Sunday, 4 December 2011

College Short Story | बदलता दौर



 
रविवार का दिन था. दोपहर का समय था. खाना खाने के बाद अखबार से गुफ्तुगू कर रहा था. बीच- बीच में नींद भी अपने आने का सन्देश  झपकियो से भेज रही थी. पर बालीवुड और शहर की चटपटी खबरे मुझे जगाने में सहयोग कर रही थी. 

 
तभी मेरा 7 वी कक्षा में पढने वाला लड़का कमरे में आया और कहने लगा " डैड ( जी हां अब बाउजी, पिताजी और पापा शब्द गुज़रे  ज़माने की बात हो गई हैं) आज तो मज़ा आ गया." 

 
मैंने पुछा " क्या हुआ कोई प्रतियोगिता जीती क्या तुमने "

 
उसने कहा " नहीं डैड, actually आज रिया ने हां कर दी, अब वो मेरी गर्लफ्रेंड हैं."

 


 
College Short Story

 


 

उसकी ये बात सुनकर थोड़ी देर तक तो मुझे समझ नहीं आया फिर अपने आप को सँभालते हुए मैंने कहा "बेटा ये उम्र पढने की हैं, गर्लफ्रेंड बनाने की नहीं"

 
उसने कहा "ओ डैड आप भी ना ज़माने के साथ चलिए, मेरे क्लास में तो हर लड़के की गर्लफ्रेंड हैं, चलिए मैं अभी जा रहा हूँ रिया के साथ डेट हैं आज"

 
डेट... हमारे ज़माने में तो इसका अर्थ सिर्फ तारीख होता था.

 
मेरे बेटे के जाते ही मुझे अपने दिन याद आ गए, वो रामू की दूकान पर बैठ कर चाय पीते थे. लडकियों का कालेज पास ही था. वहा से जब लडकिया निकलती थी तो एकदूसरे से बस इतना कहते थे" वो नीली वाली मेरी , वो पीली वाली तेरी , अरे आज वो तेरी हरी वाली नहीं आई" 

 
जी हां यही तरीका था हमारा और नाम हम इसलिए नही लेते थे लडकियों के क्योंकि नाम पता ही नहीं थे.

 
बस रोज़ दूर से बैठकर देखते थे और फिर घर चले जाते थे.

 
वैसे ऐसा नहीं था के हमने नाम पता नहीं करे थे.पर नाम पता करना उस वक़्त जंग जीतने जैसा होता था.

 
एक बार रामू की दूकान पर सुभाष मुझसे बोला यार कमलेश " हम डरपोक हैं, एक लड़की का नाम नहीं पुछ सकते हैं."

 
मैंने कहा "बात डरने की नही हैं पर कही ऐसा ना हो के नाम पूछने के चक्कर में कोई पंगे हो जाए"

 
सुभाष ने कहा "पंगे में देख लूँगा तू बता नाम पुछ लेगा क्या ?"

 
मैंने कहा "हा हा क्यों नही तू बस पंगे देख लेना तुझे कल नाम क्या पूरा पता ला दूंगा "

 
रात को जब सोने गया तो लगा मैंने वादा तो कर लिया हैं परन्तु मैं जानता  था ये किसी का क़त्ल करने से कम खतरनाक काम नहीं हैं.

 
खेर मैं सो गया और जब सुबह उठा और तैयार हो कर निकलने की तैय्यारी करने लगा, माँ से कह दिया था के दही और शकर तैयार रखे आज मेरा एक जरुरी टेस्ट हैं.

 
आज भगवान् के सामने भी १० मिनिट ज्यादा खड़ा था और उम्मीद कर रहा था के शायद अभी भगवान् प्रकट होंगे और मुझे उस लड़की का नाम बता देंगे.

 
उस लड़की का ..हा मैंने आपको बताया नहीं मुझे उस लड़की का नाम पता करना था जिसे मैं चाहता था. अब ये प्यार था के नहीं पता नहीं, मेरे लिए तो सिर्फ वो मेरी नीली वाली थी.

 
खेर मैं चल दिया जंग पर और दूकान पर पहुचते ही मेरे दोस्तों ने मेरा ऐसे स्वागत करा जैसे आज शहीद होने वाला हूँ.

 
थोड़ी देर में कालेज खुलने का वक़्त हुआ लडकियों का आना शुरू हुआ और फिर दूर से वो आई जिसका मुझसे ज्यादा इन्तेजार तो मेरे दोस्तों को था.

