाले ...रमेश ने उसकी बात मान ली और कुछ ही सालो में रमेश ने उसके सारे धंधो का मास्टर बन गया अब वो रमेश दादा के नाम से जाना जाने लगा.

                        इस बीच मुन्नी के साथ क्या हुआ ....
                                                           मुन्नी अकेली हो चुकी थी और अकेली लड़की खुली तिजोरी के समान होती हैं ,उसे कई लोग अब गलत नज़रो से देखने लगे थे .....एक दिन एक औरत से कोठे पर ले गयी और मुन्नी से धंधा करवाने लगी. मुन्नी वहा १२ दिन ही रुकी और फिर वहा से भाग गयी.मुन्नी के एक कॉल सेण्टर में जॉब कर ली ....और आगे पढाई जारी रखने  लगी .


रमेश का धंधा बड़े जोरो पर था ....एक दिन उसके पास एक कॉल आया ...सामने से आवाज़ आई  जैक सर तुमसे मिलाना चाहते हैं ,रमेश ने हां कर दी ....रमेश और जैक दोनों एक दिन मिले, जैक भी स्मगलिंग करता हैं और उसका व्यापर और बड़ा हैं ...दोनों साथ मिलकर काम करने लगे .







एक दिन अदालत में एक केस आया एक महिला जो सेक्स रेकेट  चलाती  थी वो पकड़ा गयी थी .....अदालत में जब वो पेश हुई उसके तो होश उड़ गए उसने वकील से पुचा ये जज  कोन हैं ..उसने कहा नेहा मैडम हैं.....हां ये वाही लड़की थी जिससे वो औरत धंधा करवाना चाहती थी ...मुन्नी जज बन गयी थी ....मुन्नी ने उसकी दलील सुनी और दलीलों में मुन्नी को ये पता पड़ा के ये औरत उसके गाव की हैं ...
मुन्नी ने अगले दिन फैसला सुनाने को कहा....

रात को वो औरत ने कहा के वो मुन्नी से मिलाना चाहती हैं .....मुन्नी उस औरत से मिली और क्या बात करी  उससे ....रमेश और जैक का धंदा कैसा चल रहा था ....आगे क्या होगा जानने के लिए पढ़िए अगला और अंतिम भाग .

Wednesday, 23 February 2011

मुन्नी-2

अब तक आपने पढ़ा के मुन्नी को सच्चाई पता नहीं थी  और किस तरह उसकी माँ उसे छोड़ कर चली गयी थी ....वो भी तब जब वो सिर्फ १ साल की थी .
दिन बितते  गए मुन्नी ने स्कूल जाना शुरू कर दिया था  और पढने में भी वो काफी तेज़ थी .धीरे धीरे मुन्नी ने १२वी  उतीर्ण कर  ली 
मुन्नी अब जवान हो गयी थी और खूबसूरती में वो अपनी माँ से चार कदम आगे थी ...गाव के कई लड़के उस पर मरते थे पर उसने किसी को भाव नहीं दिया सिवाए रमेश(मुन्नी का एक मात्र दोस्त ).
अब आगे पढ़ने के लिए उसे शहर  जाना था और जो शहर वो जाना चाहती थी वो था मुंबई . परन्तु मुंबई जाने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे .यहाँ तो वो जैसे तैसे पढ़ ली थी पर अब आगे कैसे जाये .

मुन्नी का एक दोस्त भी था रमेश जो गावं के ही मछुआरे का लड़का था दोनों काफी अच्छे दोस्त थे ,जब मुन्नी ने अपनी परेशानी रमेश को बताई तो उसने कहा के वो भी उसके साथ मुंबई जायेगा वो वहा काम करके पैसे कमाएगा और मुन्नी का खर्चा भी उठाएगा.
परन्तु मुन्नी ने मना कर दिया उसने कहा मैं तुम पर बोझ    नही  बनना चाहती हूँ, तब रमेश ने कहा दोस्त कोई बोझ नही होते और मुझे भी कुछ काम करना हैं तो मैं भी कुछ काम धुंध लूँगा वहा मुझे अपनी जिंदगी इस सागर किनारे नहीं बितानी हैं.
आखिरकार रमेश की बात मुन्नी ने मान ली पर दादी की मंजूरी भी जरुरी थी.
दादी से मुन्नी ने कहा के वो मुंबई जाना चाहती हैं पढने ,पर दादी ने मना कर दिया और कहा के वहा अकेले कहा रहेगी कही कुछ हो गया तुझे तो.....मुन्नी ने कहा आप चिंता ना करो रमेश भी मेरे साथ जा रहा हैं ,हम दोनों रह लेंगे वहां .

आखिरकार मुन्नी और रमेश दोनों मुंबई रवाना हो गए .
 मुंबई पहुच तो गए दोनों परन्तु मुंबई तो सपनो का शहर हैं  ...यहाँ सपने इतने आसानी से पुरे नहीं होते.

मुन्नी और रमेश १ हफ्ते तक घर ढूदते रहे और 
आखिरकार उन्हें एक चाल में जगह मिल ही गयी .

