Sunday, 12 January 2020

MS DHONI: A STORY SEEN BY EVERYONE IN INDIA


15 साल और वो भिंडी की सब्जी 


उस वक्त हम अपने नये घर मे शिफ्ट हूये थे और कुछ दिनो तक केबल का कनेक्शन भी नही लगा था । मालवा की चिलचिलाती गर्मी मे दूरदर्शन ही एक सहारा था और जब क्रिकेट का मैच हो तो दूरदर्शन स्टार स्पोर्ट्स लगने लगता था । तब  “फेयर एंड लवली  “ प्रेसेण्ट्स “फोर्थ अपांयर “  के एस्पर्ट्स कमेंट सुनकर लगता था बस अभी सचिन को संस्यास ले लेना चाहिये ।   

खैर इस गर्मी मे भी अगर क्रिकेट मैच टी.वी पर आये और वो भी India vs Pakistan तो फिर ऐसा लगता है जन्न्त और कही नही यही है । वैसे भी 12वी पास करके और IIT-JEE का स्क्रिनिंग देके वेले बैठे थे ।  India vs Pakistan सिरीज़ का ये दूसरा वन-डे  था । वैसे तो इसके पहले कई मैच देखे थे India vs Pakistan के पर इस मैच मे कुछ खास था । एक खिलाडी खेल रहा था । जिसके बारे मे  , मैं अखबारो और कभी कभार दूरदर्शन और आकाशवाणी की न्यूज़ मे टटोलता रह्ता था । जिन दोस्तो के यहा केबल था वो बताते थे के सबसे तेज़ चैनल पर उसकी खूब तारीफ हो रही थी । मैं उस खिलाडी को अच्छा खेलते हुये बस इसिलिये देखना चाहता था के  जब से क्रिकेट देखा था ,तब  से अब तक हर टीम के पास एक ऐसा विकेट कीपर था जो बल्लेबाज़ी भी बढिया करता था । 


हम दोस्तो का optimism इस कदर था के हमने नयन मोंगिया, समीर दीघे,अजय रात्रा,दीप दास गुप्ता, विजय दाहिया,सबा करीम और एम.एस.के प्रसाद के छोटे –मोटे contribution  को भी ऐसा आकते  थे के बस अब मिल गया India को भी एक बढिया विकेट-कीपर ।  हमारी सारी उम्मीदे  एक-दो मैच या ज्यादा से ज्यादा एक सीरीज़ के बाद खत्म होती गई । इस सीरीज़ मे भी उम्मीदे कुछ ऐसी  ही थी क्यूंकि एक दोस्त ने सबसे तेज़ चैनल पर इस खिलाडी की India A के लिये खेली पारीयो मे से एक की  कुछ highlight’s देखी थी  । शायद इसी  कारण पहली बार मैंने उम्मीदे एक सीरीज़ तक और बढा ली ।


मैच मे टास जीतने  के बाद जब Indian टीम बैटींग करने आयी  तो  मन कर  रहा  था के बस जल्दी से कोई आऊट हो और वो खिलाडी बैटिंग करने  आये  God of Cricket ने हमारी बात सुन ली और फिर क्रीज़ पर वो आया जिसका  मुझे  इंतेजार था ।


पेट मे भूख ने अलार्म बजा दिया ।  मैं किचन मे गया और देखा आज भिंडी बन रही थी , पर एक अलग अंदाज़ मे ,मॉ ने भिंडी के साथ आलू भी मिक्स कर रही थी    ये पहली बार ही मैं ऐसे combination को खा रहा था । मुझे लगा आज जरुर कुछ नया होगा क्योंकि मॉ की recipe  हमेशा ही बढिया होती थी ।


बस ये सोच कर मैं जा बैठा टी.वी के सामने और देखने लगा उस खिलाडी की बैटिंग जो आने वाले सालो मे भारतीय क्रिकेट के इतिहास मे नये नये chapter लिखने वाला था ।  वैसे इस series के पहले इस खिलाडी ने बांग्लादेश  के खिलाफ अपना डेब्यू कर लिया था ।  उस series मे उसने ज्यादा रन नही बनाये थे और फिर  मैं मैचेस देख भी नही पाया था । इसी कारण से मन ये मान ही नही रहा था के खिलाडी फेल हो सकता है  