 
मेरे दोस्तों ने इशारा करा और मैं समझ गया के अब बकरा कटने वाला हैं. मेरे दोस्त भी "कर चले हम फ़िदा जानो तन साथियो अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो "ये गाना गा कर मेरा होसला बढ़ा रहे थे .

 
मैं धीरे धीरे नीली वाली के पास गया उसके आते ही मैंने कहा "नमस्ते "

 
उसने कहा "जी आप कौन "

 
मैंने कहा" मैं कमलेश " और मैं ही जनता हूँ चार अक्षर का ये नाम लेने में मुझे ५ मिनिट क्यों लगे.

 
उसने कहा " जी कहिये "

 
मैंने कहा " जी वो मैं और मेरे दोस्त......"

 
मैं आगे कुछ कहता उसके पहले ही उसने कहा " कही आप वो संस्था से तो नही हैं जो युवा लोगो को जोड़कर राजनीती में ले आती हैं "

 
मैंने कहा "नहीं "

 
उसने कहा " माफ़ कीजिये आपके हाथ में रजिस्टर देखकर लगा मुझे "

 
उसकी इस बात ने मुझे वो दिशा दिखाई जिसकी मुझे तलाश थी. मैंने कहा " नहीं हम लोग तो गरीब बच्चो की मदद करते हैं , खाली  वक़्त में उन्हें पढाते  हैं. तो कुछ छोटी लडकियों को पढ़ाने  के लिए हमें कुछ कालेज की लडकियों की जरुरत थी. तो क्या आप मदद करेगी और हां तो आप अपना नाम और पता इसमें लिख दीजिये " 

 
ये बात कहने के बाद ऐसा लगा जैसे मैंने एके ४७ से लगातार सारी गोलियां चला दी हो .

 
वो मुस्कुराई और अपना नाम लिखा उसका नाम रोशनी यादव था .

 
खेर उसके जाने के बाद मैं दोस्तों की तरफ बढ़ा और ऐसा लग रहा था जैसे मैंने विश्व कप जीत लिया हो.

 
मैं अपने अतीत में खोया था और अचानक एक आवाज़ ने मुझे वापस वर्तमान में धकेल दिया.

 
"डैड ...डैड ...." मैंने आँखे खोली तो सामने मेरा लड़का था पर वो अकेला नहीं था. उसके साथ कोई और भी थी. जी हां थी. उसने कहा " डैड ये मेरी गर्लफ्रेंड हैं रिया " 

 
रिया -" हेल्लो अंकल , हाउ आर यु "

 
मैं ठीक हूँ बेटा .

 
बस इससे ज्यादा कुछ नहीं कह पाया में और सोचा अगर मैं ऐसे रोशनी को घर लाता तो शायद अभी आपको ये कहानी नही सुना पाता.

 

 
तो ये थी बदलते दौर की कहानी उम्मीद करता हूँ आप सबको ये पसंद आई होगी .

 

 
चिराग जोशी 

 
(इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं. इनका किसी भी जीवित और मृत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं हैं. अगर ऐसा होता हैं तो ये मात्र एक संयोग ही कहा जाएगा )

 
 Youtube Video- Badalta Daur






 

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Wednesday, 20 July 2011

Love Friendship | इश्क होता हैं दोस्ती के बाद

इश्क होता हैं दोस्ती के बाद ,
नशा चढ़ता हैं  शाम के बाद

 

शोला यूँ तो धडकता नहीं दिल में ,
लगती हैं आग मन में
जब देखता हूँ तुझे किसी और के साथ ,

 

 
इश्क होता हैं दोस्ती के बाद.......

 

कहना चाहूँ तुझसे जब दिल की बात 

 
बता दूँ तुझे तू क्या हैं मेरे लिए मेरी जान ,

 

 
Love Friendship

 

सच को छुपाना आसान तो नहीं ,
पर झूठ मुह से निकलता हैं ,
तुझे देखने के बाद 

 

 
इश्क होता हैं दोस्ती के बाद....... 

 

 
शोर जब सुनता हूँ  गली में ,
सोचता हूँ खुद को बंद कर लूँ घर में ,
पर सन्नाटा सुनाई देता हैं तेरे आने के बाद

 
 

 
इश्क होता हैं दोस्ती के बाद....... 

