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हमारे अपने बिंदास नेहराजी

तिरभिन्नाट पोहा- इंडिया व्र्सेज आस्ट्रेलिया

कुछ दिन तो बिताओ दादा-दादी और नाना-नानी के घर

कुछ किताबे तुम जैसी है

वो था दोस्त,

वो दूर है हमसे