लम्बे  - लम्बे  बाल और उसी तरह  से लम्बे –लम्बे shots लगाने वाले इस खिलाडी ने जैसे  ही 50 रन पार किये लगा बस अब सूकून है । फिर धीरे-धीरे जब उसने हर गेंदबाज़  के धागे खोलने  शुरु किये , लगने लगा अब हमे भी हमारा गिली मिल गया है ।मैदान मे बैठे  दर्शक और मैं बस एक ही आवाज़ लगा रहे थे, धोनी-धोनी ,  धोनी-धोनी ,  धोनी-धोनी ,  । इस कदर  धोया धोनी ने पाकिस्तान के बालर्स को ऐसा  लगा  जैसे ये उन्हे कई सालो से खेल रहा हो  ।


148 रनो  की वो पारी ने उसी दिन ये तो तय कर दिया था अब  अगले कुछ सालो मे जब-जब India के पांच विकेट गिर जायेंगे तब –तब अब टीवी बंद नही करना है । वैसे उस series मे Pakistan  ने  India को 4-2 से हराया था । पर आज भी उस series की हार  नही चुभती क्यूंकि उस series ने Indian Cricket Team को एक हीरा  दे दिया था ।


साथ ही मॉ के हाथो से बनी एक शानदार सब्जी खाने को भी मिली ।

15  सालो  से धोनी  भारतीय क्रिकेट  की लगातार सेवा कर रहे है । 2007 का टी-20 वर्ल्ड कप हो , 2011 का वन डे वर्ल्ड  कप  हो  या 2013 की चैम्पियंस ट्राफी हर बार जो खुशिया धोनी ने दी है इस देश को क्रिकेट के जरीये  दी है वो पता नही  कब और कौन दे पायेगा  


वैसे  धोनी के कई मैचेस और पारीया है जो यादगार है पर ये मेरी सबसे  पसंदीदा पारी है ।

Monday, 12 August 2019

दो दिन की छुट्टी



“वर्मा  जी दो दिन से दिखाई नही दे रहे है“ –थोडा सा परेशान होते हुये शर्मा जी ने किराना दुकान के मालिक महेश से पूछा । “ हा शर्मा जी दो दिन से दुकान पर भी नही आये , दो दिन बाद राखी भी है “ –दुकानदार ने वर्मा जी के ना आने को अपने 1000रुपये के  नुकसान  का सोचकर बोला । 
शर्मा जी – “ हा मैं इसिलिये आज आ गया  और कल तो आराम ही कर रहा था , समझ मे नही आ रहा था के क्या करू ?
“अरे शर्मा जी आप भी ना अरे दो दिन की छुट्टी और ले लो , ने निकल जाओ कही घुमने “ – महेश ने कहा और अपनी मूंछ पर ये सोचकर ताव दिया के अगर वो ये बात शर्मा जी को नही बताता तो शायद शर्मा जी के जीवन की बहुत ही खास  छुट्टीया बर्बाद हो जाती 
तभी दूर से अपने जाने –पह्चाने झोले  को लेकर वर्मा जी आते हुये दिखे । वर्मा जी के के पास वैसे कई झोले थे पर हर झोला एक से  एक था ।  उनके हर झोले पर किसी ना किसी  स्वतंत्रा  सेनानी की तस्वीर  होती थी 
“ अरे वर्मा जी कहा थे दो दिन से , हर रविवार  की तरह  कल आप हम लोगो की नाश्ता  पार्टी मे भी नही आये “-शर्मा जी  ने ऐसे पूछा जैसे देर रात आये अपने बेटे से पुछते है 
“हा  वर्मा जी कल नंदू ने बडे  ही अच्छे  समोसे  बनाये थे “- महेश ने अपने  पेट पर हाथ फेरते  हुये  कहा ।
“ अरे वो दो दिन बाद 15 अगस्त है तो उसी की तैय्यारी मे लगा हुआ था , पार्क की घास बढ गई थी वो कटवाई , अपने देश के झण्डे  को साफ करवाया, बच्चो के नाटक को देखा और हा नंदू को लड्डूओ का आर्डर  भी देकर आया । दो दिन की छुट्टी इसी मे गई “- वर्मा जी ने सामान की लिस्ट छोटू को पकडाते  हुये कहा ।
“क्या वर्मा जी कौन-सा  हमे पार्क मे ज्यादा देर रुकना  है घास तो सुबह ही कट जाती “- शर्मा जी ने ऐसे कहा  जैसे वर्मा जी ने बहुत बडी गलती कर दी हो 