 

 
(चिराग )







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Sunday, 12 June 2011

90's Childhood | काश वापस आ जाये



 
काश वो दिन फिर आ जाये

 
पेंसिल की नौक फिर टूट जाये 

 
नौक करने के बाद के छिलके को पानी में डुबाये 

 
काश वो दिन फिर आ जाये 

 
 

 
काश वो रबर फिर घूम जाये 

 
टिफिन काश वो फिर घर से 

 
लंच टाइम में पापा देने आये 

 
गेम्स पीरियड का वो इन्तेजार 

 
वापस आ जाये 

 


90's Childhood
 

 

 

 


 
एनुअल फंक्शन का वो डांस 

 
वो नाटक की तयारी 

 
वो साइकिल की यारी 

 
काश वापस आ जाये 

 
 

 
वो साइकिल का पंचर होना 

 
वो कम्पास में से पेन चोरी होना 

 
वो ड्राइंग का  पीरियड

 
वो मोरल साइंस के पीरियड की नींद

 
वो बुक से क्रिकेट खेलना 

 
काश वापस आ जाये 

 
 

 
 

 
wwf  का वो खुमार 

 
कोई बनता rock,कोई  undertaker तो कोई rikishi 

 
वो होली का हुडदंग 

 
वो संक्रांति की पतंग 

 
हट ...काटा ......हैं  की

 
वो आवाज़ 

 
 

 
काश वापस आ जाये

 
 

 
वो दिन वो बीते हुए लम्हे 

 
आज भी जेहन में हैं मेरे 

 
बस एक वो आवाज़ वापस आ जाये 

 
और यादो को ताज़ा कर जाये 


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Friday, 6 May 2011

Poetry About Childhood | छोटी सी ख्वाहिश



 
जेब में कुछ सिक्के जो  होते ,

 
आसमान की सैर कर आते 

 
 

 
बदलो पर बैठकर जाते 

 
खुदा से कुछ बात कर आते 

 
 

 
नासमझ हैं पर फिर भी 

 
समझदारी की बात कर आते 

 
 

 
थोड़ी सी जिद करते

 
और जिद में

 
सबकी ख़ुशी मांग लाते 

 
 

 
छोटे छोटे हाथ हैं हमारे

 
पर बड़ी-बड़ी यादो को समेट लाते 

 
 

 
तुतलाती हुई जुबान से खुदा को 

 
डांट भी आते 

 


 
 

 

Poetry About Childhood

 


 
जब सब कहते हैं 

 
हम हैं तुम्हारे की स्वरुप 

 
फिर क्यों ठुकराते हैं 

 
डराते हैं ,मन पड़े तो मार भी देते हैं 

 
कुछ लोग हमें 

 

 
जब कहता खुदा हमसे के 

 
तुम हो मेरे ही बच्चे 

 
हम कहते के अपने 

 
बच्चो के खातिर कभी तो  धरती पर आ 

 

 
कभी कृष्ण बनकर 

 
कभी राम बनकर 

 
आये थे तुम धरती पर 

 
पर तुम्हे भी डराया था 

 
तुम हो भगवान इसीलिए 

 
तुमने सबको हराया था 

 

 
जब तुम्हे ही न समझ पाए वो पापी 

 
तो हम मासुमो को कैसे समझेंगे ....

 
(चिराग ) 








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Saturday, 30 April 2011

Poetry For Lover | मेरे महबूब



 
वो लटे तेरे बालो की 

 
कुछ कहती वो निगाहे तेरी

 

 
होठ तेरे सुर्ख लाल 

 
करते हैं कमाल 

 
 

 
वो चुलबुला अंदाज़ 

 
वो मीठी सी आवाज़

 

 
जब जब देखता हूँ तेरी हसीं 

 
उस दिन का सबसे खुशनसीब पल होता हैं 

 
वो मेरे लिए

 

 
चाहता हूँ कोई ऐसी जगह हो

 
जहाँ बस तू और मैं रहे 

 


 

 
Poetry For Lover

 


 

 
हाथ मैं हाथ पकड़ कर चले

 
समंदर के पार 

 
चल ले एक नया अवतार 

 

 
हवाओ का करता हूँ मैं शुक्रिया 

 
क्योंकि जब -जब उड़ाती हैं ये तेरी जुल्फे 

 
तेरी खूबसूरती में चार चाँद लग जाते हैं

 

 
हसीनाये तो कई देखी मैंने

 
तुझसे हसीन ना देखी कही 

 

 
तारीफ़ और क्या करू तेरी अब 

 
बस इतना कहूँगा के 

 
अगर कोई पूछे मुझसे के

 
इश्क कैसे होता हैं 

 
तो बस इतना कहूँगा के

 
एक बार मेरे महबूब को देख लो 

 
समझ आ जायेगा कैसे होता हैं .  