अब चाल का जीवन बहुत अलग था ....रोज पानी लाना झगडे सुनना और भी कई तल्कीफ होती थी चाल में ,
कुछ दिनों बाद मुन्नी को भी कॉलेज में दाखिला मिल गया और रमेश को भी एक गेरेज पर काम मिल गया .....
दोनों की जिंदगी अच्छी चल रही थी ....तभी अचानक एक दिन मुन्नी की मुलाकात सचिन से हुई ....सचिन भी उसी चाल मैं रहता था और मुन्नी के कॉलेज मैं ही पढता था .
"तुम नेहा हो ना" (मुन्नी का नाम कॉलेज में नेहा था ) सचिन  ने कहा .
"हाँ पर तुम कोन मैंने पहचाना नहीं तुम्हे ...."
"मैं सचिन तुम्हरे कॉलेज में ही पढता हूँ यही चाल में रहता हूँ" .

फिर दोनों में दोस्ती हो गयी अब रोज साथ जाना और साथ आना और मुंबई साथ घुमाना करते थे...
एसा लग रहा था के प्यार के फूल दोनों के दिल मैं खिल गए हैं .
लेकिन कहते हैं ना ..के प्यार आग का दरिया हैं और डूब कर जाना हैं 
इसीलिए प्यार मुसीबत ना लाये एसा हो नहीं सकता ....
तो एसा के हुआ इसी क्या मुसीबत आई या आने वाली हैं दोनों की ज़िन्दगी में 
जानने के लिए पढिये अगला भाग

Monday, 21 February 2011

मुन्नी-1

"मुन्नी ओ मुन्नी ...कहाँ गयी तू "...शांतिबाई  की रुखी सी आवाज़  आई.शांतिबाई मुन्नी की दादी हैं ".आई दादी "..."कहाँ चली गयी थी तू ,तुझे कितनी बार कहाँ हैं रात के अँधेरे में मत जाया कर मुझे डर लगता हैं ,कही तुझे कुछ हो न जाये ".
" आप चिंता ना करो दादी ..में बस सागर किनारे ही गयी थी" .
उसकी माँ के छोड़ जाने के बाद उसे उसकी दादी ने ही पाला था ,पिता तो कई साल पहले गए थे पैसे कमाने विदेश  पर आज तक लौट कर नहीं आये हैं .

बात आज से दस साल पहले की हैं ..तब मुन्नी के  बापू अमरलाल जो एक मछुआरा था उसने सारिका से विवाह करा था .
मुन्नी उन दोनों की लड़की हैं .अमरलाल शुरू से ही गरीब परिवार में पला था ...उसका बाप मदन भी मछुआरा था और ये उनका पुराना धंधा था, परन्तु सारिका एशो आराम चाहती थी और इसीलिए बार-बार अमरलाल को कोसती थी...
आखिर एक दिन परेशान हो कर अमरलाल कुछ और धंधा करने विदेश चला गया .तब मुन्नी बस साल भर की थी .
जब अमरलाल एक साल तक नहीं आया ,तो सारिका ने एक बड़े सेठ जो अक्सर सागर तट पर आता था उससे शादी करली, सारिका की खूबसूरत जवानी पर उसकी नज़र कब से थी .सारिका को भी एशो आराम चाहिए थे .सेठ की पहले ही दो शादी हो चुकी थी  और दोनों पत्निया स्वर्ग सिधार गयी थी .
सारिका की उम्र २५ वर्ष और सेठ की उम्र ५० वर्ष थी ...पर इससे सारिका को कोई फर्क नहीं पड़ता .
सारिका अपनी लड़की को शान्ति बाई के पास छोड़कर चली गयी ...उसने उसे बहुत रोका पर वो नहीं रुकी .
मुन्नी को तो आजतक नहीं मालूम इस सब बारे में ...उसे तो इतना पता हैं के उसके माँ-बाप इस दुनिया में नहीं हैं.
आगे क्या होगा मुन्नी का ...क्या बीतेगी उस पर जब उसे सच्चाई पता पड़ेगी....
जानने के लिए पढिये अगला भाग जल्द ही.....
   (चिराग )

Saturday, 19 February 2011

दो पल



दो पल जो हमारे साथ हो जाते ,

जिंदगी की कहानी कुछ और ही होती ,


तुम्हारी हाँ हो जाती और,

उससे इस चातक की प्यास बुझ जाती. 



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मुश्किल से काटी हैं अब तक जिंदगी 

कांटो भरी राहो को बनाई हैं अपनी सरजमीं . 

 

दो पल जो और मिल जाते ,

तुमसे कह देते हम दिल की बातें .

 

तुम्हे देखते ही पहली बार ,

सोचा तुमसे कह देंगे ये ,

के तुम ही हो मेरे दिलदार .

 

परन्तु इस दुनिया की उधेड़बुन में रह गए ,

और तुम किसी और के हो गए .

 

दो पल में  हमने सोचा क्या होता हैं ,

पर अब हुआ हैं हमें अवबोध .