Sunday, 7 July 2019

Get Back To Writing After A Long Break

जिंदगी मे हमारे पास अक्सर दो रास्ते होते है । एक  जिस पर हम चल रहे है  और एक जिस पर हम  चलना चाहते है । दोनो अक्सर हमे तब मिल जाते है जब एक रास्ते की मंजिल काफी करीब होती है । ऐसा मैंने तो कई बार महसूस किया है । कई बार वो रास्ता जिस पर मैं चल रहा हू उस रास्ते के पडाव और लोग मुझे उस रास्ते से दूर करते है जिस पर मैं चलना चाहता हू ।


लिखने का शौक काफी वक्त पहले  लगा और तब से अब तक बहुत कुछ लिखा है । वैसे शुरुवात मे ये सिर्फ एक तरीका था कुछ अलग करने का क्योंकी इंजिनियरिंग ने कुछ अलग करने का कीडा लगा दिया था । खैर तब शायद इंजिनियर्स  का  लेखक बनने  का दौर शुरु हुआ था । चेतन भगत हम जैसे लेखको के लिये एक वो फोटो फ्रेम थे जिसमे हम जैसे लेखक अपने को देखना  चाहते थे ।


खैर इसी दौर मे कई बार हुआ जब ब्लाग पर बहुत कम लिखना हुआ । आप माने या ना माने मैंने अब तक 4 ब्लाग बनाये है और किसी ना किसी कारण से डीलीट  भी कर दिये ।  परंतु हर ब्लाग से एक नयी बात सिखी है जैसे हर सेमेस्टर मे एक ना एक सब्जेक्ट  और किस्से सिखाते  थे ।  ये मेरा पाचंवा ब्लाग है और अब तक जो भी हर ब्लाग ने सिखाया मैंने इस पर उसे सुधारा ।


कुछ वक्त पहले मैंने अपनी पहली किताब PCO(पी.सी.ओ ) Amazon पर publish की और शायद ये मेरी जिंदगी के उस रास्ते  का सबसे पहला पडाव था । उस किताब को लिखने के बाद मुझे वैसा ही  सूकून  मिला जैसा हमे तब मिलता है जब शाम को घर आये और एक कप अदरक  वाली चाय सीधा  हाथ मे आ जाये ।

Thursday, 21 February 2019

Sachin Tendulkar Centuries


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सचिन बस नाम ही काफी हैं -
भाग-2





आस्ट्रेलिया के विकटो पर तेज उछ्लती गेंदो का सामना करना ही हिम्मत का काम होता है और अगर मर्व ह्यूज और क्रेग मैकडेरमौट जैसे गेंदबाज जब गेंदबाजी कर रहे हो तो बैट्समेन  की हिम्मत मे कमी आना स्वाभाविक हैं | सर डॉन ब्रेडमैन की जमीन पर सचिन ने पहली बार कदम रखा था और आस्ट्रेलियाई दर्शको ने देखा एशिया का शेर जो विश्व क्रिकेट का नया डॉन बनने की राह पर चल पडा था|





वैसे तो अपने पहले  टेस्ट  शतक के बाद आस्ट्रेलिया के क्रिकेट के सबसे पुराने opposition ने उन्हे होशियार रहने  के लिये  कह दिया  होगा  और उन्होने  इसकी  तैय्यारी  भी  की होगी  ।





Third Test Between India and Australia at Sydney





2 जनवरी 1992 को भारत सीरिज का अपना तीसरा टेस्ट खेलने Sydney Cricket Ground पर पहुचा | पहले मैच मे भारत  को 10 विकेट और दुसरे  मैच  मे  8 विकेट से आस्ट्रेलिया  ने हरा  दिया  था |