 

 

 
(चिराग )

 

(P.S:-This poem is for a special friend)



Youtube-Chirag Ki Kalam



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Friday, 25 March 2011

Poetry For Moon | गुजारिश इतनी सी ....


ऐ चाँद आज धीरे चल,

चाँदनी के साथ तू भी मचल 


आज तू तारो को भी रोक ले ,

मदहोश हो जा तू भी मोहब्बत के नशे में 

 

Poetry For Moon




ऐ चाँद आज अमावस तो नहीं हैं 

फिर भी तू कही छुप जा 

क्योंकि मेरा महबूब अपने होठो को ,

मेरे लबो से मिलाने से शरमा रहा हैं 

 

नजरो से नजरे चुरा रहा हैं 

आज मेरा प्यार मुझे बुला रहा हैं 

 

ऐ चाँद आज बिजलियो से कह दे  

के चमक जाये ,

ताकि मेरा महबूब मेरी बाहों से दूर न जाये 

 

ऐ चाँद आज कुछ ऐसा कर 

के ये रात खुशनसीब बन जाये 

 

आज ढलने ना दे रात को 

सूरज को भी उगने से रोक ले 

 

आज मेरी चाहत के खातिर 

बस इतना कर दे ...

(चिराग )



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Saturday, 19 February 2011

Love Proposal | दो पल



 

 
दो पल जो हमारे साथ हो जाते ,

 
जिंदगी की कहानी कुछ और ही होती ,

 

तुम्हारी हाँ हो जाती और,

 
उससे इस चातक की प्यास बुझ जाती. 

 


 

 
Love Proposal

 


 
मुश्किल से काटी हैं अब तक जिंदगी 

 
कांटो भरी राहो को बनाई हैं अपनी सरजमीं . 

 

 
दो पल जो और मिल जाते ,

 
तुमसे कह देते हम दिल की बातें .

 

 
तुम्हे देखते ही पहली बार ,

 
सोचा तुमसे कह देंगे ये ,

 
के तुम ही हो मेरे दिलदार .

 

 
परन्तु इस दुनिया की उधेड़बुन में रह गए ,

 
और तुम किसी और के हो गए .

 

 
दो पल में  हमने सोचा क्या होता हैं ,

 
पर अब हुआ हैं हमें अवबोध .

 

 
दो पल मैंने हमने गवाई हैं ,

 
सबसे अनमोल वस्तु 

 
दो पल की कीमत जो हम समझते ,

 
आज तुम हमारे होते 

 

दो पल के बारे में सोच कर 

 
हर दिन कई पल गवाते हैं 

 
आज भी उस दो पल को याद कर 

 
आँसू बहाते हैं

 

 
(चिराग )








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Thursday, 17 February 2011

Friendship Poem | दोस्ती एक प्यारा रिश्ता




एक दिन मेरे खुदा ने मुझसे पूछा ,

क्या हैं ये दोस्ती ,
क्यो बनाता हैं तू दोस्त ,
ऐसा क्या हैं इस रिश्ते मैं ,
जो नही हैं लहू के रिश्ते में ।


मैंने खुदा से कहा ,
एक भरोसा हैं दोस्ती ,
एक विश्वास हैं दोस्ती ,
जो मुश्किलों में दे साथ ,
वो परछाई हैं दोस्ती ।

इन चीजों से क्या होता हैं ,
ये सब तो लहू के नातो में भी मिल सकता हैं ,
फ़िर क्यो करता हैं तू दोस्ती ,
क्यो करता हैं अपनो से ज्यादा विश्वास दोस्त पर ।

Friendship Poem
मेरे खुदा ,
आज भाई -भाई से लड़ रहा हैं ,
बेटा पिता को मार रहा हैं ,
लहू के रिश्तो में लहू हैं ,
इसीलिए हर कोई अपनो का लहू बहा रहा हैं ।


मेरी दोस्ती तो प्रेम का रिश्ता हैं ,
तभी उसमे प्रेम रस बहता हैं ।

दोस्ती की क्या मिसाल दूँ मैं ,
दो जिस्म एक जान हैं दोस्ती ,
आज के इस कलयुग में ,
तुम्हारे होने का अहसास हैं दोस्ती ।

सच कहा बन्दे तुने ,
दोस्ती की असली पहचान हैं तुझे
तू और तेरी दोस्ती सलामत रहे हमेशा ,
यही हैं मेरी दुआ हैं तुझे 
(चिराग )



