Friday, 28 January 2011

फिर तेरी याद आयी





भीनी भीनी सी मिट्टी की महक आयी

ओस की बूंदों से पत्तो पर चमक आयी 

पीछे मुड़कर जब देखा मैंने 

तो याद तेरी फिर आयी 


अँधेरे  को दूर कर सूरज की रोशनी आयी 

सन्नाटे को चीरती चिडियों की चहचाहट आयी 

राज कई बंद हैं सीने में मेरे 

और उन्हें खोलने हँसी तेरी फिर आयी 





तेरी बातो का जादू हैं कुछ ऐसा

पत्थर भी सुनने लगे हैं ये कुछ ऐसा 

मधुशाला की और बढ़ते हुए मेरे कदमो को रोकने 

तेरी नशीली निगाहे  फिर आयी 


मुस्कुराते हुए वो पल फिर आये ,

तेरी जुल्फों  की छाव ले आये 

सोचा था फिर होगी मुलाकात तुझसे 

पर तुझे मुझसे छिनने  

ज़माने के ये रिवाज फिर आये .


(चिराग )

हँसी








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Thursday, 27 January 2011

चाहत


बागो की कच्ची कलियों की महक 

तेरी चूडियो की खनक 

वो धुप में बारिश का आना 

वो चाँद का बदलो में छुप जाना 


पौ  फटते तेरी यादो में खो जाना 

सपनों में भी तेरा आना 

हर साँस में हैं तेरा नाम 

तुझे चाहना यही हैं मेरा काम 






चाहत को मेरी ना समझाना भूल 

तुझे पाना चाहता हूँ 

तेरा होना चाहता हूँ 

तुझमे ही आज खोना चाहता हूँ 


चाहू तो ज़िन्दगी तेरे नाम कर दूँ 

पर तू ही तो मेरी ज़िन्दगी हैं 

तुझे कैसे बतलाऊ 

दिखलाऊ कैसे मेरे दिल में बसा प्यार 


आईने में ना देख तस्वीर अपनी 

मेरे दिल में देख तकदीर अपनी 

तुझे पाना हैं मुझे 

बस यही शख्सियत हैं मेरी

(चिराग )

लालूजी


एक दिन लालूजी बोले राबड़ी से,

चलो कर आये हम लन्दन की सैर ,

क्यों न बनाये कुछ दिन लन्दन में अपना बसेर.


(उस पर राबड़ी जी बोली के)

लन्दन-वंदन की सैर छोडिये,

पहले गठबंधन को जोड़िये,

आ रहे है चुनाव करीब अगर हार गए तो रहना पड़ेगा इसी बसेर।



(लालूजी बोलते है)

आप चिंता न करे चुनाव की ,

इस बार हम ही जीतेंगे गद्दी बिहार की।



इस बार कर ली हमने चुनाव की सारी तेयारी ,

और नीतिश से करली है हमने यारी.


(उस पर राबड़ी जी बोली के)

ऐसा क्या किया आपने जो नीतिश बन गए आपके यार,

दो दुश्मनों के बीच कैसे पनपा इतना प्यार.



(लालूजी बोलते है)

हमने नीतिश से कहा बस इतना,

के आधा राज तुम्हारा आधा अपना.


(उस पर राबडी जी बोली के)

लेकिन फिर कोन बनेगा मंत्री और,

कोन बनेगा संत्री.


(लालूजी बोलते है)

चिंता न करो देखि है हमने भी खूब दुनिया,

नीतिश बनेंगे मनमोहन और तुम सोनिया.


(उस पर राबडी जी बोली के)

हमें आप पर नाज़ है मेरे प्राणनाथ ,

आपने तो कर दिए हर मुश्किल रास्ते साफ़.


अब न है कोई बंधन न है किसी से बेर,

चलो बनाये कुछ दिन लन्दन में अपना बसेर.


(चिराग )