 

दो पल मैंने हमने गवाई हैं ,

सबसे अनमोल वस्तु 

दो पल की कीमत जो हम समझते ,

आज तुम हमारे होते 


दो पल के बारे में सोच कर 

हर दिन कई पल गवाते हैं 

आज भी उस दो पल को याद कर 

आँसू बहाते हैं


(चिराग )

Thursday, 17 February 2011

दोस्ती एक प्यारा रिश्ता .....

एक दिन मेरे खुदा ने मुझसे पूछा ,

क्या हैं ये दोस्ती ,
क्यो बनाता हैं तू दोस्त ,
ऐसा क्या हैं इस रिश्ते मैं ,
जो नही हैं लहू के रिश्ते में ।

मैंने खुदा से कहा ,
एक भरोसा हैं दोस्ती ,
एक विश्वास हैं दोस्ती ,
जो मुश्किलों में दे साथ ,
वो परछाई हैं दोस्ती ।

इन चीजों से क्या होता हैं ,
ये सब तो लहू के नातो में भी मिल सकता हैं ,
फ़िर क्यो करता हैं तू दोस्ती ,
क्यो करता हैं अपनो से ज्यादा विश्वास दोस्त पर ।



मेरे खुदा ,
आज भाई -भाई से लड़ रहा हैं ,
बेटा पिता को मार रहा हैं ,
लहू के रिश्तो में लहू हैं ,
इसीलिए हर कोई अपनो का लहू बहा रहा हैं ।

मेरी दोस्ती तो प्रेम का रिश्ता हैं ,
तभी उसमे प्रेम रस बहता हैं ।

दोस्ती की क्या मिसाल दूँ मैं ,
दो जिस्म एक जान हैं दोस्ती ,
आज के इस कलयुग में ,
तुम्हारे होने का अहसास हैं दोस्ती ।

सच कहा बन्दे तुने ,
दोस्ती की असली पहचान हैं तुझे
तू और तेरी दोस्ती सलामत रहे हमेशा ,
यही हैं मेरी दुआ हैं तुझे 

(चिराग )

Monday, 14 February 2011

सोचो ज़रा


ना गरीबी में हो रही हैं कमी ,
हो रहा है विकास देश का ,
बढ़ रही है भ्रष्टाचार की गंगा ,
और गन्दी हो रही हैं असली गंगा ।

अब अभी हो रही हैं मांग दहेज़ की ,
नाबलिको के हाथ में अब भी डाली जा रही है ,
बेडिया शादी की ।
आज भी लड़कियो का पैदा होना
माना जाता हैं अपशकुन ,
और आज भी जलाई जा रही हैं कई दुल्हन ।



time-to-think

आज भी नेता वादों से मुकर जाते हैं ,
दल को कपडो की तरह
बदलते हुए पाये जाते हैं ।

अब भी बन रही हैं गठबंधन की सरकार ,
नही है विश्वास जनता को ,
किस पर पूरा मेरे यार ।

आज भी नोट के बदले मिलते हैं वोट ,
आज भी धर्म के नाम पर होते हैं दंगे ,
आतंकवादियो की बढ़ रही हैं आबादी ,
और कर रहे हैं वो देश की बर्बादी ।

इतना सब होने पर भी सरकार सोती हैं ,
हम हर बार कहते हैं के ये सरकार है बेकार ,
परन्तु हम फ़िर भी चुनते रहे हैं ,
उन्हें ही हर बार मेरे यार ।

इस तरह से देश को देखकर ,
दिल बहुत रोता हैं मेरा ,
कैसे दूर होगी ये मुश्किलें
और कैसे बनेगा
ये सरताज दुनिया का ।

(चिराग )


Monday, 7 February 2011

बदलता समय


पहले और अब के ज़माने मे ,
आ गया हैं अन्तर बहुत ,

पहले थे दिन बड़े ,
अब बड़ी होती हैं राते।

पहले मिलते थे तो कहते थे कैसे हैं आप ,
आजकल पूछते हैं कहाँ हो जनाब।

सुबह ६ बजे होती थी पहले सबसे राम राम ,
अब तो ६ बजे शुरू होता हैं आराम।

सच्चे मन से सुख दुःख में साथ देने वाले इंसान थे पहले ,
अब तो बन गए हैं सब proffesionalism के चेले ।

पहले नही थे जागरूक लोग इतने प्यारे ,
अब तो youngistan के जवान है कई सारे

पहले थी अन्धविश्वास की बीमारी ,
अब विशवास को मानती हैं जनता सारी ।

नही थी लड़कियों को इतनी आज़ादी पहले ,
अब तो लड़कियों ने सँभाल ली हैं देश को चलाने की जिम्मेदारी ।

पहले और अब में कई परिवर्तन आए हैं
कई अच्छे तो कई बुरे आए हैं ।

पहले के अनुभव और आज के जोश के साथ बढ़ना होगा हमें आगे ,
तभी हम बनेंगे इस दुनिया के सरताज प्यारे ।
(चिराग )