भारत ने टास जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था| आस्ट्रेलिया की पहली पारी 313 रन पर समाप्त हुई| जिसमे डेविड बून के नाट आऊट 129 रन भी शामिल थे|





जवाब मे भारत के दो विकेट 79 पर गिर गये थे| उसके बाद वेंगसरकर और रवि शास्त्री ने 111 रन की साझेदारी करके स्कोर को 197 पर पहुचा दिया था| 197 रन पर वेंगसरकर शास्त्री का साथ छोड गये और चार रन बाद ही 201 पर अजहर भी पवैलियन लौट गये थे| अजहर के बाद सचिन क्रीज पर आये और शुरु हुआ बल्लेबाजी की किताब का एक नया अध्याय जो आस्ट्रेलियाई दर्शको ने पहली बार देखा था|







Sachin Tendulkar Centuries






युवा सचिन ने जिस तरह से ह्यूज और मैकडेरमौट का सामना किया वो तारीफ के काबिल था| उन्होने रवि शास्त्री के साथ मिलकर पाचवे विकेट के लिये 196 रन की साझेदारी करी थी| जब भारत का स्कोर 397 था तब शास्त्री शानदार 206 रन बनाकर शैन वार्न का पहला टेस्ट शिकार बने| जी हा ये वार्न का पहला टेस्ट मैच था|





पहली बार इस मैच मे सचिन और वार्न आमने सामने थे|भारत की पारी 483 रन पर समाप्त हुई| सचिन अंत तक आऊट नही हुये और शानदार 148 रन बनाये| जिसमे उन्होने 14 बार गेंद को सीमारेखा के पार पहुचाया| इस शतक के साथ वो आस्ट्रेलिया मे शतक लगाने वाले सबसे युवा खिलाडी बन गये थे| उन्होने 298 मिनिट बल्लेबाजी करी थी|





आस्ट्रेलिया ने दुसरी पारी मे 173 रन बनाये 8 विकेट खोकर और मैच ड्रा हो गया|





सचिन की इस पारी पर आस्ट्रेलिया के शानदार तेज गेंदबाज मर्व ह्यूज ने एलन बार्डर से कहा था “ ये लडका तुमसे भी ज्यादा रन बनायेगा|”





इस पारी से उन्होने अपनी प्रतिभा और क्षमता को साबित करा था|





अगली कडी मे पढिये कैसे सचिन ने दुनिया की सबसे तेज पिच पर दिखाया अपना जलवा|





Sachin Tendulkar first century | सचिन बस नाम ही काफी हैं -1





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Sunday, 27 January 2019

Hindi Short Story Writing


धुआ ….ना जाने किस ओर ले जाये





Short Story Writing





हर कश मे धुआ उड रहा था और हर पल मे उसे ये अहसास हो रहा था के उसने जिंदगी मे जो भी खोया वो अब पाना आसान नही है.कहते है के गुजरा वक्त वापस नही आता. तभी उसकी नजरे जो चिलम के नशे मे डूबी हुई थी.उठी और एक व्यक्ति पर टीक गई..मानो जैसे खराब घडी की सुई हो.





Short Story Writing




पर खराब घडी भी दिन मे 2
बार सही समय बताती है.शायद ये सही समय है...वो व्यक्ति कुछ वक्त पहले उसी की तरह
बैठकर चिलम से इश्क लडाता था.उसी ने तो इसकी दोस्ती इस मुई चिलम से करवाई थी.परंतु
पिछले  कुछ महीनो से वो नजर नही आ रहा था.





अचानक उसके कानो मे आवाज़
आयी..."भागो  पुलिस आई है." इस
आवाज़ को कानो से दिमाग तक पहुचने मे कुछ वक्त लगा और इतनी देर मे उसके हाथो मे
बेडिया बंध चुकी थी.





रास्ते मे सब लोग पुलिस
जीप मे बात कर रहे थे के अपने बाप के मरने के बाद इसने ये सब छोडकर अपनी बची हुई
पढाई की और आज इंस्पेकटर बन चुका  है.





ये सब सुनकर उसका दिमाग चकरा गया और उसे याद आया के वो आज सुबह अपने बाप के लिये दवाई लेने  निकला  था.





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