Poems On Rain | बूंद


Confession to Parents


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Friday, 28 January 2011

Memories Of Love | फिर तेरी याद आयी




 
भीनी भीनी सी मिट्टी की महक आयी

 
ओस की बूंदों से पत्तो पर चमक आयी 

 
पीछे मुड़कर जब देखा मैंने 

 
तो याद तेरी फिर आयी 

 

 
अँधेरे  को दूर कर सूरज की रोशनी आयी 

 
सन्नाटे को चीरती चिडियों की चहचाहट आयी 

 
राज कई बंद हैं सीने में मेरे 

 
और उन्हें खोलने हँसी तेरी फिर आयी 

 


 

Memories Of Love




 
तेरी बातो का जादू हैं कुछ ऐसा

 
पत्थर भी सुनने लगे हैं ये कुछ ऐसा 

 
मधुशाला की और बढ़ते हुए मेरे कदमो को रोकने 

 
तेरी नशीली निगाहे  फिर आयी 

 

 
मुस्कुराते हुए वो पल फिर आये ,

 
तेरी जुल्फों  की छाव ले आये 

 
सोचा था फिर होगी मुलाकात तुझसे 

 
पर तुझे मुझसे छिनने  

 
ज़माने के ये रिवाज फिर आये .

 

 

(चिराग )




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Thursday, 27 January 2011

Love Poem In Hindi | चाहत




 
बागो की कच्ची कलियों की महक 

 
तेरी चूडियो की खनक 

 
वो धुप में बारिश का आना 

 
वो चाँद का बदलो में छुप जाना 

 

 
पौ  फटते तेरी यादो में खो जाना 

 
सपनों में भी तेरा आना 

 
हर साँस में हैं तेरा नाम 

 
तुझे चाहना यही हैं मेरा काम 

 


 

 

 

Love Poem In Hindi


 


 
चाहत को मेरी ना समझाना भूल 

 
तुझे पाना चाहता हूँ 

 
तेरा होना चाहता हूँ 

 
तुझमे ही आज खोना चाहता हूँ 

 

 
चाहू तो ज़िन्दगी तेरे नाम कर दूँ 

 
पर तू ही तो मेरी ज़िन्दगी हैं 

 
तुझे कैसे बतलाऊ 

 
दिखलाऊ कैसे मेरे दिल में बसा प्यार 

 

 
आईने में ना देख तस्वीर अपनी 

 
मेरे दिल में देख तकदीर अपनी 

 
तुझे पाना हैं मुझे 

 
बस यही शख्सियत हैं मेरी

                                                                      (चिराग )

Short Story On Drug | मौत के सौदागर




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Lalu Prasad Yadav | लालूजी




 
एक दिन लालूजी बोले राबड़ी से,

 
चलो कर आये हम लन्दन की सैर ,

 
क्यों न बनाये कुछ दिन लन्दन में अपना बसेर.

 

 
(उस पर राबड़ी जी बोली के)

 
लन्दन-वंदन की सैर छोडिये,

 
पहले गठबंधन को जोड़िये,

 
आ रहे है चुनाव करीब अगर हार गए तो रहना पड़ेगा इसी बसेर।

 

 

 
(लालूजी बोलते है)

 
आप चिंता न करे चुनाव की ,

 
इस बार हम ही जीतेंगे गद्दी बिहार की।

 

 

Lalu Prasad Yadav

 


 
इस बार कर ली हमने चुनाव की सारी तेयारी ,

 
और नीतिश से करली है हमने यारी.

 

 
(उस पर राबड़ी जी बोली के)

 
ऐसा क्या किया आपने जो नीतिश बन गए आपके यार,

 
दो दुश्मनों के बीच कैसे पनपा इतना प्यार.

 

 

 
(लालूजी बोलते है)

 
हमने नीतिश से कहा बस इतना,

 
के आधा राज तुम्हारा आधा अपना.

 

 
(उस पर राबडी जी बोली के)

 
लेकिन फिर कोन बनेगा मंत्री और,

 
कोन बनेगा संत्री.

 

 
(लालूजी बोलते है)

 
चिंता न करो देखि है हमने भी खूब दुनिया,

 
नीतिश बनेंगे मनमोहन और तुम सोनिया.

 

 
(उस पर राबडी जी बोली के)

 
हमें आप पर नाज़ है मेरे प्राणनाथ ,

 
आपने तो कर दिए हर मुश्किल रास्ते साफ़.

 

 
अब न है कोई बंधन न है किसी से बेर,

 
चलो बनाये कुछ दिन लन्दन में अपना बसेर.

 

 

(चिराग )







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