Posts

बहुत दिन हुए कुछ लिखा जाए, फिर सोचा कुछ देर रुका जाए ,

अंत ही आरंभ है

तिरभिन्नाट पोहा-सख्त लौंडा

खामखा ही निकल जाता हूं ।

हमारे अपने बिंदास नेहराजी

तिरभिन्नाट पोहा- इंडिया व्र्सेज आस्ट्रेलिया